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सागर : गोपाल भार्गव के बयान से भाजपा में असंतोष की आहट, वरिष्ठ नेताओं की भूमिका पर फिर बहस तेज ?

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सागर : गोपाल भार्गव के बयान से भाजपा में असंतोष की आहट, वरिष्ठ नेताओं की भूमिका पर फिर बहस तेज ?

सागर। मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर वरिष्ठ भाजपा नेता और रहली विधायक गोपाल भार्गव का दर्द सार्वजनिक मंच से छलक पड़ा है। सागर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव ने अपने राजनीतिक सफर, पार्टी के प्रति निष्ठा और वर्तमान परिस्थितियों को लेकर खुलकर बात की। उनके बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गोपाल भार्गव ने कहा कि राजनीति में उपेक्षा किसी भी व्यक्ति को भीतर से तोड़ देती है। उन्होंने कहा, “अगर किसी व्यक्ति की बात सरकार नहीं सुनती, तो उसका मन टूट जाता है।” इसी भावनात्मक संदर्भ में उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने 20 साल तक लगातार कठिन परिस्थितियों को सहा है, जबकि आज के दौर में लोग 20 महीने भी नहीं टिक पाते।
अपने बयान में गोपाल भार्गव ने यह भी खुलासा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उन्हें एक बार कांग्रेस में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था। इस पर अपनी प्रतिक्रिया बताते हुए उन्होंने कहा, “मैंने साफ कह दिया था कि यह माल टिकाऊ है, बिकाऊ नहीं।” इस टिप्पणी को उन्होंने अपनी राजनीतिक ईमानदारी और पार्टी के प्रति निष्ठा से जोड़ते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा सिद्धांतों की राजनीति की है और किसी भी प्रकार के राजनीतिक सौदे से खुद को दूर रखा है।
गोपाल भार्गव ने आगे कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन पार्टी को समर्पित कर दिया है। “मैंने पार्टी को जीवन दिया है,” कहते हुए उन्होंने यह भी संकेत दिया कि लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद अपेक्षित सम्मान न मिलना पीड़ा का कारण बनता है। उनका यह बयान सीधे तौर पर वर्तमान राजनीतिक हालात और संगठन के भीतर की स्थिति की ओर इशारा करता है।
उल्लेखनीय है कि गोपाल भार्गव सागर जिले की रहली विधानसभा से लगातार कई बार विधायक चुने जा चुके हैं और भाजपा के सबसे वरिष्ठ नेताओं में उनकी गिनती होती है। वे पूर्व में लोक निर्माण विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास सहित कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रह चुके हैं। उनके प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक पकड़ को देखते हुए उन्हें हमेशा पार्टी का मजबूत स्तंभ माना गया है।
हालांकि, मुख्यमंत्री मोहन यादव की वर्तमान कैबिनेट में गोपाल भार्गव को मंत्री पद नहीं दिया गया। इसके बाद से ही उनके बयानों में नाराजगी और पीड़ा के स्वर लगातार सामने आ रहे हैं। इससे पहले दिए गए एक बयान में उन्होंने कहा था कि “हर जगह सिर्फ ब्राह्मणों को ही टारगेट किया जा रहा है,” जिस पर प्रदेशभर में राजनीतिक और सामाजिक हलचल मच गई थी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गोपाल भार्गव के ये बयान न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत पीड़ा को दर्शाते हैं, बल्कि भाजपा के भीतर वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं की भूमिका को लेकर चल रही असंतोष की चर्चा को भी हवा देते हैं। आने वाले समय में उनके बयानों का पार्टी और प्रदेश की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

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