दिवाली से पहले सस्ता हो सकता है वाहन खरीदना, जीएसटी सुधार पर पीएम मोदी का संकेत….
नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी सुधारों की ओर इशारा करते हुए बड़ा ऐलान किया। पीएम ने कहा कि अक्टूबर में दिवाली से पहले केंद्र सरकार जीएसटी स्लैब में अहम बदलाव कर सकती है। इस घोषणा के बाद से ही बाजार में वाहनों और कुछ अन्य वस्तुओं के सस्ता होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यदि प्रस्तावित सुधार लागू होता है तो आम लोगों के लिए यह दिवाली का तोहफा साबित होगा।
छोटी कारों की कीमतों में भारी गिरावट की उम्मीद
एचएसबीसी की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, यदि छोटी कारों पर जीएसटी दर 28% से घटाकर 18% कर दी जाती है, तो इनकी कीमत में करीब 8% तक की कमी आ सकती है। वहीं बड़ी कारों और एसयूवी पर भी 3% से 5% तक का फायदा ग्राहकों को मिल सकता है। रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि यदि सभी पैसेंजर व्हीकल्स को 18% जीएसटी स्लैब में लाया गया, तो पूरे ऑटो सेक्टर को 6% से 8% तक का लाभ मिल सकता है।
सरकार को हो सकता है राजस्व नुकसान
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की टैक्स कटौती से केंद्र सरकार के राजस्व पर असर पड़ सकता है। अनुमान है कि वाहन क्षेत्र में जीएसटी घटाने से सरकार को करीब 5 से 6 अरब डॉलर तक की आय का नुकसान होगा। इसलिए चर्चा यह भी है कि टैक्स स्ट्रक्चर को पूरी तरह बदलने के बजाय छोटे और बड़े वाहनों पर अलग-अलग दरें तय की जा सकती हैं। प्रस्ताव के अनुसार छोटी कारों पर 18% जीएसटी रखा जाए, जबकि बड़ी कारों पर लगभग 40% की दर तय की जा सकती है।
किस श्रेणी पर कितना टैक्स लगता है?
फिलहाल भारत में पैसेंजर व्हीकल्स पर 28% से 50% तक जीएसटी वसूला जाता है। इसके अलावा 1% से 22% तक का उपकर (Cess) भी लागू है।
छोटी पेट्रोल कारों (1200 सीसी तक और 4 मीटर लंबाई से कम) पर कुल 29% टैक्स (28% जीएसटी + 1% सेस) लिया जाता है।
छोटी डीजल कारों पर यह टैक्स 31% तक पहुंचता है।
मिड-साइज कारों पर 43%, लग्जरी कारों पर 48% और एसयूवी पर लगभग 50% टैक्स देना पड़ता है।
वहीं इलेक्ट्रिक वाहनों पर सिर्फ 5% जीएसटी है, जिस कारण उनकी बिक्री में तेजी देखी जा रही है।
छोटी कारों के बाजार को मिलेगा सहारा
बीते कुछ वर्षों में एंट्री-लेवल कारों की बिक्री लगातार गिर रही है। 2016 में जहां इनकी बिक्री 10 लाख यूनिट से अधिक थी, वहीं वित्तीय वर्ष 2025 में यह घटकर महज 25 हजार यूनिट रह गई। इसी तरह, हैचबैक कारों की हिस्सेदारी 2020 में 47% थी जो 2024 में घटकर केवल 24% रह गई। ऐसे में यदि जीएसटी कम होता है तो सबसे ज्यादा फायदा छोटी कारों के बाजार को मिलेगा और ग्राहक फिर से इस सेगमेंट की ओर रुख कर सकते हैं।
त्योहारों के सीजन में बढ़ सकती है मांग
भारत में परंपरा है कि लोग धनतेरस और दिवाली जैसे शुभ अवसरों पर नया वाहन खरीदना पसंद करते हैं। इस बार दिवाली 20 अक्टूबर को है और अगर उससे पहले जीएसटी सुधार लागू हो जाते हैं, तो वाहन निर्माताओं और डीलरों को बिक्री में जबरदस्त उछाल देखने को मिल सकता है।