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क्यों कहा जाता है हनुमान जी को ‘संकटमोचन’? जानिए पूरी कहानी…..

क्यों कहा जाता है हनुमान ...

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क्यों कहा जाता है हनुमान जी को ‘संकटमोचन’? जानिए पूरी कहानी…..

‘संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरे हनुमत बलबीरा’

‘‘संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरे हनुमत बलबीरा’’ यह चैपाई केवल शब्दों का संयोजन नहीं, अपितु सनातन श्रद्धा की वह अमिट ध्वनि है जो युगों-युगों से भक्तों के हृदय में आशा का दीप प्रज्वलित करती आ रही है। हनुमान जी का प्राकट्य उत्सव, जिसे हम हनुमान जयंती के रूप में मनाते हैं, उसी अद्भुत शक्ति, अटूट भक्ति और दिव्य कृपा का स्मरण कराने वाला पावन पर्व है।
हनुमान जी को ‘‘संकटमोचन’’ यूँ ही नहीं कहा गया। जब-जब भक्तों पर संकट आया, उन्होंने अपने पराक्रम और करुणा से उसे दूर किया। लंका में माता सीता की खोज हो, लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा हेतु संजीवनी लाना हो, अथवा अहंकारी राक्षसों का विनाश हर प्रसंग इस चैपाई की सत्यता का साक्षात प्रमाण है। ‘‘बलबीरा’’ शब्द उनके अपार बल के साथ-साथ उनके धैर्य, विवेक और समर्पण का भी द्योतक है। वे शक्ति के साथ विनम्रता का अद्वितीय उदाहरण हैं।
हनुमान जी को अष्ट सिद्धियों का स्वामी माना गया है, जो उनके दिव्य स्वरूप की अभिव्यक्ति  हैं-अणिमा जिसका अर्थ है सूक्ष्मतम रूप धारण करना (लंका में प्रवेश करते समय हनुमान जी ने सूक्षम रूप धारण किया था।), महिमा- विराट रूप धारण करना (समुद्र लाँघते समय उन्होंने विराट रूप धारण किया), गरिमा- अत्यंत भारी होना, लघिमा- अत्यंत हल्का होना (आकाश में उड़ान), प्राप्ति- इच्छित वस्तु को प्राप्त करने की क्षमता, प्राकाम्य- इच्छा पूर्ति की शक्ति, ईशित्व- नियंत्रण और प्रभुत्व, वशित्व- सबको वश में करने की क्षमता। ये सिद्धियाँ केवल अलौकिक शक्तियाँ नहीं, बल्कि यह संकेत हैं कि मनुष्य भी आत्मसंयम और साधना द्वारा अपनी सीमाओं का अतिक्रमण कर सकता है।
हनुमान जी को ‘‘नव निधियों’’ के दाता के रूप में भी पूजा जाता है। ये नौ निधियाँ भौतिक और आध्यात्मिक समृद्धि का प्रतीक हैं- महापद्म, पद्म, शंख, मकर, कच्छप, मुकुंद, कुंद, नील और खर्व। इन निधियों का अर्थ केवल धन नहीं, बल्कि जीवन में संतोष, सद्गुण और आत्मिक सम्पन्नता है। जो हनुमान जी की भक्ति करता है, उसे केवल भौतिक सुख ही नहीं, बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति भी प्राप्त होती है।
हनुमान जी को यह वरदान प्राप्त है कि वे चिरंजीवी (अजर-अमर) रहेंगेकृअर्थात् वे युगों-युगों तक जीवित रहकर धर्म की रक्षा करते रहेंगे। ऐसी मान्यता है कि जहाँ भी रामकथा होती है, वहाँ हनुमान जी अवश्य ही किसी ना किसी रूप में उपस्थित रहते हैं। यह वरदान केवल उनकी अमरता का प्रतीक नहीं, बल्कि यह दर्शाता है कि सच्ची भक्ति  और सेवा कभी नष्ट नहीं होती वह युगों तक जीवित रहती है।
वर्तमान समय के इस भौतिकवादी युग में जहाॅं आज मनुष्य अनेक प्रकार के मानसिक और सामाजिक संकटों से घिरा हुआ है। ऐसे में यह चैपाई ‘‘संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरे हनुमत बलबीरा’’हमारे अंद एक दिव्य संबल प्रदान करती है। हनुमान जी की ध्यान, पूजा और भक्तिा हमें यह सीख है कि भय का समाधान विश्वास में है, दुर्बलता का समाधान आत्मबल में है और संकट का समाधान सतत प्रयास में है।
हनुमान जी का प्राकट्य उत्सव केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला एक महान आध्यात्मिक उत्सव भी है। ‘‘संकट कटे मिटे सब पीरा’’ यह पंक्ति हमें यह विश्वास दिलाती है कि जब तक हनुमान जी का स्मरण हमारे हृदय में जीवित है, तब तक कोई भी संकट हमें विचलित नहीं कर सकता।
आईये इस पावन अवसर पर हम सभी मिलकर यह संकल्प लें कि, हम हनुमान जी के आदर्शों,निष्ठा, सेवा, साहस और विनम्रता को अपने जीवन में अपनाएँ।
जय श्री राम, जय हनुमान।

लेखक: पंडित आरंभ शुक्ला

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मैं सूरज सेन पिछले 6 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं और मैने अलग अलग न्यूज चैनल,ओर न्यूज पोर्टल में काम किया है। खबरों को सही और सरल शब्दों में आपसे साझा करना मेरी विशेषता है।
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