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सड़कों पर हादसे का इंतजार कर रहे जिम्मेदार तीन सवारी क्षमता वाले ऑटो में एक दर्जन से अधिक सवारी ढो रहे 

सड़कों पर हादसे का इंतजार ...

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सड़कों पर हादसे का इंतजार कर रहे जिम्मेदार तीन सवारी क्षमता वाले ऑटो में एक दर्जन से अधिक सवारी ढो रहे 

वाहनों में क्षमता से अधिक सवारियां होने के कारण आए दिन होते हैं हादसे पुलिस प्रशासन द्वारा नहीं की जा रही कार्रवाई बड़े हादसे का इंतजार कर रही तेंदूखेड़ा पुलिस प्रशासन 

रिपोर्ट -विशाल रजक

तेंदूखेड़ा। बीते दिनों जबलपुर के बरगी डैम में क्रूज पलटने की घटना जितनी दर्दनाक थी उतनी ही इसमें जिम्मेदारों की लापरवाही के आरोप लगाए जा रहे हैं हालांकि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविकता सामने आएगी। हर घटना-दुर्घटना के बाद गलती में सुधार को लेकर चिंतन होता है, लेकिन ये सिर्फ चंद दिनों के लिए रहता है समय के साथ लोग भी सबकुछ भूल जाते हैं और जिम्मेदार भी पुराने ढर्रे पर काम करने लगते हैं तेंदूखेड़ा नगर में भी हर दिन कुछ न कुछ

ऐसा देखने को मिलता है, जो गंभीर लापरवाही होती है, जिसे कोई नहीं रोकता लेकिन जब हादसा होता है तो लगता है काश इसका विरोध करना था ऐसा ही कुछ इन दिनों तेंदूखेड़ा नगर एवं ग्रामीणों क्षेत्रों में चल रहा है दरअसल नगर एवं आसपास ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाले आटो चालक सवारियों को भेड़ बकरियों की तरह भरकर चल रहे हैं इन ओवरलोड आटो वाहनों पर प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती जो आए दिन थाने के सामने से भी गुजर रहे हैं लेकिन या तो पुलिस को नजर नहीं आ रहे या फिर पुलिस इनकी और देखना नहीं चाहती है इन आटो वाहन चालकों को भी किसी की परवाह है और नहीं किसी का डर तभी तो क्षमता से अधिक सवारी भरकर दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रहे हैं पूर्व में हो चुके हादसों के बाद भी न वाहन चालक चेते और न ही पुलिस प्रशासन जागा कई वाहन तो बिना परमिट बीमा फिटनेस के ही दौड़ रहे हैं लेकिन उनकी जांच करने वाला हो कोई नहीं है 

रविवार को खकरिया मार्ग की तरफ से आ रहा तेज रफ्तार आटो में लोगों को ठूंस-ठूंसकर लाया जा रहा था। ऐसी तस्वीरों को देखकर लगता हैं कि जिम्मेदार अब सड़क पर हादसे का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन

जब तक दोषियों पर कार्रवाई होगी तब तक कई बेगुनाह अपनी जान गंवा चुके होंगे

 इन मार्गों पर चल रहे आटो रिक्शा

 ये ऑटो रिक्शा ग्रामीण क्षेत्र में आधा दर्जन से ज्यादा सवारियां बैठाकर गांवों में सरपट दौड़ लगा रहे हैं। यह ऑटो जंगल व पहाड़ी गांवों में अपना खतरनाक सफर जारी रखे हुए हैं। नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में क्षमता से अधिक सवारी बैठाए ऑटो आवाजाही करते हुए कभी भी दिखाई दे जाते हैं, कई ऑटो तो ऐसे हैं जिनकी नंबर प्लेट ही गायब है तेंदूखेड़ा नगर सहित जबलपुर पाटन मार्ग, तारादेही मार्ग, दमोह मार्ग, खकरिया मार्ग, जामुनखेड़ा मार्ग सहित कई गांवों में क्षमता से अधिक सवारियां ठूंस-ठूंस कर बैठाए हुए ऑटो तेज गति से आते जाते हुए दिखाई दे जाते हैं। तेंदूखेड़ा ब्लॉक में एक दो नहीं बल्कि दर्जनों ऑटों रिक्शा ऐसे दिखे। जिनमें बड़ी संख्या में सवारियां बैठी थी। गौर करने वाली बात ये है कि ऑटो पुलिस की नजरों के सामने से भी गुजरते हुए नजर आए हैं। किसी ने रोकना टोकना जरूरी भी नहीं समझा शादियों का सीजन शुरू होते ही ये वाहन पूरे दिन इसी तरह भरकर सड़कों पर दौड़ते नजर आने लगते हैं सूत्र बताते हैं कि पुलिस भी ऐसे वाहनों से हफ्ता वसूली करती है तभी तो उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती लोगों की जान की परवाह न वाहन चालकों को होती है और न ही पुलिस चिंता करती है

पुलिस की भी है मिलीभगत

जानकारों का कहना है कि क्षेत्र में इस तरह के ओवरलोडेड चार पहिया वाहनों से सवारी ढोने के मामले में जरूर जिम्मेदारों ने संरक्षण प्रदान किया हुआ है, तभी तो बेखौफ होकर बिना परमिट, बीमा तथा अनफिट वाहनों से बड़ी संख्या में सवारियों को लाने ले जाने का काम चल रहा है। इस मामले में कहीं न कहीं पुलिस की मिलीभगत भी नजर आ रही है, तभी तो इन पर रोक नहीं लग रही

पूर्व में हो चुके हादसे

ओवरलोडेड सवारी भरकर तेज रफ्तार भागने वाले वाहन पूर्व में दुर्घटना का शिकार भी हो चुके हैं। इन वाहनों के पलटने या दुर्घटनाग्रस्त होने से कई लोग काल कलवित हो चुके इसके बाद भी पुलिस प्रशासन नहीं चेत रहा है। पुलिस द्वारा इन वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करना तो दूर इन्हें रोकने का प्रयास भी नहीं किया जा रहा है।

गति पर नहीं रहता नियंत्रण

इस तरह सवारी भरकर भागने वाले वाहनों की गति में भी नियंत्रण नहीं होता है। ये वाहन तेज रफ्तार भागते हैं, ताकि लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचाकर जल्दी वापस आ सकें। सड़कों पर गड्ढे होने के बाद भी इन वाहनों की रफ्तार कम नहीं होती है, जिसके कारण दुर्घटना का भय हमेशा बना रहता है

 नशा कर वाहन चलाने वालों की जांच के लिए नहीं है ब्रीथ एनालाइजर

वहीं दूसरी ओर नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में चल रहे ओवरलोडिंग वाहनों की पुलिस द्वारा भी जांच नहीं की जाती है। कहीं चालक नशे की हालत में है या नहीं उसे छोटे वाहन से लेकर बड़े वाहन चलाने का अनुभव नहीं, योग्यता है कि नहीं, कुछ भी नहीं देखा जाता है। ब्रीथ एनालाइजर मशीन का भी कहीं पर उपयोग नहीं किया जाता है। शराब गांजा के नशे में वाहन चालक अंधाधुंध भाग रहे है, लेकिन जांच व कार्रवाई कहीं पर होती नहीं दिख रही है, सिर्फ खानापूर्ति के नाम पर कभी-कभार चेकिंग अभियान के तहत बाइक सवारों के बिना हेलमेट चैकिंग कर चालान काटे जाते हैं और बड़े वाहनों पर कोई नजर नहीं है। जबकि बड़े-बड़े वाहनों के चालक मार्ग से गुजर रहे राहगीर, बाइक सवार, ऑटो आदि को रौदकर निकल जाते हैं। गौर करने वाली बात ये है कि जिम्मेदार इन्हें रोकने कोई ठोस पहल नहीं कर रहे हैं। पुलिस और परिवहन विभाग नगर प्रशासन बेपरवाह बना हुआ है।

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मैं सूरज सेन पिछले 6 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं और मैने अलग अलग न्यूज चैनल,ओर न्यूज पोर्टल में काम किया है। खबरों को सही और सरल शब्दों में आपसे साझा करना मेरी विशेषता है।
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