फर्जी मार्कशीट से नौकरी पाने वाले आरक्षक को जेल,ट्रांसफर होने पर दस्तावेजों की जांच में उजागर हुआ था मामला, कोर्ट ने 5 साल की सुनाई सजा
सागर। जिले के बहेरिया थाना क्षेत्र में फर्जी अंकसूची लगाकर पुलिस आरक्षक की नौकरी हासिल करने के मामले में अदालत ने फैसला सुनाया है। मामले की सुनवाई पंचम अपर सत्र न्यायाधीश सुधांशु सक्सेना की कोर्ट में हुई। न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी आशीष सूर्यवंशी को 5 वर्ष के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। वही, मामले में शामिल दो अन्य आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया। अभियोजन के अनुसार आरोपी आशीष सूर्यवंशी का वर्ष 2016 में पुलिस विभाग में आरक्षक पद पर चयन हुआ था। चयन के बाद उसकी पहली पोस्टिंग पचमढ़ी में की गई थी। इस पोस्टिंग को लेकर वह हाईकोर्ट भी गया था। बाद में विभाग ने उसकी पोस्टिंग संशोधित कर इंदौर कर दी। इंदौर तबादले के बाद आशीष के शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच की गई। जांच के दौरान सामने आया कि कक्षा 10 वीं की जो अंकसूची उसने नौकरी के लिये प्रस्तुत की थी, वह फर्जी थी। फर्जीवाड़े की पुष्टि होते ही पुलिस विभाग ने बहेरिया थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला पंजीबद्ध कर जांच शुरू की और संबंधित साक्ष्य एकत्र किये। जांच पूरी होने के बाद चालान न्यायालय में पेश किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने फर्जी अंकसूची सहित अन्य दस्तावेज और साक्ष्य कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किये। साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी माना। मामले की पैरवी कर रहे अपर लोक अभियोजक रमन कुमार जारोलिया ने बताया कि आशीष सूर्यवंशी ने वर्ष 2009 में अपने दो सहयोगियों के साथ मिलकर फर्जी अंकसूची तैयार करवाई थी। इसी अंकसूची का उपयोग उसने वर्ष 2016 की पुलिस भर्ती परीक्षा में किया था। न्यायालय ने मामले से जुड़े सभी साक्ष्यों और तथ्यों को ध्यान में रखते हुये आशीष सूर्यवंशी को 5 वर्ष के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शासकीय सेवा में फर्जी दस्तावेजों के जरिये प्रवेश गंभीर अपराध है।
फर्जी मार्कशीट से नौकरी पाने वाले आरक्षक को जेल,ट्रांसफर होने पर दस्तावेजों की जांच में उजागर हुआ था मामला, कोर्ट ने 5 साल की सुनाई सजा
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by Suraj Sen
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