मुआबजे के लिए किसानों का अनोखा आंदोलन, भैंस के आगे बजाई बीन
बुरहानपुर। जिले की प्रमुख मध्यम सिंचाई परियोजना पांगरी बांध से प्रभावित किसान पिछले तीन वर्षों से उचित मुआवजे की मांग को लेकर संघर्षरत हैं। किसानों का आरोप है कि जल संसाधन विभाग और शासन उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए किसान लगातार अलग-अलग तरीकों से विरोध दर्ज करा रहे हैं।
हाल ही में 31 दिसंबर को बड़ी संख्या में किसान नेपानगर के एसडीएम कार्यालय पहुंचे और “हल्ला बोल” आंदोलन किया। इससे पहले भी किसान शीर्षासन करने, पत्थर खाओ आंदोलन और भ्रष्टाचार की मटकी फोड़ने जैसे प्रतीकात्मक और अनूठे विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं।
आंदोलन से जुड़े डॉ. रवि पटेल ने बताया कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिनियम 2013 के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में अधिग्रहित भूमि की कीमत का दोगुना मुआवजा तथा अनुग्रह राशि देने का प्रावधान है। इसी आधार पर किसान प्रति हेक्टेयर कम से कम 25 लाख रुपये मुआवजे की मांग कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस परियोजना के तहत आदिवासी किसानों को पर्याप्त मुआवजा नहीं दिया जा रहा है और जब तक न्याय नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा।
पांगरी बांध परियोजना के तहत पांगरी, नागझिरी सहित आसपास के गांवों के सौ से अधिक परिवारों की जमीन अधिग्रहित की गई है। 115 करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस परियोजना की जलभराव क्षमता 18.5 एमसीएम है और इससे करीब 4,400 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलना प्रस्तावित है।
किसानों का कहना है कि वर्तमान में प्रस्तावित मुआवजा इतना नहीं है कि वे किसी अन्य स्थान पर खेती योग्य जमीन खरीद सकें। ऐसे में आजीविका का संकट खड़ा हो सकता है, इसी कारण वे दोगुने मुआवजे की मांग पर अड़े हुए हैं। आंदोलन में नंदू पटेल, मान्या भिलावेकर, शुमला, मंसाराम, माधो नाटो, बद्री वास्कले, श्रीराम, सालिकराम भिलावेकर, संजय चौकसे सहित बड़ी संख्या में किसान शामिल हैं।








