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शाहपुर दीवार हादसा: 9 बच्चों की मौत मामले में 3 दोषियों को 5-5 साल की सजा

शाहपुर दीवार हादसा: 9 बच्चों ...

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शाहपुर दीवार हादसा: 9 बच्चों की मौत मामले में 3 दोषियों को 5-5 साल की सजा
अगस्त 2024 की घटना पर कोर्ट का फैसला, मकान मालिक और कथा आयोजकों को ठहराया जिम्मेदार
सागर। शाहपुर में अगस्त 2024 में हुए दर्दनाक हादसे, जिसमें दो मंजिला जर्जर मकान की दीवार गिरने से 9 बच्चों की जान चली गई थी, उस मामले में अदालत ने अपना निर्णय सुना दिया है। इस प्रकरण की सुनवाई नवम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश सिंह की अदालत में हुई।
अदालत ने मामले में मकान मालिक मुलू पिता जगन पटेल निवासी शाहपुर तथा कथा आयोजन से जुड़े संजू उर्फ केशव पिता शिव पटेल और शिव पिता गजराज पटेल, दोनों निवासी शाहपुर को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को 5-5 वर्ष के सश्रम कारावास के साथ जुर्माने की सजा सुनाई है। इस मामले में शासन की ओर से पैरवी अपर लोक अभियोजक देवेश बचकैंया ने की।
अभियोजन के मुताबिक, शाहपुर नगर में शिव पटेल द्वारा श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा था, जो 2 अगस्त से शुरू होकर 12 अगस्त 2024 तक प्रस्तावित थी। कथा के तीसरे दिन, 4 अगस्त 2024 को सुबह से ही कथास्थल पर पार्थिव शिवलिंग बनाने का कार्यक्रम चल रहा था। रविवार होने के कारण बड़ी संख्या में बच्चे वहां पहुंचे थे और उत्साह के साथ शिवलिंग निर्माण में लगे हुए थे।
इसी दौरान पास ही स्थित मुलू पटेल के खाली और जर्जर दो मंजिला पुराने मकान की दीवार अचानक ढह गई। देखते ही देखते मलबा बच्चों पर गिर पड़ा और कुल 11 बच्चे उसके नीचे दब गए। घटना के बाद मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और बच्चों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया।
अस्पताल में इलाज के दौरान 9 बच्चों की मौत हो गई, जबकि 2 बच्चे गंभीर रूप से घायल पाए गए, जिनका उपचार कराया गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई।
जांच के दौरान मकान मालिक मुलू पटेल के साथ-साथ कथा आयोजन से जुड़े शिव पटेल और संजू उर्फ केशव पटेल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने न्यायालय में चालान पेश किया, जिसके बाद सुनवाई की प्रक्रिया शुरू हुई।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने सभी जरूरी साक्ष्य और दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर मंगलवार को न्यायालय ने अपना फैसला सुनाते हुए तीनों आरोपियों को दोषी मानते हुए 5-5 वर्ष के सश्रम कारावास और जुर्माने से दंडित किया।

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