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सनातन मार्ग की साधना पर डॉ. अनिल दुबे का मार्गदर्शन, शिवत्व प्राप्ति के सूत्र बताए

सनातन मार्ग की साधना पर ...

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सनातन मार्ग की साधना पर डॉ. अनिल दुबे का मार्गदर्शन, शिवत्व प्राप्ति के सूत्र बताए

सनातन मार्ग या सनातन धर्म का अर्थ होता है जिस मार्ग में अनादि काल से ऋषि,मुनि,सिद्ध,देव ऋषि, साधक परम लक्ष्य तक पहुंचे हो, यही सनातन मार्ग है, यही सनातन धर्म है। “”

अनेक मार्ग है और लक्ष्य एक शिवत्व होता है””
प्रमुख मार्ग में बात करने से पहले एक आप साधक को वर्तमान स्थिति को समझे,,,
आज के समय में ना किसी साधक को गुरु का सानिध्य मिल पता है ना सेवा करने का अवसर जिससे गुरु देव उनको यथा उचित साधना बताए ऐसे अवसर पर किसी साधक को क्या करना चाहिए,,, मार्ग कठिन हो जाता है, क्योंकि आपको अपना मूल्यांकन स्वयं करना है,,,

साधक कुछ बातो क्या ध्यान रखे की शिवत्व के मार्ग में स्वयं के प्रति ईमानदार है और एक ही पैमाना ध्यान रखे

“”प्रभु के प्रति निष्काम अनुराग और संसार के प्रति उदासीन भाव का उदय हो तो समझना की आप सही रास्ते पर है””

1)अब शिवत्व प्राप्ति के साधन है :-

“”योग, भक्ति, ज्ञान,निष्काम कर्म, ब्रह्मचर्य,सत्संग, कथा श्रवण, नाम जप, मंत्र जाप,पुराणों का अध्ययन, ध्यान, पूजन,प्रभु चिंतन”” आदि अनेक मार्ग है।

अपनी पूर्वजन्म के संस्कारों के अनुरूप साधक अपने मार्ग चुनता है, या जिसमें अपनी विशेष रुचि हो उस मार्ग को चुने, परंतु एक बात का ध्यान रखे की जिस मार्ग पर चलना हो उन मार्ग से संबधित गुरु का मार्गदर्शन जरूर ले। अपने मार्ग के अतिरिक्त जो अन्य मार्ग है उनकी निंदा कभी ना करे।

जिस मार्ग से आपकी आध्यात्मिक उन्नति हो ईश्वर पर अनुराग बढ़े वहीं श्रेष्ठ है।

योग, ध्यान , ब्रह्मचर्य, मंत्र जप,और ज्ञान इन मार्गो पर गुरु सानिध्य पर है चले स्वयं से ना चले।

2) साधना में विक्षेप के मार्ग :-

“निंदा करने” से साधना में विघ्न होता है,।
“दोष दृष्टी” रखने से( किसी के दोष ना देखे),।
“क्रोध” से पिछले तीन माह का साधन नस्ट हो जाता है ।
गुरु जन, माता पिता, प्रभु भक्तो, का अपमान का करे।
“लोभ – मोह ” का त्याग करे ।
“वासना” का त्याग करे।
“भोजन” हल्का, सात्विक हो आलस्य लाने वाला ना हो।

3) साधक के ध्यान रखने योग्य बातें :-

“”पाप को मल के समान त्याग पुण्य का अमृत के समान (निष्काम) सेवन करे””

“पुण्य होने पर स्वयं को करता ना माने अपना कर्तव्य माने”

“लौकिक और पारलौकिक कामना से साधन ना करे सभी कर्म भगवान को अर्पण कर दे।”

“प्रतिदिन पुराणों का अध्ययन के इससे आपको पुराणों के ऋषि मुनियों का साथ प्राप्त होगा।”

“कथा ,कीर्तन , भजन सुने ,संगीत सुनें (संगीत मादक कभी ना सुने)””

“बाह्य पूजन मानसिक पूजन या ध्यान प्रतिदिन करे।”

“शरीर कभी भारी लगे तो प्राणायाम करे”

सभी से मित्रता का भाव रखे ।

निंदा करने, दोष दृष्टि रखने और क्रोध से साधना का जितना नाश होता है उतना किसी से नहीं होता।

मार्गदर्शन ले कर चलना अनिवार्य है पर किसी के भरोसे ना बैठ जाए। क्योंकि शिवत्व की प्राप्ति आपकी निजता में होगी समूहों में नहीं।।

“आपका सब कुछ भगवान के लिए हो आपके केंद्र में शिव हो और परिधि में संसार है।।।।

डा अनिल दुबे वैदिक देवरी बिछुआ 9936443138

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हमारे बारे में योगेश दत्त तिवारी पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और मीडिया की दुनिया में एक विश्वसनीय और सशक्त आवाज के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। अपने समर्पण, निष्पक्षता और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता के चलते उन्होंने पत्रकारिता में एक मजबूत स्थान बनाया है। पिछले 15 वर्षों से वे प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र 'देशबंधु' में संपादक के रूप में कार्यरत हैं। इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने समाज के ज्वलंत मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है और पत्रकारिता के उच्चतम मानकों को बनाए रखा है। उनकी लेखनी न सिर्फ तथ्यपरक होती है, बल्कि सामाजिक चेतना को भी जागृत करती है। योगेश दत्त तिवारी का उद्देश्य सच्ची, निष्पक्ष और जनहितकारी पत्रकारिता को बढ़ावा देना है। उन्होंने हमेशा युवाओं को जिम्मेदार पत्रकारिता के लिए प्रेरित किया है और पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम माना है। उनकी संपादकीय दृष्टि, विश्लेषणात्मक क्षमता और निर्भीक पत्रकारिता समाज के लिए प्रेरणास्रोत रही है।
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