वेदाध्ययन और संस्कारों के नवीनीकरण का पर्व श्रावणी उपाकर्म, 28 अगस्त को मां नर्मदा तट पर भव्य आयोजन
श्रावणी उपाकर्म सनातन वैदिक संस्कृति का एक महत्वपूर्ण वार्षिक संस्कार है। डॉ दुबे ने बताया कि श्रावणी उपाकर्म मुख्य रूप से श्रावण मास की पूर्णिमा, जिसे रक्षा बंधन के पर्व के रूप में भी मनाया जाता है, के अवसर पर विधि-विधानपूर्वक संपन्न किया जाता है। यह पर्व वेदों के अध्ययन, ऋषि-स्मरण, आत्मशुद्धि एवं धार्मिक कर्तव्यों के नवीनीकरण का प्रतीक माना जाता है।
डॉ अनिल दुबे वैदिक ने बताया कि ‘उपाकर्म’ का अर्थ शुभ कार्य का आरंभ करना है। वैदिक परंपरा में इसे वेदाध्ययन के वार्षिक सत्र के शुभारंभ से जोड़ा गया है। इस दिन ब्राह्मण समाज द्वारा अपने आराध्य ऋषियों एवं वेद परंपरा के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए विशेष पूजन-अर्चन किया जाता है।
श्रावणी उपाकर्म का एक प्रमुख विधान यज्ञोपवीत परिवर्तन है। इस अवसर पर पुराना यज्ञोपवीत त्यागकर विधिपूर्वक नया यज्ञोपवीत धारण किया जाता है। यज्ञोपवीत केवल एक धागा नहीं, बल्कि शुचिता, संयम, कर्तव्य और वैदिक जीवन-पद्धति के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
उन्होंने बताया कि इस पावन अवसर पर सप्तर्षियों एवं ऋषि-मुनियों का स्मरण, तर्पण और पूजन किया जाता है। हमारे ऋषियों ने वेद, शास्त्र और ज्ञान की महान परंपरा को समाज तक पहुंचाया, इसलिए श्रावणी उपाकर्म उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का भी अवसर है।
इस दिन दशविध स्नान सहित विभिन्न शुद्धिकरण विधियों का विधान भी बताया गया है। इसके माध्यम से साधक आत्मशुद्धि एवं प्रायश्चित का भाव रखते हुए अपने जीवन में सत्य, संयम, सदाचार और धार्मिक कर्तव्यों का पालन करने का नया संकल्प लेता है।
डॉ दुबे ने कहा कि श्रावणी उपाकर्म केवल जनेऊ बदलने का संस्कार नहीं, बल्कि अपने जीवन, आचरण और कर्तव्यों को पुनः व्यवस्थित करने का पावन अवसर है। यह पर्व हमें अपनी ऋषि परंपरा, वेदों और सनातन संस्कारों से जोड़ता है।
उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि युवा पीढ़ी को भी इन वैदिक संस्कारों के महत्व से परिचित कराया जाए, ताकि हमारी हजारों वर्षों पुरानी ज्ञान और संस्कारों की परंपरा निरंतर आगे बढ़ती रहे।
श्रावणी उपाकर्म का संदेश यही है—
ऋषियों का स्मरण करें, वेदों का सम्मान करें,
संस्कारों को जीवन में उतारें और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लें। नोट – जो भी विप्र बंधु श्रावणी उपाकर्म करना चाहते हैं वो विप्र 28 अगस्त प्रातः 06 बजे मां नर्मदा दक्षिण तट सतधारा पर सादर आमंत्रित हैं कार्यक्रम पूर्णतः निःशुल्क रहेगा पूजन सामग्री भी निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी ।
कर्मकांड ज्योतिष विषेशज्ञ डॉ अनिल दुबे वैदिक देवरी बिछुआ 9936443138








