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सागर : नई परिवहन नीति के विरोध में बस ऑपरेटर्स 2 मार्च से जायेंगे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर

सागर : नई परिवहन नीति ...

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सागर : नई परिवहन नीति के विरोध में बस ऑपरेटर्स 2 मार्च से जायेंगे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर
सागर। मप्र में मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा योजना लागू होने से पहले ही प्रदेश के निजी बस संचालकों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। रविवार को सागर के कर्रापुर स्थित एक निजी होटल में प्रदेशभर के बस ऑपरेटरों का सम्मेलन आयोजित किया गया, मप्र बस ओनर्स एसोसिएशन के सानिध्य में प्रदेश के 55 जिलों के 400 से अधिक बस ऑपरेटर्स एवं 55 जिलों के अध्यक्ष, प्राइम रूट एसोसिएशन के अध्यक्ष गोविंद शर्मा, मप्र बस ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संतोष पाण्डेय की अध्यक्षता में सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। जिसमें अलग-अलग जिलों के बस संचालक शामिल हुये। वर्तमान में बस ऑपरेटर्स ने निर्णय लिया है कि वे अगले एक से दो दिनों में सरकार और प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखेंगे और यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो 2 मार्च से प्रदेश के सभी बस ऑपरेटर्स अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जायेंगे। सम्मेलन में बस ऑनर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री सस्ते में बेहतर सफर उपलब्ध कराने की बात कर रहे हैं। लेकिन उनके पास खुद की कोई बस नहीं है। वह बस ऑपरेटर्स के सभी परमिट निरस्त करके कंपनियों को परमिट उपलब्ध करायेंगे। प्रदेश में ऐसी 7 कंपनियां बन भी चुकी हैं। कुल मिलाकर सरकार का उद्देश्य बस मालिकों को किरायेदार बनाकर उनका शोषण करना है। सम्मेलन में बस संचालकों ने एक मत होकर कहा कि जब सरकार की अपनी बसें ही नहीं है तो यह सेवा सरकारी कैसे हुई। सरकार प्रदेश की जनता को गुमराह कर रही है। पहले ही जनता का पैसा सरकार सूत्र सेवा बसों के रूप में बर्बाद कर चुकी है। अब फिर से द्वेष और दुर्भावना से जनता और ऑपरेटरों को धोखे में रख निजी कंपनियों को फायदा देने के मकसद से बसों से स्थायी परमिटों पर संचालन कर रहे। बस ऑपरेटर के परमिट सरकार छीनना चाहती है और बस ऑपरेटरों को बेरोजगार करना चाहती है। सरकार का अड़ियल रवैया देख बस ऑपरेटरों में गहरा रोष है। जिसको लेकर बस ऑपरेटरों ने निर्णय लिया है कि वे अगले एक से दो दिनों में प्रदेश के सभी जिलों में कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखेंगे। मांगें नहीं मानी गई तो 2 मार्च से प्रदेश के सभी बस ऑपरेटर्स अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जायेंगे। इसके लिये शासन जिम्मेदार होगा। बैठक में प्रदेश की सभी यूनियनों ने हड़ताल का समर्थन किया है। सरकार अप्रैल 2026 से इस योजना को शुरू करने का लक्ष्य रख रही है। इसके तहत लगभग दो दशक बाद परिवहन सेवा को फिर से सरकारी नियंत्रण में लाने की तैयारी है। सरकार का दावा है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच किफायती, सुरक्षित और समयबद्ध परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराई जायेगी। खासकर उन ग्रामीण रूटों पर जहां अभी निजी बसों की कमी है या कनेक्टिविटी खराब है। सरकार खुद बसें नहीं खरीदेगी, बल्कि सार्वजनिक निजी भागीदारी पीपीपी मॉडल पर काम करेगी। योजना के तहत बसें निजी ऑपरेटर्स की होंगी, लेकिन उनका नियंत्रण और निगरानी सरकार के पास होगी। बसों की ट्रैकिंग, ई.टिकटिंग और टाइम टेबल के लिये एक मोबाइल एप और डैशबोर्ड बनाया जायेगा। सम्मेलन का संचालन जयकुमार जैन महामंत्री, वीरेंद्र साहू जबलपुर ने किया एवं अशोक श्रीवास्तव, अतुल दुबे ने आभार माना। सम्मेलन के खंडवा जिले से प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सुनील आर्य, जिलाध्यक्ष राजीव शर्मा, सिमरन चावला, रूपल आजमानी और सुरेश राउत समेत प्रदेश के अलग-अलग जिलों के बस ऑपरेटर मौजूद थे।

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मैं सूरज सेन पिछले 6 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं और मैने अलग अलग न्यूज चैनल,ओर न्यूज पोर्टल में काम किया है। खबरों को सही और सरल शब्दों में आपसे साझा करना मेरी विशेषता है।
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