डीएपी खाद के टोकन के लिये परेशान किसान, खुलते ही ठप हो रहा पोर्टल,ऑनलाइन बुकिंग में तकनीकी खामियां, स्टॉक नहीं दिखने से बढ़ी मुश्किलें
सागर/गौरझामर। किसानों की सुविधा के लिये शुरू की गई खाद की ऑनलाइन ई.टोकन व्यवस्था अब परेशानी का कारण बन गई है। देवरी तहसील के गौरझामर क्षेत्र में डीएपी खाद का टोकन बुक कराने के लिये किसान कई दिनों से प्रयास कर रहे हैं, लेकिन पोर्टल पर स्टॉक नही दिखने और तकनीकी समस्याओं के चलते उन्हें सफलता नही मिल रही है। किसानों का कहना है कि सुबह 10 बजे पोर्टल खुलते ही सर्वर संबंधी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं, जिससे बुकिंग प्रक्रिया बाधित हो रही है। ऑनलाइन बुकिंग नहीं होने से किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। टोकन बुक कराने के लिये ऑनलाइन दुकानों पर भी किसानों की भीड़ पहुंच रही है। किसानों के अनुसार पोर्टल पर खसरा नंबर, मोबाइल नंबर और भूमि सत्यापन से जुड़ी समस्यायें सामने आ रही हैं। कई किसानों को ओटीपी नहीं मिल रहा, तो कहीं फसल का चयन नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा खाद प्राप्त करने की तारीख, खाद के प्रकार, गांव, वितरक और गोदाम की सूची से संबंधित दिक्कतों के कारण भी बुकिंग पूरी नहीं हो रही है। किसानों का कहना है कि सभी जरूरी जानकारियां भरने के बाद भी पोर्टल पर लोडिंग का चक्र घूमता रहता है और अंत में टोकन बुक नहीं हो पाता। इससे उनका समय और पैसा दोनों खर्च हो रहे हैं। वही खाद की उपलब्धता की सही जानकारी नहीं मिलने से भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। गौरझामर राजस्व मंडल के अंतर्गत आने वाले गौरझामर, सुजानपुर, सालावारा, बरकोटी, बिजोरा, खामखेड़ा, मढ़ी, पिपरिया, सरखेड़ा, जैतपुर कछया, सोनपुर, चरगुवा, गुगवारा, बहेरिया, अटारी और बेरखेरी सहित आसपास के गांवों के किसान इस समस्या से जूझ रहे हैं। किसान मोबाइल, कंप्यूटर और लैपटॉप के माध्यम से लगातार टोकन बुक कराने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण उन्हें निराश लौटना पड़ रहा है। रबी सीजन में समय पर खाद नहीं मिलने से किसानों को बोवनी प्रभावित होने की चिंता सता रही है। खेती के महत्वपूर्ण समय में डीएपी खाद की उपलब्धता और वितरण में देरी किसानों की परेशानी बढ़ा सकती है। किसानों ने संबंधित अधिकारियों से ऑनलाइन ई.टोकन पोर्टल की तकनीकी खामियां दूर करने, उपलब्ध खाद के स्टॉक की सही जानकारी प्रदर्शित करने और बुकिंग व्यवस्था को सुचारू बनाने की मांग की है। किसानों का कहना है कि व्यवस्था में जल्द सुधार किया जाये, ताकि उन्हें समय पर खाद मिल सके और रबी की बोवनी प्रभावित न हो।








