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सिर्फ अपशब्द बोलना SC/ST एक्ट में अपराध नहीं: सुप्रीम कोर्ट

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सिर्फ अपशब्द बोलना SC/ST एक्ट में अपराध नहीं: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करना अपने आप में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत अपराध नहीं बनता। अदालत ने कहा कि इस कानून के तहत अपराध तभी माना जाएगा, जब यह साबित हो कि कथित अपमान किसी व्यक्ति को उसकी जाति के कारण नीचा दिखाने या डराने के इरादे से किया गया हो।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए एक अहम फैसले में केशव महतो उर्फ केशव कुमार महतो के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। यह आदेश पिछले सप्ताह पारित किया गया।
मामला पटना उच्च न्यायालय के उस फैसले से जुड़ा था, जिसमें 15 फरवरी 2025 को ट्रायल कोर्ट के समन आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया गया था। केशव महतो ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आंगनवाड़ी केंद्र में कथित जाति-आधारित गाली-गलौज और मारपीट के आरोपों के आधार पर दर्ज प्राथमिकी और आगे की कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में न तो एफआईआर और न ही आरोपपत्र में ऐसा कोई ठोस आरोप है, जिससे यह साबित हो सके कि शिकायतकर्ता को उसकी जाति के आधार पर जानबूझकर अपमानित या धमकाया गया हो। अदालत ने माना कि ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट, दोनों ने एससी/एसटी एक्ट के तहत कार्यवाही जारी रखने में त्रुटि की।
पीठ ने एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1) के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए बताया कि इस कानून के तहत सजा के लिए यह आवश्यक है कि आरोपी, जो स्वयं अनुसूचित जाति या जनजाति का सदस्य न हो, सार्वजनिक स्थान पर किसी एससी/एसटी सदस्य को उसकी जाति के कारण अपमानित करे या डराए।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए यह भी दोहराया कि धारा 3(1)(आर) के तहत दोष सिद्ध करने के लिए दो बातें जरूरी हैं—पहली, शिकायतकर्ता का अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से होना और दूसरी, उसके प्रति किया गया अपमान या धमकी केवल इसी वजह से होना कि वह उस समुदाय का सदस्य है।
अदालत ने कहा कि केवल यह तथ्य पर्याप्त नहीं है कि शिकायतकर्ता एससी या एसटी वर्ग से आता है। जब तक अपमान या धमकी का सीधा संबंध उसकी जाति से न जोड़ा जाए, तब तक इसे इस कानून के तहत अपराध नहीं माना जा सकता। इन्हीं आधारों पर सुप्रीम कोर्ट ने केशव महतो के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के अंतर्गत चल रही आपराधिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया।

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मैं सूरज सेन पिछले 6 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं और मैने अलग अलग न्यूज चैनल,ओर न्यूज पोर्टल में काम किया है। खबरों को सही और सरल शब्दों में आपसे साझा करना मेरी विशेषता है।
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