वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में कूनो से जुलाई तक चीते लाने की तैयारी उससे पहले यहां आएंगे एक हजार चीतल
2019 से अब तक 1300 से अधिक चीतल टाइगर रिजर्व में किए गए शिफ्ट और एक हजार की अनुमति मिली विस्थापित गांव को टाइगर रिजर्व के जंगल में बदलने के लिए तैयारी तेज
रिपोर्ट विशाल रजक
दमोह/तेंदूखेड़ा। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में जुलाई तक चीतों को शिफ्ट किया जा सकता है। इससे पहले यहां चीतलों को लाने का सिलसिला जारी है। अबकी बार एक हजार और चीतलों को लाए जाने की अनुमति मिली है यह चीतल पेंच और कान्हा से लाए जाने है रिजर्व में अप्रैल तक चीतों की शिफिटंग होनी थी, लेकिन बोमा (बाड़ा) बनने में विलंब के चलते अब इस तारीख को आगे बढ़ा दिया गया। संभव है कि जुलाई तक शिफ्टिंग हो जाए। चीतों के लिए पेंच से एक हजार चीतल मांगे गए थे जो शिफ्ट हो चुके है। वहीं कान्हा से भी 300 चीतलों को मांग हुई थी, जिनमें से 150 चीतल आ चुके हैं। 2019 से अबतक 1300 से अधिक चीतल शिफ्ट किए जा चुके है टाइगर रिजर्व से विस्थापित हुए गांव की जगह में जंगल में बदलने के लिए वन विभाग वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट के मार्गदर्शन में गांव की खाली पड़ी जगह को जंगल की तरह बदलने की तैयारी कर रही है टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश सिंह ने बताया कि विस्थापन के बाद गांव की जगह में जंगल की तरह घास उगने में प्राकृतिक रूप से 5 से 7 साल का समय लगता है। इसलिए वैज्ञानिक तरीके से घास उगाई जा रही है। इसके लिए खेतों में घास के बिच डाले जा रहे है, साथ ही खर पतवार को नष्ट किया जा रहा है। ताकि जल्द घास के मैदान बन सके। इससे यहां शाकाहारी जानवर आएंगे और जंगल के परिसंचरण तंत्र का विस्तार होगा एक बार चीते यहां पहुंच गए तो यह दुनिया का पहला ऐसा टाइगर रिजर्व बन जाएगा, जहां बिग कैट परिवार के तीनों सदस्य बाघ, तेंदुआ और चीता एक साथ निवास करेंगे। इसके आलावा यहां कई अन्य बिल्ली प्रजाति के जानवर भी है दुनिया की सबसे छोटी बिल्ली भी टाइगर रिजर्व में देखी गई है। रिजर्व में मुहली, सिंगपुर और झापन रेंज के करीब 440 हेक्टेयर क्षेत्र को चीतों के लिए चिह्नित किया गया है। इनमें मुहली रेंज को प्राथमिकता दी जा रही है क्योंकि यहां घास के बड़े मैदान और छायादार वृक्ष बड़ी मात्रा में मौजूद है
वनकर्मियों को दी जा रही ट्रेनिंग
चीता प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए करीब 100 वनकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है 10-10 सदस्यों के दल कूनो नेशनल पार्क भेजे जा रहे हैं, जहां विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में उन्हें चीतों के व्यवहार, निगरानी और देखभाल की ट्रेनिंग दी जा रही है। एक दल प्रशिक्षण पूरा करके वापस आ चुका है, जबकि दूसरा दल रवाना हो गया है
एक साथ रह सकते है बाघ, चीता और तेंदुआ
डिप्टी डायरेक्टर रजनीश सिंह ने बताया कि प्रकृति ने ऐसी व्यवस्था की है कि एक ही भू-भाग में बहुत सारे वन्य प्राणी बिना लड़े रह सकते हैं। बाघ, चीता और तेंदुआ तीनों अलग तरह के शिकारी है। चीता दौड़ के शिकार करता है, वह छोटे जानवर जिनका वजन 30 से 40 किलो होता है उनका शिकार करता है। वह हिरण, चीतल के बच्चों का शिकार करता है। जबकि बाघ हमेशा भारी और बड़े जानवरों का शिकार करना पसंद करता है। वहीं तेंदुआ छोटे जानवर को मारकर तुंरत पेड़ पर चढ़कर खाने की कोशिश करता है ताकि उसका शिकार सुरक्षित रहे। तीनों का आमना-सामना होने की संभावना कम ही होती है, इसलिए यह तीनों एक साथ यहां रह सकते है
चीतों को रखने के लिए बन रहे दो तरह के बाड़े
चीतों को जंगल में छोड़ने के पहले उन्हें बाड़ों में रखा जाएगा। इसके लिए दो तरह के बाड़े बन रहे है। क्वारेंटाइन बोमाः छोटा क्षेत्रफल वाला, जहां चीतों को शुरू में 12-15 दिन रखकर उनकी स्वास्थ्य स्थिति, बीमारियों और अनुकूलन का आकलन किया जाएगा इसके बाद सॉफ्ट रिलीज बोमा जो करीब 80-100 हेक्टेयर का बड़ा बाड़ा होगा, जहां क्वारेंटाइन के बाद चीतों को छोड़ा जाएगा ताकि वे धीरे-धीरे जंगली परिवेश में अनुकूलित हो सकें। वन विभाग के अनुसार, बाड़ों का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही पूरा हो जाएगा।
इनका कहना
बारिश के मौसम में जुलाई तक चीतों की शिफ्टिंग हो जाएगी। इसके अलावा, रिजर्व की जैव-विविधता को मजबूत करने के लिए 1000 चितल लाए जा रहे हैं। शिफ्टिंग की अनुमति मिल चुकी है यह प्रोजेक्ट न केवल चीतों को नया घर देगा बल्कि पूरे क्षेत्र की पारिस्थितिकी को संतुलित और समृद्ध बनाने में भी मदद करेगा।
रजनीश सिंह, डिप्टी डायरेक्टर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व








