शाहगढ़ में एंबुलेंस के इंतजार में बीते दो घंटे, जिला अस्पताल पहुंचने पर नवजात बच्ची की मौत
परिजनों का आरोप—समय पर नहीं मिली 108 एंबुलेंस, बाइक से अस्पताल लाई गई गर्भवती; हालत बिगड़ने पर सागर किया गया था रेफर
शाहगढ़। सागर जिले के शाहगढ़ में एंबुलेंस सेवा मिलने में देरी का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि गर्भवती महिला को समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण बाइक से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शाहगढ़ ले जाना पड़ा। वहां महिला ने सामान्य प्रसव से बच्ची को जन्म दिया। जन्म के बाद नवजात की हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल सागर रेफर कर दिया, लेकिन परिजनों के मुताबिक, एंबुलेंस के लिए करीब दो घंटे इंतजार करना पड़ा। सुबह जिला अस्पताल पहुंचने पर बच्ची को मृत घोषित कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार, नरवा के गड़ीपुरा निवासी सुनील रॉय की पत्नी सपना रॉय की प्रसव की संभावित तारीख 7 अक्टूबर बताई गई थी। रविवार शाम अचानक पेट में दर्द होने पर परिवार ने एंबुलेंस सेवा के लिए संपर्क किया। परिजनों का कहना है कि काफी प्रयास के बावजूद वाहन उपलब्ध नहीं हो सका। ऐसे में वे सपना को बाइक से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शाहगढ़ लेकर पहुंचे।
अस्पताल में चिकित्सकीय जांच के बाद रविवार देर रात करीब डेढ़ बजे सपना ने सामान्य प्रसव के दौरान बच्ची को जन्म दिया। परिजनों के अनुसार, जन्म के बाद नवजात को बार-बार हिचकी आ रही थी। बच्ची की स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पताल सागर रेफर कर दिया।
रेफर करने के बाद भी नहीं पहुंची एंबुलेंस
परिजनों का आरोप है कि नवजात को रेफर किए जाने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने 108 एंबुलेंस सेवा से संपर्क किया और बच्ची की गंभीर स्थिति बताते हुए तत्काल वाहन भेजने का अनुरोध किया। अस्पताल प्रबंधन और परिवार के लोग लगातार एंबुलेंस चालक के संपर्क में रहे, लेकिन कथित तौर पर अलग-अलग कारणों से वाहन पहुंचने में देरी होती रही।
परिवार के मुताबिक, करीब दो घंटे तक इंतजार करने के बाद भी एंबुलेंस नहीं मिली तो उन्होंने डायल 100 पर शिकायत दर्ज कर पुलिस से मदद मांगी। सूचना मिलने पर पुलिस अस्पताल पहुंची और एंबुलेंस चालक से संपर्क कर जल्द वाहन भेजने के लिए कहा।
सुबह सागर जिला अस्पताल पहुंचे परिजन
प्रसूता के जेठ रोहित रॉय ने आरोप लगाया कि एंबुलेंस उपलब्ध कराने में हुई देरी के कारण नवजात को समय पर जिला अस्पताल नहीं ले जाया जा सका। उनके अनुसार, परिजन सुबह करीब छह बजे के बाद बच्ची को लेकर सागर जिला अस्पताल पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया।
परिजनों का मानना है कि यदि समय रहते एंबुलेंस मिल जाती, तो नवजात को जल्द उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया जा सकता था। हालांकि, बच्ची की मौत की वास्तविक वजह क्या रही और एंबुलेंस मिलने में हुई देरी का उसकी स्थिति पर कितना असर पड़ा, इसकी पुष्टि चिकित्सकीय जांच के बाद ही हो सकेगी।
इस घटना के बाद आपातकालीन एंबुलेंस सेवा की उपलब्धता और जरूरत के समय मरीजों को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। प्रसव के दौरान किसी जटिलता या नवजात की हालत बिगड़ने पर समय पर परिवहन और तत्काल चिकित्सा सहायता बेहद जरूरी होती है। ऐसे में मामले में एंबुलेंस पहुंचने में हुई कथित देरी के कारणों और जिम्मेदारी की जांच महत्वपूर्ण होगी।








