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गणतंत्र दिवस पर जेल विभाग की झांकी बनी विवाद का कारण : मैदान में सजीव फांसी का दृश्य देख चौंके दर्शक, कार्यक्रम की अनुमति पर उठे सवाल

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गणतंत्र दिवस पर जेल विभाग की झांकी बनी विवाद का कारण : मैदान में सजीव फांसी का दृश्य देख चौंके दर्शक, कार्यक्रम की अनुमति पर उठे सवाल
गुना। गणतंत्र दिवस के अवसर पर जहां जिलेभर में देशभक्ति और उत्साह का माहौल नजर आया, वहीं मध्य प्रदेश के गुना में लाल परेड मैदान पर प्रस्तुत एक सरकारी झांकी ने लोगों को हैरानी में डाल दिया। जेल विभाग की झांकी में एक जीवित युवक को फांसी के फंदे पर लटकते हुए दिखाया गया, जिसे देखकर कार्यक्रम में मौजूद दर्शक, अधिकारी और अतिथि सभी असमंजस में पड़ गए।
जानकारी के अनुसार, जेल विभाग ने परेड मैदान में कृष्णकाल से मोहनकाल की पंचलाइन के साथ अपनी झांकी प्रस्तुत की थी। झांकी का उद्देश्य जेल व्यवस्था में समय के साथ हुए बदलावों को दर्शाना बताया गया। प्रस्तुति के एक हिस्से में भगवान कृष्ण को वसुदेव की गोद में दिखाया गया, जबकि दूसरे हिस्से में एक युवक को गले में फंदा डालकर फांसी पर लटकाया गया। यह दृश्य इतना भयावह था कि कई लोग कुछ देर तक समझ ही नहीं पाए कि यह सजीव प्रस्तुति है।
मुख्य अतिथि भी रह गए स्तब्ध
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत भी इस दृश्य को देखकर चौंक गए। हालांकि मंच से उन्होंने तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और गणतंत्र दिवस की गरिमा को बनाए रखा। इसके बावजूद समारोह में मौजूद लोगों के बीच यह चर्चा होती रही कि इतनी जोखिम भरी प्रस्तुति को आखिर अनुमति कैसे दी गई।
पंचलाइन और प्रस्तुति पर सवाल
झांकी में इस्तेमाल की गई “कृष्णकाल से मोहनकाल तक” टैगलाइन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। जानकारों का कहना है कि इतनी संवेदनशील थीम के साथ जीवित व्यक्ति को फांसी पर दिखाना उचित नहीं था। प्रतीकात्मक संदेश देने के लिए पुतले का सहारा लिया जा सकता था, लेकिन सजीव दृश्य दिखाकर एक युवक की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया गया।
वीडियो में दिखे जेल अधिकारी
कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोगों ने बताया कि झांकी में शामिल युवक के पास फंदे के नजदीक जेल विभाग के अधिकारी खड़े होकर तस्वीरें खिंचवा रहे थे। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में यह दृश्य साफ तौर पर देखा जा सकता है, जिसके बाद विभाग की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं।
जेल विभाग की सफाई
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए जेल विभाग के अधीक्षक ने बताया कि झांकी में दिखाया गया युवक स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह का प्रतीकात्मक रूप था। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के लिहाज से फंदे के पीछे मोटा तार लगाया गया था, ताकि किसी तरह का खतरा न हो। अधीक्षक ने यह भी दावा किया कि वर्ष 2018 में भी इसी तरह की झांकी निकाली जा चुकी है।
घटना के सामने आने के बाद यह बहस तेज हो गई है कि क्या इतने संवेदनशील और जोखिम वाले दृश्य को सरकारी और राष्ट्रीय पर्व जैसे कार्यक्रम में दिखाना उचित था। अब इस पूरे मामले पर प्रशासन और शासन क्या कदम उठाते हैं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

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मैं सूरज सेन पिछले 6 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं और मैने अलग अलग न्यूज चैनल,ओर न्यूज पोर्टल में काम किया है। खबरों को सही और सरल शब्दों में आपसे साझा करना मेरी विशेषता है।
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