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10 मिनट की दलील और ऐतिहासिक आदेश: जबलपुर के अथर्व को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत

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10 मिनट की दलील और ऐतिहासिक आदेश: जबलपुर के अथर्व को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत

नई दिल्ली/जबलपुर। 19 वर्षीय अथर्व चतुर्वेदी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) और मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि NEET उत्तीर्ण कर चुके आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के अभ्यर्थियों को 2025-26 सत्र के लिए निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रोविजनल एडमिशन दिया जाए। कोर्ट का यह आदेश उन छात्रों के लिए राहत लेकर आया है, जिन्हें राज्य की नीतिगत अस्पष्टता के कारण दाखिला नहीं मिल पा रहा था।
जबलपुर का छात्र, जिसने खुद रखी अपनी बात
अथर्व चतुर्वेदी जबलपुर के निवासी हैं और डॉक्टर बनने का लक्ष्य लेकर तैयारी कर रहे थे। उन्होंने इंजीनियरिंग और मेडिकल, दोनों प्रवेश परीक्षाएं पास कीं, लेकिन EWS कोटे के तहत निजी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए राज्य स्तर पर स्पष्ट नीति न होने से उन्हें सीट नहीं मिल सकी।
इसी मुद्दे को लेकर अथर्व ने स्वयं सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की। चीफ जस्टिस की बेंच के समक्ष उन्होंने करीब दस मिनट तक अपनी दलील रखी। सुनवाई के बाद अदालत ने माना कि नीतिगत कमी के कारण किसी पात्र छात्र को प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकता।
हाई कोर्ट में भी खुद लड़े थे मामला
इससे पहले जबलपुर हाई कोर्ट में भी अथर्व ने अपना पक्ष स्वयं रखा था। सुनवाई के दौरान जज ने हल्के अंदाज में उनसे कहा था कि उन्हें वकील बनना चाहिए। हालांकि अथर्व का लक्ष्य स्पष्ट था। उन्हें डॉक्टर ही बनना है।
उनके पिता मनोज चतुर्वेदी पेशे से वकील हैं, लेकिन उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस नहीं की है। कोविड लॉकडाउन के दौरान जब अदालतों की कार्यवाही ऑनलाइन होने लगी, तब अथर्व ने वर्चुअल सुनवाई देखकर प्रक्रिया को समझा। उन्होंने याचिका का प्रारूप स्वयं तैयार किया, पुराने फैसलों का अध्ययन किया और अपनी SLP दाखिल की।
दो बार NEET पास, 530 अंक हासिल
अथर्व ने NEET परीक्षा दो बार उत्तीर्ण की और 530 अंक प्राप्त किए। इसके बावजूद EWS कोटे के तहत निजी कॉलेजों में प्रवेश का रास्ता स्पष्ट नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई में यह माना कि याचिकाकर्ता आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से है और योग्यता के आधार पर पात्र है। ऐसे में केवल इस वजह से प्रवेश रोका नहीं जा सकता कि राज्य सरकार ने निजी संस्थानों में EWS आरक्षण को लेकर स्पष्ट सूचना जारी नहीं की।
अदालत ने आदेश दिया कि 2025-26 शैक्षणिक सत्र के लिए NEET पास EWS अभ्यर्थियों को प्रोविजनल एडमिशन दिया जाए, बशर्ते निर्धारित फीस का भुगतान किया जाए।
फीस को लेकर संशय बरकरार
हालांकि दाखिले का रास्ता खुल गया है, लेकिन निजी मेडिकल कॉलेजों में EWS कोटे के तहत फीस कितनी होगी, यह अभी तय नहीं हुआ है। मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले अथर्व के लिए यह चिंता का विषय बना हुआ है। उनके पिता, जिन्होंने उन्हें गणित पढ़ाया, अब आगे की फीस व्यवस्था को लेकर चिंतित हैं। उनकी मां ने पढ़ाई के दौरान अनुशासन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
स्कूल से मेडिकल तक का सफर
अथर्व ने महर्षि स्कूल में गणित, जीव विज्ञान, अंग्रेजी और कंप्यूटर विज्ञान जैसे विषय चुने। जीव विज्ञान की प्रैक्टिकल परीक्षा में उन्होंने शीर्ष स्थान प्राप्त किया। उनका चयन जबलपुर गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज में भी हुआ था, लेकिन उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र को प्राथमिकता दी।
उन्होंने अपनी अंग्रेजी और प्रस्तुतीकरण क्षमता को बेहतर बनाने में शिक्षकों मित्रा मैडम और भारती मैडम का आभार जताया। उनके अनुसार, यह पूरा अनुभव उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की नीतिगत चूक के कारण पात्र छात्रों को प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने NMC और मध्य प्रदेश सरकार को निर्देशित किया कि वे NEET क्वालिफाइड EWS अभ्यर्थियों को 2025-26 सत्र में अस्थायी प्रवेश दें, जब तक कि अंतिम प्रक्रिया पूरी न हो जाए।
यह फैसला न केवल अथर्व चतुर्वेदी के लिए, बल्कि उन सभी छात्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं और चिकित्सा शिक्षा का सपना देख रहे हैं।

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