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MP : मेडिकल कॉलेज के नाम पर करोड़ों की ठगी, ईओडब्ल्यू ने दर्ज की एफआईआर

MP : मेडिकल कॉलेज के ...

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MP : मेडिकल कॉलेज के नाम पर करोड़ों की ठगी, ईओडब्ल्यू ने दर्ज की एफआईआर

जबलपुर। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय सिवनी की साख का गलत इस्तेमाल कर बड़े स्तर पर आर्थिक धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने इस प्रकरण में सिवनी निवासी स्पर्श उर्फ अंकुर अग्रवाल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। आरोपी घटना के बाद से फरार है, जिसकी तलाश में टीम जुटी हुई है।
ईओडब्ल्यू अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने मेडिकल कॉलेज में दुकानों की नीलामी और छात्रों की मेस में सप्लाई दिलाने का भरोसा देकर दो अलग-अलग लोगों से कुल 4 करोड़ 66 लाख 68 हजार रुपये की रकम हड़प ली। यह पूरा मामला सुनियोजित आर्थिक अपराध का माना जा रहा है।
दो शिकायतों से खुली ठगी की परतें
ईओडब्ल्यू को 25 सितंबर 2025 को नेहरू रोड निवासी सुयश अग्रवाल और रामकुमार सुहाने से अलग-अलग शिकायतें प्राप्त हुई थीं। दोनों ने आरोप लगाया कि स्पर्श उर्फ अंकुर अग्रवाल ने शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय सिवनी का नाम लेकर उनसे बड़ी राशि ली, लेकिन न तो वादे पूरे किए गए और न ही पैसा लौटाया गया।
शिकायत मिलने के बाद ईओडब्ल्यू ने दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और अन्य साक्ष्यों की विस्तृत जांच की। जांच में सामने आया कि आरोपी ने सुयश अग्रवाल से 4 करोड़ 21 लाख 65 हजार रुपये और रामकुमार सुहाने से 45 लाख 3 हजार रुपये प्राप्त किए। इस तरह कुल 4 करोड़ 66 लाख 68 हजार रुपये की ठगी की पुष्टि हुई। जांच के आधार पर आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 318(4), 338, 336(3) और 340(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।
डीन से नजदीकी का दावा कर बनाया भरोसा
ईओडब्ल्यू की विवेचना में यह भी सामने आया कि अनाज व्यापारी सुयश अग्रवाल और होटल कारोबारी रामकुमार सुहाने आरोपी को पहले से जानते थे। वर्ष 2024 से संचालित शासकीय मेडिकल कॉलेज सिवनी में छात्रों की मेस किसी सरकारी निविदा से नहीं, बल्कि विद्यार्थियों द्वारा आपसी सहयोग से चलाई जाती है।
इसी व्यवस्था का लाभ उठाते हुए आरोपी ने खुद को “फूड सप्लाई” से जुड़ा दिखाया और कॉलेज में नियमित रूप से आना-जाना शुरू किया। उसने रामकुमार सुहाने के होटल से अस्थायी रूप से मेस में सप्लाई शुरू करवाई और धीरे-धीरे कॉलेज प्रशासन से नजदीकी होने का दावा करते हुए भरोसा जीत लिया। इसके बाद नियमित सप्लाई का आश्वासन दिया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने सुयश अग्रवाल को यह कहकर झांसे में लिया कि वह कॉलेज प्रशासन से अधिकृत है, डीन से उसके सीधे संबंध हैं और जल्द ही कॉलेज परिसर में दुकानों की नीलामी होने वाली है, जिसमें वह उन्हें दुकान दिलवा सकता है।
ईओडब्ल्यू का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है और अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।

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मैं सूरज सेन पिछले 6 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं और मैने अलग अलग न्यूज चैनल,ओर न्यूज पोर्टल में काम किया है। खबरों को सही और सरल शब्दों में आपसे साझा करना मेरी विशेषता है।
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