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सागर : नेशनल हाईवे 44 पर मौत की पुलिया बनी नकटा पुलिया भीषण हादसे में बाल-बाल बचा कंटेनर चालक

सागर : नेशनल हाईवे 44 ...

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सागर : नेशनल हाईवे 44 पर मौत की पुलिया बनी नकटा पुलिया भीषण हादसे में बाल-बाल बचा कंटेनर चालक
सागर / मालथौन। नेशनल हाईवे 44 पर स्थित नकटा पुलिया एक बार फिर सुर्खियों में है। सोमवार की दरम्यानी रात करीब 3 बजे यहां एक भीषण सड़क हादसा हुआ, जिसने पुलिया की खतरनाक बनावट और एनएचएआई की लापरवाही को फिर से उजागर कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार चेन्नई से परचून का सामान लेकर गुड़गांव जा रहा एक तेज रफ्तार कंटेनर नकटा पुलिया के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। चश्मदीदों और चालक के अनुसार रात के अंधेरे में एक अन्य वाहन को ओवरटेक करने के प्रयास में कंटेनर अनियंत्रित होकर सीधे पुलिया की दीवार से टकरा गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि भारी-भरकम कंटेनर का भोरु टायर सहित उखड़कर अलग हो गया। गनीमत रही कि इस खौफनाक मंजर के बावजूद चालक की जान बाल-बाल बच गई। चालक ने बताया कि हाईवे के चौड़ीकरण के बावजूद इस पुलिया की चौड़ाई काफी कम है। रात के समय और तेज रफ्तार में अचानक सड़क संकरी होने से वाहन चालकों को संभलने का मौका नहीं मिलता। यह स्थान अब एक मौत का जाल बन चुका है। उल्लेखनीय है कि यह पुलिया पिछले काफी समय से हादसों का सबब बनी हुई है। महज एक माह पहले इसी सकरी पुलिया के कारण हुये बाइक हादसे में एक होनहार युवक अपनी जान गवां चुका है। इसके बावजूद प्रशासन और संबंधित विभाग ने सुरक्षा के कोई ठोस इंतजाम नही किये हैं। क्षेत्रीय नागरिकों और वाहन चालकों की मांग है कि पुलिया का अविलंब चौड़ीकरण किया जाये। हादसों को रोकने के लिये पुलिया के दोनों ओर रेडियम रिफ्लेक्टर और चेतावनी बोर्ड लगाये जायें। रात के समय रोशनी की उचित व्यवस्था की जाये। यदि समय रहते इस ब्लैक स्पॉट का सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में किसी बड़ी जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता।

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हमारे बारे में योगेश दत्त तिवारी पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और मीडिया की दुनिया में एक विश्वसनीय और सशक्त आवाज के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। अपने समर्पण, निष्पक्षता और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता के चलते उन्होंने पत्रकारिता में एक मजबूत स्थान बनाया है। पिछले 15 वर्षों से वे प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र 'देशबंधु' में संपादक के रूप में कार्यरत हैं। इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने समाज के ज्वलंत मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है और पत्रकारिता के उच्चतम मानकों को बनाए रखा है। उनकी लेखनी न सिर्फ तथ्यपरक होती है, बल्कि सामाजिक चेतना को भी जागृत करती है। योगेश दत्त तिवारी का उद्देश्य सच्ची, निष्पक्ष और जनहितकारी पत्रकारिता को बढ़ावा देना है। उन्होंने हमेशा युवाओं को जिम्मेदार पत्रकारिता के लिए प्रेरित किया है और पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम माना है। उनकी संपादकीय दृष्टि, विश्लेषणात्मक क्षमता और निर्भीक पत्रकारिता समाज के लिए प्रेरणास्रोत रही है।
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