एनएच 44 पर ब्लैक स्पॉट बना मालथौन का ढलान, एनएचएआई की लापरवाही से फिर उजडे दो परिवार
मालथौन। नेशनल हाईवे 44 सागर-ललितपुर मार्ग पर रफ्तार का कहर मासूम जिंदगियों को रौंद रही है मासूम काल के गाल में समा रहे हैं। हादसों को अंकुश नहीं लग पा रहा है थाना क्षेत्र में ब्लैक स्पॉट मौत के सबब बने हुये सड़क ऑथरिटी और प्रशासन तमाशबीन बना हुआ हैं। गुरुवार को हनुमान जयंती पर दर्शन कर लौट रही मां-बेटी की मौत महज एक हादसा नहीं, बल्कि एनएचएआई और स्थानीय प्रशासन की घोर लापरवाही का नतीजा है। मालथौन टोल प्लाजा से लेकर सिविल न्यायालय तक का यह ढलान मार्ग अब मौत का गलियारा बन चुका है, जहां अंधी रफ्तार मासूम जिंदगियों को लील रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मालथौन में गुरुवार को करीब 12 बजे के बीच एनएच 44 नेशनल हाईवे रोड के थाना मालथौन नजदीक ह्रदयविदारक सड़क हादसा सामने आया है हादसे के मंजर ने आत्मा को झकझोर कर रख दिया जिसने यह मंजर देखा उसकी रूह कांप उठी। जिसमें मां बेटी की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई जबकि पिता गंभीर रूप से घायल हो गये। जानकारी के अनुसार राजा राजपूत अपनी पत्नी और बेटी के साथ बाइक से अमझरा घाटी मंदिर से दर्शनकर मालथौन लौट रहे थे। तभी थाना के पास पीछे से आ रहे अंधी रफ्तार में कंटेनर ने रौंद दिया। दर्दनाक हादसे में बाइक सवार रश्मि राजपूत पति दीपक सिंह राजपूत एवं सरोज पति राजा राजपूत 55 वर्ष की मौत हो गई। जबकि राजा सिंह राजपूत गंभीर रूप से घायल हो गये, तत्काल उन्हें मालथौन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है जहां उनका इलाज चल रहा है। वही मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों शवो को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम करा कर परिजनों को सौप दिया है। फिलहाल पुलिस ने कंटेनर को जप्त कर लिया है कंटेनर चालक मौके से फरार हो गया जिसकी तलाश की जा रही है।
बस्ती के बीच डेथ ट्रैप बना ढलान मार्ग
मालथौन हाईवे के दोनों किनारों पर घनी रहवासी बस्ती है। टोल प्लाजा से सिविल न्यायालय तक का पूरा मार्ग तीव्र ढलान पर है। इस ढलान पर वाहन अनियंत्रित गति से दौड़ते हैं। विडंबना यह है कि घटनास्थल से महज कुछ मीटर की दूरी पर पुलिस थाना, हनुमान मंदिर और सरकारी विश्राम गृह जैसे महत्वपूर्ण स्थान हैं, इसके आगे एक किलोमीटर की दूरी तमाम सरकारी कार्यालय लगे हुये। वहीं से खुरई और बीना को मार्ग को जोड़ता है। जहां लोगों की भारी आवाजाही रहती है। इसके बावजूद इस ब्लैक स्पॉट पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं।
मासूमों की मौतों के बाद भी नहीं ले रहे सबब
यह पहली बार नही है जब मालथौन की सड़के लहूलुहान हुई हैं। इससे पहले भी कई भयानक हादसे यहां हो चुके हैं। पिछले दो साल में जनता और संगठनो ने कई बार आवाज उठाई है, ढलान पर उचित सुरक्षा व्यवस्था और गति सीमा निर्धारण की मांग उठती रही है, बायपास मार्ग लेकिन प्रशासन के आश्वासन के कुछ दिनों बाद मामला फिर ठंडे बस्ते में है। सवाल यह उठता है कि क्या एनएचएआई और हाईवे अथॉरिटी किसी और बड़े अनहोनी का इंतजार कर रहे हैं।
कानूनी शिकंजे में क्यों नहीं आती एनएचएआई
लगातार हो रही इन मौतों की असल वजह सड़क का दोषपूर्ण डिजाइन और सुरक्षा उपायों का अभाव है। विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि इन मौतों के लिये सीधे तौर पर एनएचएआई जिम्मेदार है। आखिर क्यों बार-बार हो रही मौतों के बावजूद एनएचएआई पर कानून का शिकंजा नहीं कसा जाता। पुलिस प्रशासन को अब केवल ट्रक चालकों पर कार्यवाही करने के बजाय उन कारणों और संस्थाओं पर कड़ा रुख अपनाना होगा, जो इस मार्ग को असुरक्षित बनाये हुये हैं।
मुख्य मुद्दे जिन पर चिंतन की है दरकार, तीव्र ढलान
टोल प्लाजा से न्यायालय तक के ढलान पर वाहनों की गति नियंत्रित करने के लिये स्पीड ब्रेकर या रंबल स्टि्रप्स की कमी। ब्लैक स्पॉट, घनी बस्ती और मंदिर-थाने के पास सुरक्षित क्रॉसिंग और साइन बोर्ड का न होना। प्रशासनिक उदासीनता हादसों के बाद केवल औपचारिक कार्यवाही करना, स्थायी समाधान न ढूंढना।
एनएच 44 पर ब्लैक स्पॉट बना मालथौन का ढलान, एनएचएआई की लापरवाही से फिर उजडे दो परिवार
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by Suraj Sen
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