MP : दुर्गा विसर्जन के दौरान हाईटेंशन लाइन की चपेट में आई प्रतिमा, दो लोगों की मौत और 15 के घायल होने की खबर; थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली पर भी ग्रामीणों ने जताई नाराजगी
जबलपुर। जिले के मझौली में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से हुए दर्दनाक हादसे ने सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, हादसे में दो लोगों की मौत और 15 लोगों के घायल होने की खबर है। घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मझौली पहुंचाया गया।
घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने सिहोरा रोड पर चक्काजाम कर बिजली विभाग और नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई, मामले की उच्चस्तरीय जांच और मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग उठाई।
पुलिस व्यवस्था पर भी उठे सवाल
हादसे के बाद ग्रामीणों ने मझौली थाना प्रभारी अपूर्व चौरसिया की कार्यप्रणाली और नगर की व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई। प्रदर्शन के दौरान पुलिस प्रशासन के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। ग्रामीणों का कहना था कि नगर में इस प्रकार के आयोजनों के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए था। हालांकि, हादसे से पहले की सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
अस्पताल में आपातकालीन सुविधाओं को लेकर चिंता
हादसे के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दमकल व्यवस्था और ऑक्सीजन की तत्काल उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए गए। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए गए कि आपात स्थिति में जरूरी सुविधाएं तुरंत उपलब्ध नहीं थीं। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह स्वास्थ्य केंद्र की आपातकालीन तैयारियों की समीक्षा का गंभीर विषय होगा।
बड़े हादसों के दौरान अस्पताल में पर्याप्त ऑक्सीजन, प्राथमिक उपचार, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी और जरूरत पड़ने पर मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाने की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में इन सुविधाओं की वास्तविक स्थिति की जांच कराई जानी चाहिए।
टिप्पणी: हादसे के बाद नहीं, पहले हो सुरक्षा की तैयारी
मझौली की इस घटना ने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा किया है—क्या धार्मिक आयोजनों और प्रतिमा विसर्जन जैसे बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए सुरक्षा की पर्याप्त तैयारी की जाती है? ऊंची प्रतिमाओं को ले जाते समय बिजली की लाइनों से सुरक्षित दूरी, बिजली विभाग और प्रशासन के बीच समन्वय, पुलिस की तैनाती तथा आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है।
यदि हाईटेंशन लाइन से सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे या आपात स्थिति में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाईं, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। साथ ही, मृतकों के परिजनों को नियमानुसार सहायता और घायलों को बेहतर उपचार मिलना चाहिए।
जनता का सवाल यही है कि जिम्मेदारियों का निर्धारण केवल हादसे के बाद ही क्यों हो? प्रशासन को चाहिए कि घटना की निष्पक्ष जांच कराए, अस्पताल की आपातकालीन व्यवस्थाओं की समीक्षा करे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए।








