7 साल से अटका भुगतान, अब विवाद में बदला
भाजपा पार्षद पर सीएमओ ने एफआईआर दर्ज कराई, रजिस्टर देखने को लेकर विवाद
सागर/बण्डा। नगर परिषद बण्डा में सीएमओ और भाजपा पार्षद के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मामला थाने तक पहुंच गया। सीएमओ ने पार्षद के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई है। सीएमओ रामचरन अहिरवार के अनुसार घटना दोपहर लगभग 12.35 बजे की है। वह अपने कक्ष में विभागीय वीडियो कॉन्फ्रेंस में व्यस्त थे। उसी समय पार्षद प्रभुदयाल राठौर जो कि मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना विकास योजना द्वितीय चरण के ठेकेदार भी हैं, एक आवेदन लेकर पहुंचे। भाजपा पार्षद प्रभुदयाल राठौर ने प्रस्ताव रजिस्टर देखने की मांग की, जिस पर सीएमओ ने कहा कि वह अभी वीडियो कॉन्फ्रेंस में व्यस्त हैं और रजिस्टर अध्यक्ष की अनुमति से ही दिखाया जा सकता है। इसी बात पर विवाद शुरू हो गया, सीएमओ का आरोप है कि पार्षद ने पहले धीमी आवाज में और बाद में बाहर आकर तेज आवाज में गाली गलौज और अभद्र व्यवहार किया। इसके बाद सीएमओ ने पूरी घटना की जानकारी कर्मचारियों को दी और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिस पर बण्डा पुलिस ने भाजपा पार्षद के खिलाफ धारा 296 बी ए धारा 3 (1) द, 3(1)/3 (2) व्ही, एससी एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया।
विवाद की जड़-7 साल से अटका भुगतान
मामला केवल विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़ा आर्थिक विवाद भी बताया जा रहा है। नगर परिषद में मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना योजना द्वितीय चरण के कार्य पिछले 7 साल से अधूरे पड़े हैं। निर्माण कार्यों के परीक्षण पहले ही हो चुके थे और सभी में काम मानक के अनुरूप पाया गया। इसके बावजूद कार्यों का भुगतान अब तक नही किया गया। बताया गया कि इस मामले में 8 उच्च स्तरीय समितियां गठित हुईं, जिनमें से 5 ने रिपोर्ट ही नहीं दी, जबकि बाकी समितियों ने भी कार्य को मानक बताया।
विधानसभा में भी उठ चुका है मुद्दा
बण्डा विधायक वीरेन्द्र सिंह ने फरवरी 2024 में इस मामले को विधानसभा में उठाया था। तारांकित प्रश्न क्रमांक 1174 एवं 1175 के तहत मंत्री द्वारा 3 सदस्यीय जांच दल गठित करने और कार्यवाही का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई।
अधिकारियों पर गुमराह करने के आरोप
सूत्रों के अनुसार अधिकारियों पर ठेकेदार को दबाव में लेने और ब्लैकमेल करने के आरोप भी लगाये जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि गलत प्रक्रियाओं के चलते मामला उलझ गया है और समाधान का रास्ता नहीं निकल पा रहा है।
निविदा और भुगतान को लेकर विवाद
सितंबर 2025 में सीएमओ द्वारा भेजे गये पत्र में कार्यों को मानक बताया गया। इसके बावजूद भुगतान नही हुआ। वार्ड 12 की सड़क के मामले में दोहरे टेंडर डुप्लिकेट निविदा की गलती स्वीकार की गई। जब तक इसका निराकरण नहीं होता, अंतिम भुगतान संभव नही बताया गया।
6 साल बाद तैयार हुआ बिल, फिर भी भुगतान नही
ठेकेदार का दावा है कि कार्यों का सही माप 6 साल बाद 2025 में लिया गया और बिल भी तैयार हुआ, लेकिन अब तक भुगतान नहीं किया गया। यह भी आरोप है कि रनिंग बिल को फाइनल बिल बताकर हस्ताक्षर कराने का दबाव बनाया जा रहा है, जबकि अधिकारी हस्ताक्षर करने से बच रहे हैं।
दोबारा जारी कर दी गई निविदा
पुराने कार्यों का भुगतान करने के बजाय परिषद ने शेष कार्यों के लिए नई निविदा जारी कर दी। कार्यपालन यंत्री ने अंतिम देयक को मंजूरी नहीं दी लेकिन शेष कार्य के लिए तकनीकी स्वीकृति दे दी गई। बिना पुरानी निविदा निरस्त किये और ठेकेदार को सूचना दिये टेंडर जारी कर दिया गया।
ठेकेदार का आरोप
ठेकेदार प्रभुदयाल राठौर का कहना है कि जो भी सीएमओ के माध्यम से आरोप लगाये गये वह गलत है जबकि नियमानुसार पहले पुरानी निविदा निरस्त कर कारण बताया जाना चाहिये था अंतिम देयक और तुलना पत्रक तैयार होना चाहिये था, इसके बाद ही नई निविदा जारी होती जानबूझकर ऐसी कार्यवाही की गई ताकि मामला कोर्ट में चला जाये और इसे सब.ज्यूडिस बताकर जिम्मेदारी से बचा जा सके।
7 साल से अटका भुगतान, अब विवाद में बदला भाजपा पार्षद पर सीएमओ ने एफआईआर दर्ज कराई, रजिस्टर देखने को लेकर विवाद
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by Suraj Sen
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