होम देश / विदेश मध्यप्रदेश राजनीति धर्म/अध्यात्म ऑटोमोबाइल सरकारी योजना खेल समाचार
By
On:

भोपाल में जुदाई जैसी हकीकत: डेढ़ करोड़ के समझौते के बाद पत्नी ने सौतन को सौंपा पति

भोपाल में जुदाई जैसी हकीकत: ...

[post_dates]

Sub Editor

Published on:

whatsapp

भोपाल में जुदाई जैसी हकीकत: डेढ़ करोड़ के समझौते के बाद पत्नी ने सौतन को सौंपा पति

भोपाल। कभी-कभी असल जिंदगी की घटनाएं फिल्मों की कहानी को भी पीछे छोड़ देती हैं। कुछ ऐसा ही मामला मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कुटुंब न्यायालय में सामने आया, जिसने 90 के दशक की चर्चित फिल्म Judaai की याद ताजा कर दी। फर्क सिर्फ इतना है कि यह कहानी पर्दे की नहीं, बल्कि एक वास्तविक परिवार की है, जहां रिश्तों का अंत एक बड़े आर्थिक समझौते के साथ हुआ।
केंद्रीय विभाग के अधिकारी का प्रेम प्रसंग बना विवाद की वजह
जानकारी के अनुसार, मामला एक केंद्रीय सरकारी विभाग में पदस्थ 42 वर्षीय अधिकारी से जुड़ा है। उसी विभाग में कार्यरत 54 वर्षीय महिला सहकर्मी के साथ उनका नजदीकी संबंध विकसित हो गया। दोनों के बीच उम्र का 12 साल का अंतर है, लेकिन बढ़ती नजदीकियों ने अधिकारी के वैवाहिक जीवन में खलल डाल दिया।
परिवार में पत्नी और दो बेटियां 16 और 12 वर्ष की रहती हैं। बताया जाता है कि जैसे-जैसे यह संबंध गहराता गया, घर में तनाव बढ़ता गया। आए दिन विवाद होने लगे और पारिवारिक माहौल अस्थिर हो गया।
बेटियों पर पड़ा मानसिक असर
माता-पिता के बीच लगातार हो रहे झगड़ों का असर बच्चों पर साफ दिखाई देने लगा। बड़ी बेटी मानसिक दबाव में आ गई। आखिरकार उसने साहस दिखाते हुए मामला कुटुंब न्यायालय तक पहुंचाया। वहां काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू की गई।
परामर्श सत्र के दौरान अधिकारी ने साफ शब्दों में कहा कि वह अपनी पत्नी के साथ खुश नहीं है और उसे अपनी सहकर्मी के साथ ही मानसिक संतुलन और सुकून मिलता है। यह बयान सुनने के बाद पत्नी ने भावनात्मक संघर्ष के बजाय व्यावहारिक रास्ता अपनाने का निर्णय लिया।
डेढ़ करोड़ का समझौता
पत्नी ने शर्त रखी कि बेटियों के भविष्य और अपने गुजारे के लिए उसे एक डुप्लेक्स मकान तथा 27 लाख रुपये नकद दिए जाएं। कुल मिलाकर यह समझौता लगभग डेढ़ करोड़ रुपये का रहा।
हैरानी की बात यह रही कि अधिकारी की प्रेमिका ने यह प्रस्ताव बिना विरोध स्वीकार कर लिया। सूत्रों के मुताबिक, प्रेमिका का कहना था कि वह अपने साथी के परिवार को असुरक्षित स्थिति में नहीं छोड़ना चाहती और इसके लिए अपनी जीवनभर की बचत लगाने को तैयार है।
न्यायालय में हुई औपचारिक प्रक्रिया
समझौते के बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई और दोनों पक्षों की सहमति से अलगाव की दिशा में कदम बढ़ाया गया। यह मामला अब शहर के न्यायिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
विशेषज्ञों की राय
पारिवारिक मामलों के जानकारों का मानना है कि जब रिश्तों में भावनात्मक जुड़ाव खत्म हो जाए और केवल तनाव शेष रह जाए, तो सम्मानजनक ढंग से अलग होना कई बार बेहतर विकल्प हो सकता है। खासकर तब, जब बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य और आर्थिक सुरक्षा दांव पर हो।
भोपाल का यह मामला भले ही समाज को असामान्य लगे, लेकिन इसमें यह स्पष्ट दिखा कि लंबे विवाद के बजाय आपसी सहमति से समाधान निकाला गया, ताकि भविष्य में किसी पक्ष को असुरक्षा का सामना न करना पड़े।

Join our WhatsApp Group
Sub Editor

मैं सूरज सेन पिछले 6 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं और मैने अलग अलग न्यूज चैनल,ओर न्यूज पोर्टल में काम किया है। खबरों को सही और सरल शब्दों में आपसे साझा करना मेरी विशेषता है।
error: RNVLive Content is protected !!