President of india : भारत का राष्ट्रपति देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद है। इसे राष्ट्र की एकता और संविधान की गरिमा का प्रतीक माना जाता है। राष्ट्रपति बनने का सपना हर कोई नहीं देखता, क्योंकि यह सिर्फ राजनीतिक अनुभव ही नहीं बल्कि जनसेवा और लंबे समय तक किए गए योगदान का परिणाम होता है। लेकिन बहुत से लोगों के मन में यह सवाल होता है कि आखिर कोई व्यक्ति राष्ट्रपति कैसे बनता है? इसके लिए क्या प्रक्रिया होती है और उसे किन-किन चरणों से गुजरना पड़ता है? आइए इस विषय को सरल भाषा में समझते हैं।
1. राष्ट्रपति बनने की योग्यता
भारतीय संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति बनने के लिए कुछ बुनियादी योग्यताएँ तय की गई हैं –
उम्मीदवार भारत का नागरिक होना चाहिए।
उसकी उम्र कम से कम 35 वर्ष होनी चाहिए।
वह लोकसभा का सदस्य बनने के योग्य होना चाहिए।
वह केंद्र या राज्य सरकार की किसी भी लाभकारी पद पर कार्यरत नहीं होना चाहिए (जैसे सरकारी नौकरी)।
2. राष्ट्रपति का चुनाव कौन करता है ?
राष्ट्रपति का चुनाव आम जनता सीधे नहीं करती, बल्कि एक निर्वाचक मंडल (Electoral College) करता है। इसमें शामिल होते हैं।
संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के चुने हुए सांसद।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के चुने हुए विधायक।
यानी, राष्ट्रपति बनने के लिए जनता के बीच सीधे चुनाव नहीं लड़ना होता, बल्कि संसद और विधानसभाओं के प्रतिनिधियों का समर्थन पाना जरूरी होता है।
3. चुनाव की प्रक्रिया
राष्ट्रपति का चुनाव गुप्त मतदान से होता है और इसके लिए एक विशेष प्रकार की वोटिंग प्रणाली (प्रत्येक वोट का मूल्य अलग होता है) अपनाई जाती है।
विधायकों और सांसदों के वोटों का मूल्य अलग-अलग गिना जाता है ताकि सभी राज्यों को समान प्रतिनिधित्व मिले।
चुनाव एकल हस्तांतरणीय मत प्रणाली (Single Transferable Vote System) के तहत कराया जाता है।
इस प्रक्रिया में वह उम्मीदवार विजयी होता है, जिसे कुल वैध मतों का 50% से अधिक समर्थन प्राप्त हो जाए।
4. राष्ट्रपति बनने तक की राह
किसी भी व्यक्ति को राष्ट्रपति बनने के लिए केवल कानूनी योग्यता पूरी करना ही काफी नहीं होता, बल्कि उसे राजनीतिक जीवन में लंबे समय तक सक्रिय रहना पड़ता है।
अधिकांश राष्ट्रपति पहले राजनीति, कानून, समाजसेवा या प्रशासन से जुड़े रहे हैं।
कई राष्ट्रपति पहले राज्यपाल, मंत्री, संसद सदस्य या न्यायिक पदों पर रह चुके हैं।
राष्ट्रपति पद तक पहुंचने के लिए सत्ताधारी दल और विपक्ष दोनों के समर्थन की अहम भूमिका होती है, क्योंकि यह चुनाव केवल राजनीति नहीं, बल्कि सहमति और संतुलन से भी तय होता है।
5. राष्ट्रपति बनने के बाद की शपथ
जब कोई व्यक्ति राष्ट्रपति पद के लिए निर्वाचित होता है, तो भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) उसे शपथ दिलाते हैं। शपथ के बाद वह औपचारिक रूप से भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन हो जाता है।
राष्ट्रपति बनना केवल एक चुनावी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह वर्षों की सेवा, अनुभव, और जनमानस के बीच बनाई गई विश्वसनीयता का परिणाम होता है। राष्ट्रपति राजनीति से ऊपर उठकर देश की एकता, अखंडता और संविधान की रक्षा का दायित्व निभाता है।