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MP के सतना-चित्रकूट में 14 घंटे की बारिश के बाद बाढ़ का कहर, 700 लोग रेस्क्यू; मंदाकिनी में बहा 300 मीटर लंबा पुल

रामघाट समेत कई इलाकों में ...

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रामघाट समेत कई इलाकों में घर-दुकानें डूबीं, सेना के हेलीकॉप्टर और SDRF ने संभाला मोर्चा; मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर दिए राहत कार्य तेज करने के निर्देश

सतना/चित्रकूट। मध्य प्रदेश के सतना और चित्रकूट में करीब 14 घंटे तक हुई लगातार बारिश ने हालात बिगाड़ दिए। तेज बारिश के बाद नदियों का जलस्तर बढ़ने से कई इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी उफान पर आने से रामघाट सहित कई क्षेत्र जलमग्न हो गए, जबकि सतना के कोटर, बिरसिंहपुर और कोठी इलाके में सेमरावल नदी ने रौद्र रूप दिखाया। गांवों और घरों में पानी भरने के बाद प्रशासन को बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान चलाना पड़ा।

प्रशासन के मुताबिक अब तक जिलेभर में करीब 700 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी चित्रकूट पहुंचे और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों से राहत और बचाव कार्यों की जानकारी ली तथा प्रभावित लोगों से उनकी परेशानियों के बारे में बातचीत की।

मंदाकिनी के तेज बहाव में बह गया 300 मीटर लंबा पुल

चित्रकूट में बाढ़ की स्थिति सबसे ज्यादा भयावह रामघाट इलाके में रही। मंदाकिनी नदी पर बना करीब 42 साल पुराना और 300 मीटर लंबा पुल तेज बहाव की चपेट में आकर बह गया। नदी का पानी कम होने के बाद पुल के टूटे हिस्से और आसपास फैला मलबा बाढ़ की तीव्रता की तस्वीर सामने लाता रहा।

रामघाट के अलावा राघव प्रयाग घाट, कामता, नयागांव, आरोग्यधाम, पुरानी लंका चौराहा, बाजार, खटकाना, क्योतरा, रामायणी कुटी और जानकीकुंड सहित कई क्षेत्रों में पानी भर गया। हालात इतने खराब हो गए कि कई दो मंजिला मकानों तक पानी पहुंच गया और लोगों को मजबूरी में घरों की छतों पर रात गुजारनी पड़ी।

मंदाकिनी के किनारे संचालित करीब 400 दुकानें भी बाढ़ की चपेट में आ गईं। घरों और दुकानों में पानी के साथ कीचड़ घुसने से राशन, कपड़े, बिस्तर, फर्नीचर और दूसरी घरेलू वस्तुएं खराब हो गईं। सती अनसूया, गुप्तगोदावरी और स्फटिक शिला जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी बाढ़ का असर पड़ा।

SDRF की मोटरबोट से रेस्क्यू, सेना के दो हेलीकॉप्टर भी उतरे

बाढ़ में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए SDRF और अन्य राहत दलों ने मोटरबोट की मदद से अभियान चलाया। स्थिति ज्यादा गंभीर होने पर सेना के दो हेलीकॉप्टरों को भी बचाव कार्य में लगाया गया।

जानकारी के अनुसार देर रात तक करीब 650 लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया जा चुका था। प्रशासन ने बाद में जिलेभर में करीब 700 लोगों को सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी दी।

सतना में सेमरावल नदी उफनी, गांवों में घुसा पानी

सतना जिले के कोटर क्षेत्र में सेमरावल नदी के बढ़े जलस्तर ने कई गांवों में मुश्किलें खड़ी कर दीं। ऊधव धाम के पास पुल के ऊपर से करीब पांच फीट पानी बहता रहा।

रेहुटा, किचवारिया, इटौर, मैनपुरा, अकौना, रजरवार, खम्हरिया, टिकरी, रगौली और सोहास समेत कई गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया। कई कच्चे मकान क्षतिग्रस्त हुए। पानी बढ़ने के बाद लोग रातभर घरों की छतों पर बैठे रहे, जबकि कई परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए।

सांसद गणेश सिंह के खम्हरिया स्थित आवास में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया। सांसद ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और अधिकारियों से राहत एवं रेस्क्यू अभियान में तेजी लाने को कहा।

रात 2 बजे NDRF ने रामजी मिश्रा को सुरक्षित निकाला

रैगांव विधानसभा क्षेत्र के बम्हरौला बड़ी पतारी टोला में 42 वर्षीय रामजी मिश्रा बाढ़ के पानी के बीच अपने घर में फंस गए थे। रात करीब दो बजे NDRF की टीम ने ग्रामीणों की मदद से उनका सुरक्षित रेस्क्यू किया।

इस दौरान राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी, एसडीएम, तहसीलदार और थाना प्रभारी भी मौके पर मौजूद रहे। टीम ने रामजी मिश्रा को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

बिजली और सड़क नेटवर्क भी प्रभावित

बाढ़ के पानी में कई बिजली के ट्रांसफार्मर और खंभे डूब गए। इसके चलते खम्हरिया और अबेर फीडर से जुड़े करीब एक दर्जन गांवों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई।

सतना-सेमरिया मार्ग पर ऊधव धाम के नजदीक पुल की रेलिंग टूट गई। वहीं बिरसिंहपुर-खडौरा-खडौरी-नगवर मार्ग पर बना प्रमुख पुल भी क्षतिग्रस्त हो गया। चित्रकूट-सतना मार्ग की पुलिया को नुकसान पहुंचने के कारण भारी वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। यात्रियों से वैकल्पिक मार्ग के तौर पर नागौद-कालिंजर रास्ते का इस्तेमाल करने की अपील की गई है।

जलस्तर घटा, लेकिन नुकसान की तस्वीर सामने आने लगी

शनिवार रात के बाद रविवार तड़के सेमरावल नदी का पानी कम होने लगा। इससे कुछ इलाकों में लोगों ने राहत महसूस की और अपने घरों की ओर लौटना शुरू किया। हालांकि बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही नुकसान की तस्वीर भी सामने आने लगी है। कई जगह सड़कें, पुल-पुलिया, बिजली व्यवस्था और मकान प्रभावित हुए हैं।

उचेहरा के पिपरी कलां में नौपुला के जलमग्न होने के कारण दो गांवों का संपर्क अब भी बाधित है। ग्रामीणों के रेलवे पटरी पार कर आवागमन करने से दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रभावित परिवारों से की मुलाकात

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को चित्रकूट पहुंचे और बाढ़ प्रभावित इलाकों का मौके पर जाकर जायजा लिया। हेलीकॉप्टर से आरोग्यधाम पहुंचने के बाद उन्होंने मुखारबिंद के पास बनाए गए आश्रय स्थल में प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। इस दौरान उन्हें राहत सामग्री भी वितरित की गई।

इसके बाद मुख्यमंत्री रामधाम मोहल्ले के प्रभावित हिस्सों में पहुंचे। वे कीचड़ के बीच पैदल चलते हुए लोगों के घरों तक गए और बाढ़ से हुए नुकसान की जानकारी ली। उन्होंने रामफल गर्ग और किस्मत कुमार गर्ग के घर पहुंचकर परिवार के सदस्यों से बातचीत की।

इसके बाद सतना-चित्रकूट मार्ग पर माधव धर्मशाला के पास स्थित अग्रहरि किराना स्टोर पहुंचे। यहां उन्होंने दुकानदार कामता प्रसाद गुप्ता से मुलाकात कर दुकान में हुए नुकसान की जानकारी ली।

CM बोले- जनहानि नहीं, संपत्ति को हुआ बड़ा नुकसान

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रशासन की सतर्कता और मुस्तैदी के चलते बाढ़ की स्थिति में अब तक किसी व्यक्ति की जान नहीं गई है। हालांकि संपत्ति और अन्य संसाधनों को काफी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि संपत्ति का नुकसान बाद में पूरा किया जा सकता है, लेकिन किसी व्यक्ति की जान जाने के बाद उसकी भरपाई संभव नहीं है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रभावित इलाकों में भोजन, पेयजल, चिकित्सा सुविधा और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं लगातार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने एसीएस, कलेक्टर और एसपी सहित वरिष्ठ अधिकारियों से तीन दिन तक चित्रकूट में रहकर हालात पर नजर बनाए रखने को कहा।

उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि पानी पूरी तरह उतरने तक राहत और बचाव कार्य जारी रखा जाए। इसके साथ ही बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत सर्वे कर नियमों के तहत प्रभावित लोगों को सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की जाए।

बाढ़ के साथ अतिक्रमण की भी होगी जांच

मुख्यमंत्री ने बाढ़ के संभावित कारणों की समीक्षा करते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदा के अलावा दूसरे कारणों की भी पड़ताल जरूरी है। उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अतिक्रमण कर बनाए गए निर्माणों को चिह्नित करने और उनकी रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि चित्रकूट की प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व को बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

आश्रय स्थल में प्रभावित परिवारों को मिली राहत सामग्री

चित्रकूट विकास प्राधिकरण के आश्रय स्थल में प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को साड़ी, टी-शर्ट, कंबल और अन्य जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराई। मुख्यमंत्री ने यहां मौजूद लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और उन्हें भरोसा दिलाया कि मुश्किल की इस घड़ी में सरकार उनके साथ है।

अब पुनर्वास और संपर्क व्यवस्था बहाल करना बड़ी चुनौती

बाढ़ का पानी कम होने के बाद सतना और चित्रकूट के प्रभावित क्षेत्रों में राहत के साथ पुनर्वास का काम बड़ी चुनौती बन गया है। क्षतिग्रस्त पुल-पुलिया, बाधित सड़क संपर्क, बिजली आपूर्ति और बाढ़ में खराब हुई घरेलू संपत्ति को दोबारा व्यवस्थित करना प्रशासन के सामने प्राथमिकता है। दोनों जिलों में नुकसान का आकलन करने के साथ राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं।

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मैं सूरज सेन पिछले 6 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं और मैने अलग अलग न्यूज चैनल,ओर न्यूज पोर्टल में काम किया है। खबरों को सही और सरल शब्दों में आपसे साझा करना मेरी विशेषता है।