ई-टोकन मिला, फिर भी खाली हाथ लौटे किसान, ई-विकास पोर्टल की गड़बड़ी से बढ़ी मुश्किलें
पोर्टल पर दिख रहा स्टॉक, दुकान पर बताया जा रहा खत्म; बांदरी के किसानों ने कृषि विभाग से लगाई गुहार
सागर/मालथौन। रबी सीजन में खाद के लिए भटक रहे किसानों की दिक्कतें ई-विकास पोर्टल की तकनीकी गड़बड़ी ने और बढ़ा दी हैं। किसानों को ऑनलाइन ई-टोकन लेने के लिए कई-कई दिन तक जद्दोजहद करनी पड़ रही है, और बड़ी मुश्किल से टोकन मिलने के बाद भी दुकानों से खाद नहीं मिल रही है। पोर्टल पर स्टॉक होने का मैसेज देखकर किसान तय दुकान तक पहुंच रहे हैं, लेकिन वहां स्टॉक खत्म होने का हवाला देकर उन्हें वापस भेजा जा रहा है। किसानों को सुविधा देने के लिए शुरू की गई यह व्यवस्था अब खुद ही मुसीबत बन गई है।
यह पूरा मामला मालथौन विकासखंड के बांदरी स्थित धनश्री ट्रेडर्स का है। ग्राम गीधा के किसान शिवकुमार तिवारी ने बताया कि उन्हें डीएपी खाद की जरूरत थी। इसके लिए उन्होंने लगभग एक हफ्ते तक लगातार ई-टोकन बुक करने की कोशिश की। कई बार कोशिश नाकाम होने के बाद आखिरकार 22 अक्टूबर को उनके नाम से डीएपी की आठ बोरियों का ई-टोकन बुक हो गया। टोकन बुक होते ही उन्हें लगा कि अब खाद की चिंता खत्म हो गई, लेकिन उनकी यह उम्मीद ज्यादा देर टिक नहीं पाई।

शिवकुमार तिवारी टोकन लेकर जब बांदरी में धनश्री ट्रेडर्स की दुकान पर खाद लेने पहुंचे, तो दुकानदार ने खाद देने से मना कर दिया। दुकानदार का कहना था कि दुकान का पूरा स्टॉक पहले ही खत्म हो चुका है और उनका टोकन गलत ढंग से बुक हो गया है। दुकानदार ने उन्हें इस मामले में कृषि विभाग से बात करने को कहा। इसके बाद शिवकुमार तिवारी ने इसकी शिकायत एसडीईओ से की। इस घटना के बाद ई-विकास पोर्टल के काम करने के तरीके पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जब दुकान में खाद ही नहीं बची है तो पोर्टल पर उपलब्धता क्यों दिखाई दे रही है? अगर जमीनी स्टॉक और ऑनलाइन आंकड़ों में इतना अंतर है तो उसकी सजा किसान क्यों भुगते?
खाद की जरूरत के समय किसानों को पहले ही टोकन के लिए परेशान होना पड़ रहा है। बार-बार प्रयास के बाद टोकन मिलने के बावजूद खाद न मिलने से उनका समय और मेहनत दोनों बर्बाद हो रही है। किसान यह सोचकर टोकन बुक कराते हैं कि अब तय मात्रा में खाद मिल जाएगी, लेकिन पोर्टल पर गलत सूचना दिखने से उनकी परेशानी घटने के बजाय बढ़ती जा रही है।
दो दुकानों का स्टॉक खत्म, पोर्टल पर अब भी शो हो रही उपलब्धता
इस मामले में कृषि विभाग के वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी सुरेंद्र तिवारी ने जानकारी दी कि ई-विकास पोर्टल में तकनीकी दिक्कत की वजह से बांदरी की धनश्री, लक्ष्मी और ओम ट्रेडर्स के स्टॉक की जानकारी में गड़बड़ी पाई गई है। इन दुकानों का स्टॉक पहले ही समाप्त हो चुका है, लेकिन पोर्टल पर स्टॉक अपडेट न होने के कारण वहां अब भी खाद उपलब्ध दिख रही है। इसी वजह से किसान लगातार ई-टोकन बुक कर रहे हैं, जबकि हकीकत में दुकानों पर खाद है ही नहीं। उन्होंने बताया कि जिला उपसंचालक कृषि की ओर से स्टॉक का मिलान कर सुधार और जरूरी कार्रवाई के लिए भोपाल पत्र भेजा गया है।
राहत कब मिलेगी किसानों को
ई-टोकन बुक होने के बाद भी खाद न मिलने से ऑनलाइन वितरण प्रणाली की भरोसेमंदता पर सवाल खड़े हो गए हैं। किसानों का कहना है कि पोर्टल पर असली स्टॉक की जानकारी तुरंत अपडेट होनी चाहिए, ताकि स्टॉक की वास्तविक स्थिति देखकर ही टोकन जारी किए जाएं। साथ ही जिन किसानों के टोकन पहले से बुक हो चुके हैं, उन्हें खाद दिलाने के लिए कोई वैकल्पिक इंतजाम किया जाए। अब सबकी नजर इस बात पर है कि पोर्टल की यह तकनीकी खामी कब तक ठीक होती है और टोकन के आधार पर खाद देने की व्यवस्था कब तक पटरी पर लौटती है। फिलहाल तो किसान ऑनलाइन टोकन के लिए मशक्कत करने और दुकानों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।








