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मध्य प्रदेश में डॉक्टर भर्ती की व्यवस्था बदलेगी, MPPSC से हटकर स्वास्थ्य विभाग करेगा चयन,कैबिनेट में आएगा प्रस्ताव

मध्य प्रदेश में डॉक्टर भर्ती ...

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मध्य प्रदेश में डॉक्टर भर्ती की व्यवस्था बदलेगी, MPPSC से हटकर स्वास्थ्य विभाग करेगा चयन,कैबिनेट में आएगा प्रस्ताव 
भोपाल। मध्य प्रदेश के शासकीय अस्पतालों में लंबे समय से चली आ रही डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव करने जा रही है। अब डॉक्टरों की नियुक्ति मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) के माध्यम से नहीं, बल्कि सीधे स्वास्थ्य विभाग द्वारा की जाएगी। इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए सरकार जल्द ही कैबिनेट के सामने प्रस्ताव रखेगी और मंजूरी मिलते ही प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
भर्ती होगी तेज, साल में कई बार मिलेगा अवसर
वर्तमान में MPPSC के जरिए डॉक्टरों की भर्ती में एक से डेढ़ साल तक का समय लग जाता है और साल में एक ही बार परीक्षा आयोजित हो पाती है। प्रस्तावित नई व्यवस्था लागू होने के बाद स्वास्थ्य विभाग आवश्यकता के अनुसार वर्ष में कई बार भर्ती कर सकेगा। विभागीय स्तर पर चयन प्रक्रिया अधिकतम एक माह में पूरी करने की योजना है, क्योंकि डॉक्टरों की नियुक्ति में लिखित परीक्षा नहीं होती और चयन केवल साक्षात्कार के आधार पर किया जाता है।
प्रदेश में 6637 डॉक्टर पद रिक्त
राज्य के शासकीय अस्पतालों में डॉक्टरों के कुल 6637 पद खाली हैं। आंकड़ों के अनुसार विशेषज्ञ डॉक्टरों के 5443 स्वीकृत पदों में से 3948 पद रिक्त हैं, जबकि मेडिकल ऑफिसरों के 6513 पदों में से 2689 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इस भारी कमी के कारण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों तक इलाज व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
लंबी चयन प्रक्रिया से हो रहा नुकसान
मौजूदा प्रणाली में चयन प्रक्रिया लंबी होने के कारण कई योग्य डॉक्टरों को नियुक्ति आदेश मिलने से पहले ही अन्य राज्यों या निजी अस्पतालों में नौकरी मिल जाती है। इससे न सिर्फ अभ्यर्थियों का नुकसान होता है, बल्कि सरकारी अस्पतालों को समय पर डॉक्टर नहीं मिल पाते, जिसका सीधा असर मरीजों की उपचार सुविधा पर पड़ता है।
भर्ती बोर्ड का विकल्प भी छोड़ा
स्वास्थ्य विभाग ने पहले डॉक्टरों की भर्ती के लिए अलग भर्ती बोर्ड गठित करने पर भी विचार किया था और अन्य राज्यों की व्यवस्थाओं का अध्ययन किया गया था। लेकिन यह आशंका सामने आई कि बोर्ड बनने के बाद भी प्रक्रिया में देरी हो सकती है। इसी कारण सरकार ने भर्ती की पूरी जिम्मेदारी सीधे स्वास्थ्य विभाग को सौंपने का निर्णय लिया है।
राज्य सरकार का मानना है कि इस फैसले से डॉक्टरों की कमी को तेजी से पूरा किया जा सकेगा और प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी। कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद नई भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना है।

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मैं सूरज सेन पिछले 6 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं और मैने अलग अलग न्यूज चैनल,ओर न्यूज पोर्टल में काम किया है। खबरों को सही और सरल शब्दों में आपसे साझा करना मेरी विशेषता है।
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