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30 जून के पहले घूम आओ वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व अभी जलस्रोतों के पास दिख सकते हैं बाघ नीलगाय और काले हिरण

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30 जून के पहले घूम आओ वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व अभी जलस्रोतों के पास दिख सकते हैं बाघ नीलगाय और काले हिरण

मानसून आने के साथ ही 12 दिन बाद बंद हो जाएगा वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में टूरिज्म

रिपोर्ट – विशाल रजक

तेंदूखेड़ा। प्रदेश के सबसे बड़े वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बाघ, तेंदुए, भालू, सियार, काला हिरण और गिद्धों को देखना है तो 30 जून के पहले सफारी का प्लान बना लें। हर साल की तरह मानसून आने के साथ यहां पर्यटन बंद हो जाएगा। 30 सितंबर तक पर्यटक रिजर्व में सैर-सपाटा नहीं कर पाएंगे। यहां के सभी गेटों से प्रवेश बंद कर दिया जाएगा अभी गर्मी में बाघ जलस्त्रोंतों के आसपास देखे जा रहे हैं दमोह सागर और नरसिंहपुर जिले के 72 गांवों को जोड़ते हुए कुल क्षेत्रफल 2339 वर्ग किलोमीटर में फैला है। प्रदेश का यह 7वां टाइगर रिजर्व है। वर्ष 2023 में इसे टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। एक समय यह क्षेत्र भेड़ियों के लिए जाना जाता था अब यहां बाघ, तेंदुओं के बाद चीतों की बसाहट होगी। चीतों के लिए यह क्षेत्र अनुकूल माना जा रहा है। कूनो से चीतों को लाकर यहां बसाया जाएगा

30 बाघों की मौजूदगीः एयर कनेक्टिविटी व ठहरने की व्यवस्था हो तो बढ़ेगा टूरिज्म

टाइगर रिजर्व में वर्तमान में 30 से अधिक बाघों की मौजूदगी का दावा किया जा रहा है। यहां बाहरी बाघों का मूवमेंट भी रहता है, इसलिए संख्या को लेकर भ्रम की स्थिति बनी है। टाइगर रिजर्व में चिड़ियों की 240 प्रजातियां पाई जाती हैं। यहां भेड़िया, भालू, सियार, लकड़बग्घा, लोमड़ी, सूअर, नीलगाय, जंगली सूअर, चौसिंघा, काला हिरण, चिंकारा, कछुआ और मगरमच्छ सहित पशु-पक्षी मौजूद हैं टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह ने बताया कि इस बार बफर जोन से लगे गांवों के मवेशियों का वैक्सीनेशन अक्टूबर के बाद शुरू होगा। बरसात में टाइगर रिजर्व में पर्यटन गतिविधियां बंद कर दी जाती हैं। सागर से दूसरे राज्यों के लिए एयर कनेक्टिविटी फिलहाल नहीं है। जिससे यहां बाहरी टूरिस्ट कम ही आ रहे हैं। टाइगर रिजर्व के रेस्ट हाउस को छोड़ यहां रुकने के लिए होम स्टे की कमी है। यह कमियां दूर हों तो टूरिज्म बढ़ सकता है। होम स्टे की दिशा में कुछ काम चल रहा है
किस वजह से लिया ये फैसला
वन विभाग के मुताबिक मानसून का समय वन्यजीवों का मुख्य प्रजनन काल होता है। इस दौरान जानवरों को शांत वातावरण की जरुरत होती है। पर्यटकों की आवाजाही से उनकी गतिविधियों में बाधा आ सकती है बारिश के मौसम में जंगलों के अंदरुनी रास्ते भी क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। इन रास्तों की मरम्मत और रखरखाव के लिए भी यह समय जरूरी होता है। इसी वजह से हर साल मानसून में पर्यटकों की एंट्री बंद कर दी जाती है
*सुबह 5:45 से 11 बजे तक ही सफारी*
गर्मी के कारण पर्यटकों की संख्या में कुछ कमी आई है। अप्रैल में महज 110 पर्यटक ही पहुंचे, जबकि दिसंबर-जनवरी में यह आंकड़ा 750-750 था। वर्तमान में पर्यटन का समय सुबह 5:45 से 11:00 बजे तक है। जो मुसाफिर इस मौसम में भी आ रहे हैं, उन्हें जलाशयों के पास बाघों की अठखेलियां और दीदार का भरपूर मौका मिल रहा है

इनका कहना

टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह का कहना है कि 30 जून या फिर इसके पहले तेज और लगातार बारिश शुरू होने पर टाइगर रिजर्व में पर्यटन गतिविधियां बंद कर दी जाएंगी।

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मैं सूरज सेन पिछले 6 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं और मैने अलग अलग न्यूज चैनल,ओर न्यूज पोर्टल में काम किया है। खबरों को सही और सरल शब्दों में आपसे साझा करना मेरी विशेषता है।
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