रेलवे बोर्ड का बड़ा फैसला: सेवानिवृत्त रेलकर्मियों और पेंशनभोगियों को पास लेने में मिली राहत
अब एचआरएमएस के साथ मैनुअल व्यवस्था का भी रहेगा विकल्प, छह महीने बाद होगी नई प्रणाली की समीक्षा
भोपाल। सेवानिवृत्त रेलकर्मियों, पारिवारिक पेंशनभोगियों और दिव्यांग कर्मचारियों के लिए रेलवे बोर्ड ने पास और पीटीओ जारी करने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। लंबे समय से उठ रही शिकायतों को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने निर्णय लिया है कि पात्र लाभार्थी अब अपनी सुविधा के अनुसार एचआरएमएस या मैनुअल, किसी भी माध्यम से पास और पीटीओ प्राप्त कर सकेंगे।
दरअसल, हाल ही में ऐसी व्यवस्था लागू की गई थी, जिसके तहत कई सेवानिवृत्त रेलकर्मियों को केवल एचआरएमएस पोर्टल के माध्यम से ही पास लेने के लिए कहा जा रहा था। इससे विशेष रूप से वे पेंशनभोगी, विधवाएं और दिव्यांग कर्मचारी प्रभावित हो रहे थे, जिन्हें डिजिटल प्रणाली का पर्याप्त ज्ञान नहीं है और जो वर्षों से मैनुअल प्रक्रिया के जरिए यह सुविधा लेते आ रहे थे।
इस विषय को 27 जुलाई को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद रेलवे बोर्ड ने मामले पर पुनर्विचार किया। इसके कुछ ही दिनों बाद नया आदेश जारी कर व्यवस्था में संशोधन कर दिया गया। अब संबंधित लाभार्थियों को दोनों विकल्प उपलब्ध रहेंगे, जिससे उन्हें अपनी सुविधा के अनुसार प्रक्रिया चुनने का अवसर मिलेगा।
रेलवे बोर्ड ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि जिन स्थानों पर मैनुअल पास जारी किए जाते हैं, वहां हेल्प डेस्क और सुविधा केंद्र स्थापित किए जाएं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी पात्र व्यक्ति को पास या पीटीओ प्राप्त करने में अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
हालांकि, इस नई व्यवस्था के साथ एक शर्त भी लागू की गई है। जिन सेवानिवृत्त कर्मचारियों या पेंशनभोगियों ने पहले से एचआरएमएस के माध्यम से पास लेना शुरू कर दिया है या जो अपनी सेवा अवधि के दौरान इसी प्रणाली का उपयोग करते थे, उन्हें आगे भी एचआरएमएस के जरिए ही पास प्राप्त करना होगा। यह विकल्प उनके लिए लागू नहीं होगा।
रेलवे बोर्ड ने यह भी बताया है कि नई व्यवस्था की प्रभावशीलता का मूल्यांकन छह महीने बाद किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इससे पहले 15 जुलाई को बोर्ड ने केवल तीन महीने के लिए अंतरिम व्यवस्था के तहत मैनुअल पास जारी रखने की अनुमति दी थी। बाद में सेवानिवृत्त रेलकर्मियों, मान्यता प्राप्त फेडरेशनों और विभिन्न स्तरों पर उठी आपत्तियों के बाद नियमों में संशोधन किया गया। इस फैसले से बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त रेलकर्मियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।








