सागर : पीजी कॉलेज में एबीवीपी का अनोखा प्रदर्शन,छात्रों ने कॉलेज प्रबंधन को कमीशन देने के लिये मांगी भीख
सागर/बीना। शासकीय पीजी कॉलेज में अव्यवस्थाओं के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने मंगलवार को अनोखा प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने कॉलेज प्रबंधन पर हर चीज में कमीशन मांगने का आरोप लगाते हुये बाजारों में भीख मांगी। एबीवीपी ने इससे पहले कॉलेज की विभिन्न समस्याओं को लेकर प्रभारी प्राचार्य एमएल सोनी को ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने समस्याओं के समाधान के लिये सात दिन का समय दिया था। निर्धारित समय सीमा में समस्याओं का हल न होने पर सोमवार को एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने कॉलेज में नारेबाजी, प्रदर्शन और तालाबंदी की थी। मंगलवार को एबीवीपी कार्यकर्ता बीना के कॉलेज तिराहा पर एकत्रित हुये। यहां से वे हाथों में कटोरा लेकर दुकानों पर चंदा मांगने निकले। यह प्रदर्शन कॉलेज तिराहा से शुरू होकर सर्वोदय चौराहा, अंबेडकर तिराहा होते हुये तहसील परिसर तक पहुंचा। परिषद का कहना है कि विद्यार्थियों को अपने ही कॉलेज में मूलभूत सुविधाओं के लिये भीख मांगने पर मजबूर होना पड़ रहा है। एबीवीपी ने महिला प्राचार्य पर कई गंभीर आरोप लगाये हैं। उनके अनुसार कॉलेज परिसर में विद्यार्थियों को पीने का पानी, स्वच्छ शौचालय, साफ सुथरे क्लास रूम और पंखों जैसी बुनियादी सुविधायें तक उपलब्ध नहीं हैं। क्लास रूम में गंदगी और पंखों के अभाव के कारण विद्यार्थियों को पढ़ाई में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। परिषद ने प्रतीकात्मक रूप से एकत्र किये गये चिल्लर और सिक्के प्राचार्य को देने की बात कही, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि बिना पैसे दिये कॉलेज में कोई काम नहीं होता। इसके साथ ही लाइब्रेरी की बदहाल स्थिति को भी उजागर किया। परिषद के अनुसार लाइब्रेरी में पाठ्यक्रम से संबंधित किताबों की भारी कमी है और बैठने की जगह बेहद कम होने के कारण विद्यार्थियों को मजबूरी में कम और भीड़भाड़ वाले स्थान में पढ़ाई करनी पड़ती है। एबीवीपी के राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य अनिकेत कुर्मी ने असिस्टेंट प्रो. सतीश राय पर भी गंभीर आरोप लगाये हैं। परिषद का कहना है कि तीन दिन की छुट्टी पर होने के बावजूद उन्होंने नोटिस पर हस्ताक्षर किये, जबकि वे कॉलेज में मौजूद ही नहीं थे, वही हाजिरी रजिस्टर में उनकी उपस्थिति सीएल के रूप में दर्ज होना भी संदेह पैदा करता है। परिषद ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ समय पहले सोनू वाल्मीकि को कॉलेज से बाहर कर दिया गया था और बाद में उन्हें फोन पर अभद्र भाषा का उपयोग करते हुये जान से मारने की धमकी दी गई। एबीवीपी ने कहा कि यह पूरा मामला शिक्षा के मंदिर की गरिमा को तार-तार करता है। एबीवीपी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही आरोपों की जांच कर दोषियों पर कार्यवाही नहीं की गई, तो आंदोलन को और अधिक उग्र रूप दिया जायेगा। शासकीय पीजी कॉलेज की प्राचार्य रेखा बरेठिया को जब इस मामले में दो बार कॉल किया गया तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।








