होम देश / विदेश मध्यप्रदेश राजनीति धर्म/अध्यात्म ऑटोमोबाइल सरकारी योजना खेल समाचार
By
—
On:

RTI पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: पहले देख सकेंगे राजभवन की फाइलें, फिर मांग सकेंगे प्रमाणित दस्तावेज

RTI पर हाई कोर्ट का ...

[post_dates]

Sub Editor

Published on:

whatsapp

RTI पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: पहले देख सकेंगे राजभवन की फाइलें, फिर मांग सकेंगे प्रमाणित दस्तावेज

राज्यपाल की केंद्र सरकार को भेजी जाने वाली मासिक रिपोर्टों और केंद्र से मिले निर्देशों की जानकारी से जुड़ा 15 साल पुराना मामला; युगलपीठ ने एकलपीठ के आदेश में किया संशोधन

जबलपुर। मध्य प्रदेश राजभवन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल करने के लिए करीब 15 साल से चल रही कानूनी लड़ाई में हाई कोर्ट ने आवेदक के पक्ष में अहम व्यवस्था दी है। अदालत ने साफ किया है कि सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत किसी रिकॉर्ड की जानकारी मांगने वाले व्यक्ति को पहले संबंधित दस्तावेजों और फाइलों का निरीक्षण करने का मौका दिया जाना चाहिए। इसके बाद आवेदक अपनी जरूरत के रिकॉर्ड की पहचान कर उनकी प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकता है।

मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने 2 नवंबर 2026 को यह फैसला सुनाते हुए एकलपीठ के पहले दिए गए आदेश में संशोधन किया। इस निर्णय के बाद राजभवन के रिकॉर्ड तक पहुंचने और आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करने की प्रक्रिया स्पष्ट हो गई है।

2011 में आरटीआई लगाकर मांगी गई थी जानकारी

इस मामले की शुरुआत भोपाल निवासी अजय दुबे के आरटीआई आवेदन से हुई थी। उन्होंने 12 दिसंबर 2011 को राजभवन सचिवालय के लोक सूचना अधिकारी के समक्ष आवेदन देकर एक जनवरी 2011 के बाद राज्यपाल द्वारा प्रदेश के शासन-प्रशासन और राजनीतिक हालात को लेकर केंद्र सरकार को भेजी गई मासिक रिपोर्टों की जानकारी मांगी थी।

इसके अलावा उन्होंने उन रिपोर्टों के संदर्भ में भारत सरकार की ओर से राजभवन को भेजे गए पत्रों और निर्देशों से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग भी की थी।

आवेदन निरस्त होने के बाद शुरू हुई कानूनी लड़ाई

राजभवन के लोक सूचना अधिकारी ने 29 दिसंबर 2011 को आवेदन को अस्पष्ट बताते हुए खारिज कर दिया था। इसके बाद अजय दुबे ने प्रथम अपील की। 23 फरवरी 2012 को प्रथम अपीलीय अधिकारी ने मामले में आवेदक को संबंधित रिकॉर्ड देखने की अनुमति दी और कहा कि निरीक्षण के बाद वह आवश्यक दस्तावेजों की प्रतियां मांग सकता है।

इसके बाद मामला राज्य सूचना आयोग पहुंचा। आयोग ने 17 अगस्त 2015 को प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेश को बरकरार रखा। हालांकि, इस निर्णय को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी गई।

एकलपीठ के फैसले के खिलाफ दायर हुई रिट अपील

मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की एकलपीठ ने 17 अगस्त 2026 को राज्य सूचना आयोग और प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेशों को निरस्त कर दिया था। साथ ही अजय दुबे को दस्तावेजों का स्पष्ट ब्योरा देते हुए 15 दिनों के भीतर नया आरटीआई आवेदन प्रस्तुत करने की छूट दी गई थी।

एकलपीठ के इस निर्णय से संतुष्ट नहीं होने पर अजय दुबे ने युगलपीठ में रिट अपील दायर की। सुनवाई के बाद खंडपीठ ने पहले के निर्देश में बदलाव करते हुए आवेदक को संबंधित रिकॉर्ड के निरीक्षण का विकल्प दिया।

पहले रिकॉर्ड का निरीक्षण, फिर प्रमाणित प्रतियों के लिए आवेदन

हाई कोर्ट के नए निर्देश के अनुसार, अजय दुबे अब सबसे पहले लोक सूचना अधिकारी के समक्ष संबंधित अभिलेखों के निरीक्षण के लिए आवेदन कर सकेंगे। इसके बाद उपलब्ध फाइलों और दस्तावेजों को देखकर अपनी जरूरत के रिकॉर्ड चिह्नित कर सकेंगे। जिन दस्तावेजों की आवश्यकता होगी, उनकी प्रमाणित प्रतियां हासिल करने के लिए अलग से आवेदन किया जा सकेगा।

इस तरह अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि आवेदक को पहले रिकॉर्ड देखने और अपनी जरूरत के दस्तावेजों की पहचान करने का अवसर मिलना चाहिए।

मामले में आवेदक की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार चंद ने पक्ष रखा, जबकि शासन की तरफ से उप महाधिवक्ता विवेक शर्मा अदालत में उपस्थित हुए।

Join our WhatsApp Group
Sub Editor

मैं सूरज सेन पिछले 6 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं और मैने अलग अलग न्यूज चैनल,ओर न्यूज पोर्टल में काम किया है। खबरों को सही और सरल शब्दों में आपसे साझा करना मेरी विशेषता है।
प्रमुख खबरें
View All