MP : बड़वानी और नर्मदापुरम से पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत; कामकाजी विद्यार्थियों के लिए समय के अनुसार लगेंगी ऑनलाइन कक्षाएं
भोपाल। मध्यप्रदेश में आठवीं या 10वीं के बाद किसी वजह से पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत में ‘शिक्षा घर’ शुरू किया जाएगा। यहां स्कूल से बाहर हो चुके विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा मिलेगी। यह पहल राज्य मुक्त विद्यालय शिक्षा बोर्ड (राज्य ओपन स्कूल बोर्ड) के माध्यम से संचालित की जाएगी।
बड़वानी और नर्मदापुरम से होगी योजना की शुरुआत
योजना के पहले चरण के लिए बड़वानी और नर्मदापुरम जिलों को चुना गया है। यहां स्कूल छोड़ चुके विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें ओपन स्कूल के जरिए हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी की पढ़ाई तथा परीक्षाओं से जोड़ा जाएगा।
प्रत्येक ग्राम पंचायत में बनाए जाने वाले शिक्षा घर में विद्यार्थियों को निशुल्क ऑनलाइन कक्षाओं के साथ अध्ययन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। ओपन बोर्ड इन विद्यार्थियों के लिए 10वीं और 12वीं की परीक्षा आयोजित करेगा। परीक्षा पास करने वाले विद्यार्थियों को बोर्ड की ओर से प्रमाणपत्र दिया जाएगा। इसके लिए ‘शिक्षा घर एप’ भी तैयार किया गया है।
एक केंद्र पर 15 से 30 विद्यार्थियों की व्यवस्था
शिक्षा घर शुरू करने के लिए किसी ग्राम पंचायत में कम से कम 15 विद्यार्थियों का होना जरूरी होगा। एक केंद्र में अधिकतम 30 बच्चों को शामिल किया जाएगा। यदि किसी पंचायत में विद्यार्थियों की संख्या 30 से अधिक होती है, तो वहां दो शिक्षा घर भी बनाए जा सकेंगे।
विद्यार्थियों की दिनचर्या और उनके काम को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन कक्षाओं का समय निर्धारित किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि काम करने वाले विद्यार्थी भी अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। इन ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन राज्य ओपन स्कूल बोर्ड के स्टूडियो से किया जाएगा।
शिक्षा घर चलाने के लिए आवेदन आमंत्रित
शिक्षा घर संचालित करने के इच्छुक लोगों को अपनी समग्र आईडी के जरिए एमपीई सेवा पोर्टल पर पंजीयन कर आवेदन करना होगा। आवेदन के दौरान अभ्यर्थी को अपनी शैक्षणिक योग्यता की जानकारी देनी होगी। इसमें 10वीं, 12वीं, स्नातक, डीएलएड और बीएड सहित अन्य संबंधित योग्यताओं का विवरण देना होगा।
आवेदक को शिक्षा घर के लिए उपलब्ध कमरे और पर्याप्त स्थान की जानकारी भी देनी होगी। इसके अलावा शौचालय, पेयजल, टीवी और इंटरनेट जैसी ऑनलाइन पढ़ाई से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध होने का विवरण देना जरूरी होगा। शिक्षा घर संचालित करने वाला आवेदक मध्यप्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए।
पहले चिन्हित होंगे स्कूल से बाहर बच्चे
राज्य ओपन बोर्ड की ओर से आठवीं और 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ चुके तथा वर्तमान में स्कूल से बाहर बच्चों की पहचान की जा रही है। चिन्हित विद्यार्थियों को शिक्षा घर के माध्यम से दोबारा पढ़ाई से जोड़ने की योजना है।
राज्य ओपन बोर्ड के संचालक रविंद्र सिंह ने बताया कि फिलहाल योजना की शुरुआत बड़वानी और नर्मदापुरम से की जाएगी। इसके बाद इसे मध्यप्रदेश के सभी जिलों में लागू किया जाएगा।








