नकली शराब बनाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश, 11 हजार से ज्यादा खाली बोतलें और डाई मशीनें जब्त
सागर। बंडा क्षेत्र में जहरीली/अमानक शराब के सेवन से हुई मौतों के मामले की जांच में सागर पुलिस ने नकली शराब बनाने और उसे लाइसेंसी शराब दुकानों की आड़ में खपाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक गिरोह नकली शराब तैयार कर उसे सागर जिले के अलग-अलग ग्रामीण क्षेत्रों में कमीशनदारों के माध्यम से बेचता था।
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान नकली शराब तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली दो डाई मशीन, बोतल निर्माण की अन्य डाई, 11,050 खाली प्लास्टिक की बोतलें, 250 प्लास्टिक बोतल बनाने के कैप्सूल, 900 तैयार प्लास्टिक बोतलें और शराब की बोतल सील करने वाली मशीन सहित अन्य सामग्री जब्त की है।
पुलिस के अनुसार इस मामले में अब तक 52 आरोपियों को प्रकरण में आरोपी बनाया गया है, जबकि 37 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। गिरोह की गतिविधियों की जांच अभी जारी है।
6 सितंबर को सामने आया था मामला
पुलिस के मुताबिक 6 सितंबर 2026 को बंडा थाना क्षेत्र के कुछ गांवों में शराब के सेवन से लोगों की मौत होने की सूचना मिली थी। सूचना के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और प्रभावित गांवों में इलाजरत लोगों तथा स्थानीय निवासियों से पूछताछ की। मामले में थाना बंडा और थाना विनायका में अलग-अलग अपराध दर्ज किए गए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक सागर अनुराग सुजानिया के मार्गदर्शन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बीना जयवीर सिंह भदौरिया और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सागर नरेंद्र सोलंकी के निर्देशन में अलग-अलग पुलिस टीमें गठित की गईं। पुलिस ने मुखबिर तंत्र और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।
पूछताछ में सामने आई नकली शराब बनाने की कहानी
पुलिस के मुताबिक पूर्व में गिरफ्तार आरोपी रवि लखेरा से पूछताछ में मनीष लोधी उर्फ यशवंत ठाकुर और आशीष साहू के साथ मिलकर नकली शराब तैयार कर शराब ठेके की आड़ में खपाने की योजना की जानकारी सामने आई।
वहीं पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी चंदू राजा उर्फ चंद्रभान राजपूत ने पूछताछ में बताया कि वह लंबे समय से शराब ठेकेदारों के संपर्क में था। इसी संपर्क के चलते उसकी विनायका स्थित मदिरा दुकान के लाइसेंसी ठेकेदार सिद्धार्थ कुशवाहा के साथ पार्टनरशिप थी। इसके अलावा बंडा के लाइसेंसी ठेकेदार मनीष उर्फ यशवंत ठाकुर से संपर्क होने के कारण बरेठी की शराब दुकान में भी उसकी अघोषित साझेदारी होने की बात पुलिस ने बताई है।
पुलिस के अनुसार ग्राम छापरी निवासी शिवांजय राजपूत और पिपरिया निवासी रोहित पटेल की पहचान मुरैना निवासी दिनेश शिवहरे से थी। दोनों ने चंदू राजा को नकली शराब बनाने का सुझाव दिया, जिसके बाद ततरवारा में नकली शराब तैयार करने की योजना बनाई गई।
मुरैना से आया था नकली शराब बनाने का सामान
जांच में पुलिस के अनुसार दिनेश शिवहरे अपने साथियों के साथ बंडा पहुंचा। इसके बाद नकली शराब तैयार करने के लिए खाली बोतल, ढक्कन, पैकिंग कार्टून और ढक्कन पैक करने वाली मशीन सहित अन्य सामान मंगाया गया।
पुलिस का कहना है कि शराब निर्माण में इस्तेमाल होने वाला लिक्विड भी परिवहन के जरिए सागर पहुंचा था। शिवांजय राजपूत और बलवंत द्वारा वाहन की पायलटिंग करते हुए इस सामग्री को ततरवारा तक पहुंचाने की बात जांच में सामने आई।
पुलिस के अनुसार ततरवारा में नकली अमानक शराब तैयार करने के बाद इसे ततरवारा सहित नौराज, गूगरा, छापरी, जगयर, बमूराभेड़ा, पाटन और आसपास के गांवों में कमीशनदारों के माध्यम से बेचा जाता था।
गिरोह के सदस्य की मौत और दूसरे की आंखों की रोशनी गई
पुलिस के मुताबिक नकली शराब बनाने में शामिल दिनेश शिवहरे और उसके साथी देवा उर्फ देवेंद्र जाटव की तबीयत खराब हुई थी। दिनेश को इलाज के लिए सागर के बंसल अस्पताल लाया गया, लेकिन हालत बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल से मुरैना ले जाया गया, जहां रास्ते में उसकी मौत हो गई।
वहीं पुलिस के अनुसार देवा उर्फ देवेंद्र जाटव की आंखों की रोशनी चली गई। जांच के दौरान पुलिस ने इस घटनाक्रम को नकली शराब निर्माण से जोड़कर भी पड़ताल की।
ग्वालियर और मुरैना में पुलिस की दबिश
मामले की जांच के दौरान पुलिस टीमों को ग्वालियर और मुरैना भेजा गया। वहां से ललित उर्फ छोटू शिवहरे, विक्रम जाटव, राजकुमार उर्फ लल्ला जाटव और टिंकू उर्फ सुरेंद्र जाटव को गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में राजू सेंगर और पंकज राय के नाम सामने आने के बाद पुलिस ने दोनों को भी गिरफ्तार किया। राजू सेंगर की निशानदेही पर ग्वालियर के जेवरा का पुरा, बहोड़ापुर से 11,050 खाली 180 एमएल प्लास्टिक बोतलें, बोतल बनाने की डाई और 250 प्लास्टिक बोतल बनाने के कैप्सूल जब्त किए गए।
वहीं पंकज राय की निशानदेही पर राय कॉलोनी, ग्वालियर स्थित फैक्टरी में दबिश देकर 180 एमएल बोतल बनाने वाली दो डाई मशीनें जब्त की गईं।
दिल्ली से सागर भेजे गए थे पांच ड्रम
जांच के दौरान पुलिस को शराब निर्माण में इस्तेमाल किए गए लिक्विड के परिवहन की जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार पांच प्लास्टिक ड्रम दिल्ली से सागर भेजे गए थे। जांच टीम दिल्ली पहुंची और लॉजिस्टिक कंपनी के माध्यम से जानकारी जुटाई।
इसके बाद पुलिस ने आरएन केमिकल फर्म के संचालक अनुपम गिरी, निवासी धीरज विहार, कराला, नई दिल्ली को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस के अनुसार पूछताछ में उसने पांच प्लास्टिक ड्रम में औद्योगिक स्पिरिट/थिनर दिल्ली से सागर भेजे जाने की बात स्वीकार की। इसके बाद अनुपम गिरी को गिरफ्तार किया गया।
अब तक ये सामग्री जब्त
पुलिस के अनुसार कार्रवाई में—
– 180 एमएल प्लास्टिक शराब बोतल बनाने वाली डाई मशीनें
– 11,050 खाली 180 एमएल प्लास्टिक बोतलें
– ‘बाम्बे’ लिखी प्लास्टिक बोतल बनाने की डाई
– 250 प्लास्टिक बोतल बनाने के कैप्सूल
– 900 तैयार प्लास्टिक बोतलें
– शराब की बोतल सील करने वाली मशीन
– अन्य पैकिंग एवं कच्ची सामग्री
जब्त की गई है।
कई जिलों में नेटवर्क की जानकारी जुटा रही पुलिस
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में इस तरह की गतिविधियों के पहले भी अन्य जिलों में संचालित होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब आरोपियों के पुराने संपर्कों और सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
पुलिस के अनुसार गिरोह का उद्देश्य कम लागत में अधिक मुनाफा कमाना था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ऐसे स्थानों को चुनते थे, जहां प्रभावशाली लोगों का दबदबा हो, ताकि उनकी गतिविधियों की जानकारी आम लोगों तक आसानी से न पहुंच सके।
पुलिस ने बताया कि मामले में बारदाना सप्लाई करने वाले बंटी शर्मा का भी आपराधिक रिकॉर्ड सामने आया है। उसके खिलाफ मुरैना, ग्वालियर और शिवपुरी में आबकारी अधिनियम के तहत मामले दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है।
गिरफ्तार आरोपियों के नाम
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में ललित उर्फ छोटू शिवहरे, विक्रम जाटव, टिंकू उर्फ सुरेंद्र जाटव, राजकुमार उर्फ लल्ला जाटव, राजू सेंगर, पंकज राय, अनुपम गिरी और रोहित पटेल शामिल हैं।
पुलिस का कहना है कि मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी और नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान के लिए जांच जारी है।








