28 दिन बाद फिर एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, इमलीडोल के ग्रामीणों ने पेयजल संकट से अवगत कराया 4 दिन की चांदनी फिर अंधियारी रात
तेंदूखेड़ा। ग्राम इमलीडोल के ग्रामीणों ने लगातार बनी हुई लगभग 1 माह पहले दिया समस्या उत्पन्न हुई थी इसे 4 दिन व्यवस्थित किया गया लेकिन फिर वही हाल । पेयजल समस्या को लेकर मंगलवार को दूसरी बार एसडीएम तेंदूखेड़ा एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत को ज्ञापन सौंपकर शीघ्र समाधान की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में 18 मई को भी उन्होंने जल संकट के संबंध में आवेदन प्रस्तुत किया था, लेकिन समस्या का स्थायी निराकरण नहीं हो सका है। ग्रामीणों के अनुसार, पहले ज्ञापन के लगभग दो दिन बाद गांव में कुछ समय के लिए जलापूर्ति प्रारंभ हुई थी, जिससे लोगों को राहत मिली थी। हालांकि यह व्यवस्था केवल चार से पांच दिनों तक ही सुचारू रूप से चल सकी और उसके बाद पुनः जल प्रदाय प्रभावित हो गया। वर्तमान में गांव के लोगों को पेयजल के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तथा कई परिवारों को दूर-दराज के स्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है। ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत संचालित वर्तमान जलापूर्ति व्यवस्था प्रभावी ढंग से संचालित नहीं हो रही है। इसके कारण ग्रामीणों को नियमित रूप से पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। गर्मी के मौसम में स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है, जिससे महिलाओं, बुजुर्गों एवं बच्चों को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव में तत्काल जलापूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए तथा पेयजल संकट के स्थायी समाधान के लिए ग्राम इमलीडोल हेतु सिंगल विलेज स्कीम स्वीकृत कर शीघ्र लागू की जाए। उनका कहना है कि इससे भविष्य में जलापूर्ति संबंधी समस्याओं का स्थायी निराकरण संभव हो सकेगा और ग्रामीणों को नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सकेगा। ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र ही पेयजल व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो वे अपनी मांगों को लेकर आगे भी लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाने के लिए बाध्य होंगे। ज्ञापन के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे और सभी ने एक स्वर में गांव की पेयजल समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की। ज्ञापन सौंपने वालों में राजरानी गौंड, मायारानी गौंड, अंजना गौंड, रचना बाई, अभिलाषा यादव, निशा बाई, भागसिंह ठाकुर, लखन सिंह ठाकुर, घूरन ठाकुर, नीरज यादव सहित लगभग 20 ग्रामीण शामिल रहे।








