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फ्लिपकार्ट पर 5 हजार का जुर्माना : आईफोन का ऑर्डर रद्द कर सिर्फ चार्जर भेजने पर उपभोक्ता आयोग का आदेश

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फ्लिपकार्ट पर 5 हजार का जुर्माना : आईफोन का ऑर्डर रद्द कर सिर्फ चार्जर भेजने पर उपभोक्ता आयोग का आदेश
सागर। ऑनलाइन शॉपिंग के एक मामले में जिला उपभोक्ता विवाद परितोषण आयोग ने ग्राहक के पक्ष में अहम फैसला सुनाया है। आईफोन का ऑर्डर बुक होने के बाद कंपनी द्वारा बिना जानकारी दिए उसे रद्द कर देने और केवल चार्जर भेजने को सेवा में कमी मानते हुए आयोग ने फ्लिपकार्ट पर 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही चार्जर की कीमत और प्रोसेसिंग फीस लौटाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
क्या है पूरा मामला ?
नेहानगर, मकरोनिया निवासी उत्कर्ष मिश्रा ने आयोग में प्रस्तुत शिकायत में बताया कि उन्होंने 8 अक्टूबर 2023 को फ्लिपकार्ट से एप्पल आईफोन खरीदा था। फोन की कुल कीमत 76,097 रुपये थी, जिस पर 13,901 रुपये की छूट मिली थी। मोबाइल को फाइनेंस के जरिए खरीदा गया था और इसकी मासिक ईएमआई 8,850 रुपये तय हुई थी।
ऑर्डर के समय 1,832 रुपये प्रोसेसिंग फीस के रूप में जमा कराए गए थे। कंपनी ने यह राशि स्वीकार भी कर ली थी। मोबाइल और चार्जर की डिलीवरी 18 अक्टूबर 2023 तक होनी थी।
समय पर मोबाइल नहीं, सिर्फ चार्जर पहुंचा
शिकायत के अनुसार, 14 अक्टूबर 2023 को ग्राहक को केवल चार्जर प्राप्त हुआ। उसी दौरान ईमेल के माध्यम से सूचना दी गई कि आईफोन 18 अक्टूबर तक पहुंच जाएगा। लेकिन 17 अक्टूबर 2023 को बिना किसी पूर्व सूचना या सहमति के पूरा ऑर्डर रद्द कर दिया गया।
ऑर्डर निरस्त होने के बाद कंपनी ने 8,850 रुपये में से 1,832 रुपये प्रोसेसिंग फीस काटकर 7,196 रुपये बैंक खाते में लौटा दिए। इसके बाद ग्राहक से 3,504 रुपये की मांग की गई, जिसे चार्जर की कीमत बताया गया।
चार्जर रखने को मजबूर, सिविल खराब करने की चेतावनी
उत्कर्ष मिश्रा का कहना था कि जब मोबाइल ही रद्द हो गया तो चार्जर उनके किसी काम का नहीं रहा। उन्होंने कंपनी से चार्जर वापस लेने और राशि लौटाने की मांग की। आरोप है कि कंपनी की ओर से भुगतान न करने पर सिविल रिकॉर्ड खराब करने की चेतावनी दी गई।
आखिरकार 1 नवंबर 2023 को उन्होंने 3,504 रुपये जमा कर दिए। इसके बावजूद प्रोसेसिंग फीस और चार्जर की कुल 5,336 रुपये की राशि वापस नहीं की गई। कई बार ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने के बाद भी समाधान नहीं हुआ।
आयोग ने साक्ष्यों के आधार पर दिया फैसला
मामले में परिवादी की ओर से अधिवक्ता पवन नन्होरिया ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान जिला उपभोक्ता विवाद परितोषण आयोग के अध्यक्ष राजेश कुमार कोष्टा और सदस्य अनुभा वर्मा के समक्ष संबंधित दस्तावेज और प्रमाण प्रस्तुत किए गए।
सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद आयोग ने कंपनी की ओर से सेवा में कमी पाई। आदेश में कहा गया कि:
कंपनी 15 दिनों के भीतर ग्राहक से चार्जर वापस लेकर रसीद दे।
चार्जर की कीमत 3,504 रुपये और प्रोसेसिंग फीस 1,832 रुपये, कुल 5,336 रुपये 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाए।
मानसिक पीड़ा और सेवा में कमी के लिए 5,000 रुपये मुआवजा दे।
परिवाद व्यय के रूप में 2,000 रुपये भी दो माह के भीतर अदा करे।
यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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