सात बच्चों की मां अपने ही 22 साल के भांजे के साथ घर छोड़कर चली गई। पति ने जब सच्चाई जानी तो पैरों तले ज़मीन खिसक गई। पत्नी ने न सिर्फ भांजे से शादी कर ली बल्कि बच्चों से सारे रिश्ते भी तोड़ दिए। पति अब सातों बच्चों के साथ न्याय की गुहार लगा रहा है।
पूरा मामला….
रायबरेली ज़िले के महराजगंज थाना क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे इलाके को हैरान कर दिया है। यहां सात बच्चों की मां अपने ही 22 वर्षीय भांजे के साथ घर छोड़कर चली गई। पति ने बच्चों को साथ लेकर कोतवाली पहुंचकर पत्नी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।
दिल्ली से गांव भेजी थी पत्नी
मामला पूरे अचली गांव का है। यहां के रहने वाले राजकुमार पासी दिल्ली में एक फार्म हाउस पर माली का काम करते हैं। उन्होंने 2 अगस्त को अपनी पत्नी लालती देवी को गांव भेजा था और साथ में करीब तीन लाख रुपये भी दिए थे ताकि निर्माणाधीन मकान की छत डलवाई जा सके। लेकिन एक हफ्ते बाद जब राजकुमार ने गांव में अपने भाइयों से मकान निर्माण की जानकारी ली तो पता चला कि न पत्नी गांव पहुंची और न ही कोई निर्माण कार्य शुरू हुआ।
भांजे के साथ रचाई शादी
रिश्तेदारों से पूछताछ करने पर राजकुमार को पता चला कि पत्नी लालती गांव नहीं गई, बल्कि हैदरगढ़ थाना क्षेत्र के देवैचा (लाही मजरा) गांव में रह रही है। हैरानी की बात यह थी कि वह वहां किसी अनजान व्यक्ति के साथ नहीं बल्कि अपने ही भांजे उदयराज के साथ रह रही थी। पति जब रिश्तेदारों के साथ वहां पहुंचा तो पत्नी ने सामने ही कह दिया कि उसने उदयराज से कोर्ट मैरिज कर ली है और अब वही उसका जीवनसाथी है।
बच्चों से तोड़ा रिश्ता
राजकुमार ने जब सात बच्चों की दुहाई दी तो पत्नी ने ऐसा जवाब दिया जिसने सबको स्तब्ध कर दिया। उसने साफ कहा कि अब उसे बच्चों से कोई लेना-देना नहीं है और वह उदयराज के साथ ही जिंदगी बिताना चाहती है।
पुलिस जांच में जुटी
अपनी पत्नी के इस फैसले से टूटे राजकुमार सातों बच्चों को लेकर थाने पहुंचे और न्याय की गुहार लगाई। इस पर महराजगंज कोतवाली प्रभारी जगदीश यादव ने बताया कि पीड़ित की तहरीर मिल गई है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
सामाजिक सवाल भी खड़े हुए
यह घटना सिर्फ एक पति-पत्नी का विवाद नहीं बल्कि समाज और पारिवारिक ज़िम्मेदारियों से जुड़ा गंभीर मामला है। सात मासूम बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है। ऐसे मामलों को केवल प्रेम प्रसंग कहकर टालना आसान है। लेकिन असलियत यह है कि ये घटनाएं सामाजिक मूल्यों और पारिवारिक ढांचे के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं।