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राम नाम सत्य के नारों के साथ सागर में विरोध, यूजीसी नियमों पर भड़का सवर्ण समाज

राम नाम सत्य के नारों ...

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राम नाम सत्य के नारों के साथ सागर में विरोध, यूजीसी नियमों पर भड़का सवर्ण समाज

सागर। देशभर में यूजीसी के नए नियमों को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इसी कड़ी में सागर में सवर्ण समाज द्वारा विरोध का एक अनोखा और प्रतीकात्मक तरीका देखने को मिला। सवर्ण समाज के लोगों ने सरकार, सिस्टम और सवर्ण समाज के नेताओं की प्रतीकात्मक अर्थी तैयार कर जूता मारते हुए और उल्टे बाजे बजाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने “राम नाम सत्य” के नारों के साथ अर्थी यात्रा निकाली।
यह अंतिम यात्रा पहलवान बाबा से शुरू होकर सिविल लाइन, कालीचरण चौराहा होते हुए कलेक्ट्रेट परिसर पहुंची। कलेक्ट्रेट में प्रदर्शनकारियों ने अपर कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से सवर्ण समाज ने यूजीसी के नियमों को लेकर कड़ा विरोध जताते हुए एक अलग राज्य की मांग भी रख दी, जिसे लेकर प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा शुरू हो गई है।
प्रदर्शन कर रहे सवर्ण समाज के लोगों का कहना था कि देश में हर काम अब जाति प्रमाण पत्र के आधार पर हो रहा है। कानून बनाते समय भी जाति को आधार बनाया जा रहा है, अपराध तय करने में भी जाति देखी जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों को बिना किसी जांच के ही अपराधी मान लिया जा रहा है, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।
सवर्ण समाज ने कहा कि यूजीसी के नए नियमों से छात्रों में भय का माहौल बन रहा है और इसका सीधा असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा। समाज के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही इन नियमों को वापस नहीं लिया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान सवर्ण समाज ने आगे के आंदोलन की रूपरेखा भी घोषित की। उन्होंने 1 फरवरी को सागर बंद का आवाहन किया है। वहीं 2 फरवरी को डॉक्टर हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की गई है।
इस अनोखे विरोध प्रदर्शन को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग सड़क किनारे जुटे रहे। प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। यूजीसी नियमों को लेकर सागर में शुरू हुआ यह आंदोलन अब जिले से निकलकर प्रदेश स्तर पर असर डाल सकता है।

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हमारे बारे में योगेश दत्त तिवारी पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और मीडिया की दुनिया में एक विश्वसनीय और सशक्त आवाज के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। अपने समर्पण, निष्पक्षता और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता के चलते उन्होंने पत्रकारिता में एक मजबूत स्थान बनाया है। पिछले 15 वर्षों से वे प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र 'देशबंधु' में संपादक के रूप में कार्यरत हैं। इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने समाज के ज्वलंत मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है और पत्रकारिता के उच्चतम मानकों को बनाए रखा है। उनकी लेखनी न सिर्फ तथ्यपरक होती है, बल्कि सामाजिक चेतना को भी जागृत करती है। योगेश दत्त तिवारी का उद्देश्य सच्ची, निष्पक्ष और जनहितकारी पत्रकारिता को बढ़ावा देना है। उन्होंने हमेशा युवाओं को जिम्मेदार पत्रकारिता के लिए प्रेरित किया है और पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम माना है। उनकी संपादकीय दृष्टि, विश्लेषणात्मक क्षमता और निर्भीक पत्रकारिता समाज के लिए प्रेरणास्रोत रही है।
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