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सागर : खटारा एम्बुलेंस के भरोसे मरीजों की जान, रस्सी से बंधे हैं दरवाजे

सागर : खटारा एम्बुलेंस के ...

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सागर : खटारा एम्बुलेंस के भरोसे मरीजों की जान, रस्सी से बंधे हैं दरवाजे
सागर/मालथौन। जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था खुद वेंटीलेटर पर नजर आ रही है। जिले के मालथौन क्षेत्र में मरीजों को अस्पताल ले जाने वाली एम्बुलेंस की हालत इतनी जर्जर है कि वह किसी भी समय बड़े हादसे का सबब बन सकती है। स्थिति यह है कि एम्बुलेंस के दरवाजे टूटे हुये हैं, जिन्हें लोहे की कुंडी या लॉक के बजाय रस्सी के सहारे बांधकर काम चलाया जा रहा है। हाल ही में मालथौन से एक गंभीर मरीज को सागर रेफर किया गया। जब एम्बुलेंस मरीज के पास पहुंची, तो उसके परिजन वाहन की हालत देखकर दंग रह गये। एम्बुलेंस का गेट रस्सी से बंधा था और गाड़ी का स्टेपनी टायर बाहर की जगह मरीज के लेटने वाली जगह पर अंदर रखा हुआ था। परिजनों का कहना है कि ऐसी स्थिति में मरीज को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाना भगवान भरोसे ही है। कुछ दिनों पहले ऐसा ही एक मामला सामना आया था। प्रशासन पिछली घटनाओं से भी सबक नहीं ले रहा है। कुछ समय पहले एक खटारा एम्बुलेंस का गेट अचानक लगने से एक मरीज को गंभीर चोट आई थी, जिसके बाद उसकी मौत हो गई थी। उस दौरान बीना क्षेत्र के लोगों ने जमकर प्रदर्शन कर कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन धरातल पर सुधार के नाम पर शून्य ही नजर आता है। रस्सी से बंधे दरवाजे चलते वाहन में कभी भी खुल सकते हैं, जिससे मरीज या स्वास्थ्य कर्मी नीचे गिर सकते हैं। साथ ही गाड़ी के अंदर रखा भारी टायर किसी झटके में मरीज को चोटिल कर सकता है। बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इन कबाड़ हो चुकी एम्बुलेंस को बदलने या उनकी मरम्मत कराने में रुचि नहीं दिखा रहा है।

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हमारे बारे में योगेश दत्त तिवारी पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और मीडिया की दुनिया में एक विश्वसनीय और सशक्त आवाज के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। अपने समर्पण, निष्पक्षता और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता के चलते उन्होंने पत्रकारिता में एक मजबूत स्थान बनाया है। पिछले 15 वर्षों से वे प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र 'देशबंधु' में संपादक के रूप में कार्यरत हैं। इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने समाज के ज्वलंत मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है और पत्रकारिता के उच्चतम मानकों को बनाए रखा है। उनकी लेखनी न सिर्फ तथ्यपरक होती है, बल्कि सामाजिक चेतना को भी जागृत करती है। योगेश दत्त तिवारी का उद्देश्य सच्ची, निष्पक्ष और जनहितकारी पत्रकारिता को बढ़ावा देना है। उन्होंने हमेशा युवाओं को जिम्मेदार पत्रकारिता के लिए प्रेरित किया है और पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम माना है। उनकी संपादकीय दृष्टि, विश्लेषणात्मक क्षमता और निर्भीक पत्रकारिता समाज के लिए प्रेरणास्रोत रही है।
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