नई दिल्ली/गुवाहाटी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को बिहार में विपक्षी गठबंधन के कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ कथित अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल की कड़ी निंदा की। शाह ने इसे राजनीति का सबसे गिरा हुआ स्तर बताया और कांग्रेस नेताओं पर सीधा हमला बोला।
पीएम मोदी और उनकी मां पर टिप्पणी को बताया शर्मनाक
अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस की “घुसपैठिया बचाओ यात्रा” के दौरान कुछ नेताओं ने जो बयान दिए, वे बेहद निंदनीय हैं। उन्होंने कहा—
“प्रधानमंत्री मोदी की मां ने साधारण और संघर्षपूर्ण जीवन जिया। उन्होंने मूल्यों के साथ अपने बेटे का पालन-पोषण किया और वही बेटा आज देश को ईमानदारी और मजबूती से नेतृत्व दे रहा है। ऐसे जीवन के लिए अपशब्दों का प्रयोग न केवल अस्वीकार्य है, बल्कि भारत की जनता इसे कभी माफ नहीं करेगी।”
शाह ने आगे कहा कि इस घटना से हर भारतीय आहत है। उन्होंने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से अपील की कि अगर उनमें ज़रा भी संवेदनशीलता बाकी है, तो वे प्रधानमंत्री, उनकी दिवंगत मां और देश की जनता से तुरंत माफी मांगें।
बिहार में शुरू हुआ विवाद
दरअसल, राहुल गांधी की मतदाता अधिकार यात्रा के दौरान कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री मोदी और उनकी मां के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। इसके बाद भाजपा ने पटना के कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई और कांग्रेस नेताओं से सार्वजनिक माफी की मांग की।
असम में अमित शाह का व्यस्त दौरा
विवाद पर प्रतिक्रिया देने के साथ ही गृह मंत्री अमित शाह असम के दो दिवसीय दौरे पर भी रहे। गुवाहाटी में उन्होंने राजभवन के नवनिर्मित ब्रह्मपुत्र विंग का उद्घाटन किया। इसके अलावा, शाह ने राजभवन से ही डेरगांव स्थित लचित बरफुकन पुलिस अकादमी में करीब 45 करोड़ रुपये की लागत से बनी राष्ट्रीय साइबर फॉरेंसिक प्रयोगशाला – उत्तर-पूर्व का वर्चुअल उद्घाटन किया।
उन्होंने आईटीबीपी, एसएसबी और असम राइफल्स की कई विकास परियोजनाओं की शुरुआत भी की, जिनमें आवास परिसर, बैरक और अस्पताल जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
पूजा-अर्चना और वृक्षारोपण
कार्यक्रम से पहले अमित शाह ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच राजभवन परिसर स्थित मंदिर में पूजा-अर्चना और गौ पूजन किया। उन्होंने सिंदूर का पौधा भी लगाया। इस दौरान असम के राज्यपाल लक्ष्मी प्रसाद आचार्य और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने उनका स्वागत किया।
यह खबर एक तरफ राजनीतिक बयानबाज़ी की तीखी झलक देती है, तो वहीं दूसरी ओर असम में विकास और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े कार्यक्रमों को भी सामने लाती है।