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इंदौर कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: उज्जैन के पाँच वकीलों को सजा

इंदौर। जिला अदालत ने एक ...

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इंदौर। जिला अदालत ने एक बड़े और बहुचर्चित मामले में शुक्रवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए उज्जैन के पाँच अधिवक्ताओं को दोषी करार दिया। इनमें से चार वकीलों को सात-सात साल का सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जबकि 90 वर्षीय अधिवक्ता को उम्रदराज़ी को देखते हुए तीन साल की कैद की सजा सुनाई गई। यह पहला अवसर है जब जिला अदालत ने एक साथ पाँच वकीलों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई है।

किस मामले में मिली सजा?

एडवोकेट अशोक कुमार शर्मा और वरिष्ठ अधिवक्ता गगन बजाड़ ने बताया कि फरवरी 2009 में उज्जैन जिला अदालत परिसर में अधिवक्ता धर्मेंद्र शर्मा, उनके भाई शैलेंद्र शर्मा, भवेंद्र शर्मा, पुरुषोत्तम राय और वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र शर्मा पर गंभीर हमला करने का आरोप था। इस घटना के बाद सभी पर आईपीसी की धारा 307/34 के तहत मामला दर्ज हुआ था।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश श्रीकृष्ण डागलिया ने विस्तृत सुनवाई के बाद सभी आरोपियों को दोषी पाया और सजा सुनाई। अदालत ने साफ किया कि पेशे की आड़ लेकर कानून से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पत्रकार पर हुआ था हमला

यह घटना 10 फरवरी 2009 को उस समय हुई थी जब वरिष्ठ पत्रकार घनश्याम पटेल अदालत में गवाही देने पहुँचे थे। उसी दौरान आरोपियों ने उन पर पहले धमकाने की कोशिश की और अगले ही दिन अदालत परिसर में कुर्सी, लाठी, डंडों और लोहे की छड़ से हमला कर दिया। हमले में पटेल गंभीर रूप से घायल हुए और उनकी रिवॉल्वर, सोने की चेन और घड़ी भी छीन ली गई।

घायल पत्रकार को पहले उज्जैन के संजीवनी अस्पताल और फिर इंदौर के गोकुलदास अस्पताल में करीब 15 दिन तक इलाज करवाना पड़ा।

हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा मामला

चूँकि आरोपी खुद वकील थे और स्थानीय स्तर पर उनका दबदबा था, इसलिए हाई कोर्ट ने निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए केस को इंदौर जिला अदालत में स्थानांतरित कर दिया। आरोपियों ने सुनवाई में अड़चन डालने और गवाहों पर दबाव बनाने की कोशिशें भी कीं। कई बार उन्होंने सुनवाई करने वाले जजों के तबादले की अर्जी तक लगा दी।

बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा। सुप्रीम कोर्ट ने छह महीने के भीतर केस का निपटारा करने के आदेश दिए। इसी दौरान धर्मेंद्र शर्मा की वकालत करने की सनद भी रद्द कर दी गई।

अधिवक्ताओं का बयान

प्रेस कॉन्फ्रेंस में एडवोकेट गगन बजाड़ ने बताया कि यह फैसला अधिवक्ता जगत की गरिमा बनाए रखने और कानून पर विश्वास मजबूत करने के लिए बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक आरोपी अब किसी भी तरह से इस मामले में लाभ उठाने की स्थिति में नहीं होंगे।

इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र समदानी, राहुल विजयवर्गीय, कनिष्क शर्मा और विजय गोविंदानी भी मौजूद रहे।

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मैं सूरज सेन पिछले 6 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं और मैने अलग अलग न्यूज चैनल,ओर न्यूज पोर्टल में काम किया है। खबरों को सही और सरल शब्दों में आपसे साझा करना मेरी विशेषता है।
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