दतिया में कांग्रेस की लगातार दूसरी जीत, भाजपा की हार के पीछे आखिर क्या हो सकते हैं बड़े कारण ?
दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने लगातार दूसरी बार भाजपा को मात देते हुए सीट अपने नाम कर ली। कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 6056 मतों के अंतर से हराया। चुनाव परिणाम का एक अहम पहलू यह भी रहा कि पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के पोलिंग बूथ क्रमांक 121 पर भी भाजपा पीछे रही। इस बूथ पर कांग्रेस को 291 जबकि भाजपा को 264 वोट मिले।
मतगणना पूरी होने के बाद भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने कहा कि पार्टी हार के कारणों की समीक्षा करेगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जो लोग स्वयं को भाजपा का सच्चा कार्यकर्ता बताते थे, उन्होंने चुनाव में अपेक्षित सहयोग नहीं किया। दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने कहा कि यदि कहीं भीतरघात हुआ भी है तो उससे जीत के अंतर पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा।
आखिरी चरणों में घटा जीत का अंतर
मतगणना के शुरुआती दौर में कांग्रेस लगातार बढ़त बनाए रही। नौवें राउंड तक पार्टी की बढ़त 9519 वोटों तक पहुंच गई थी। इसके बाद 14वें राउंड में कांग्रेस को 6614 और भाजपा को 3100 वोट मिले, जिससे बढ़त 7459 वोट रह गई। अंतिम चरणों में यह अंतर और कम हुआ, लेकिन अंततः कांग्रेस 6056 वोटों से विजयी घोषित हुई।
मतगणना के दौरान नौवें राउंड में ईवीएम रखने के स्थान को लेकर भाजपा और कांग्रेस के एजेंटों के बीच विवाद की स्थिति बन गई। मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को समझाया, जिसके बाद मामला शांत हो गया और गिनती का काम सामान्य रूप से जारी रहा।
राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद हुआ उपचुनाव
दतिया विधानसभा सीट उस समय रिक्त हुई थी जब कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को सहकारी ग्रामीण विकास बैंक से जुड़े धोखाधड़ी मामले में दो वर्ष की सजा सुनाई गई। इसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई और इस सीट पर उपचुनाव कराया गया। इससे पहले वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में राजेंद्र भारती ने तत्कालीन गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को 7742 वोटों से हराया था।
पीसी शर्मा ने मतदाताओं का जताया आभार
भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचे पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने दतिया की जनता और मतदाताओं को कांग्रेस पर भरोसा जताने के लिए बधाई दी। उन्होंने इसे पार्टी कार्यकर्ताओं की मेहनत और मतदाताओं के समर्थन का परिणाम बताया।
भाजपा की हार के संभावित कारण !
1. उम्मीदवार चयन को लेकर रणनीतिक फैसला सवालों में
राजनीतिक जानकारों के अनुसार भाजपा की सबसे बड़ी चुनौती उम्मीदवार चयन रही। पार्टी ने लंबे समय तक दतिया का प्रतिनिधित्व कर चुके पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं देकर नए चेहरे आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा। इस फैसले के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आया। टिकट घोषित होने के बाद जिला अध्यक्ष समेत कई स्थानीय पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया और नरोत्तम मिश्रा समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन भी किया। चुनाव प्रचार के दौरान इसका असर संगठन की सक्रियता पर दिखाई दिया।
2. अंदरूनी असंतोष और कथित भीतरघात
पूरे चुनाव अभियान के दौरान भाजपा संगठन पूरी तरह एकजुट नजर नहीं आया। कई स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता चर्चा का विषय बनी रही। चुनावी माहौल के दौरान कई स्थानीय नेताओं ने नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर यह भी कहा कि टिकट बदलने के फैसले से कार्यकर्ताओं में नाराजगी थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस अंदरूनी असंतोष का असर मतदान पर भी पड़ा और कई शहरी मतदान केंद्रों पर भाजपा को नुकसान उठाना पड़ा।
3. स्थानीय बनाम बाहरी उम्मीदवार का मुद्दा
भाजपा ने भांडेर से जुड़े आशुतोष तिवारी को दतिया से उम्मीदवार बनाया। चुनाव प्रचार के दौरान विपक्ष ने इसे स्थानीय बनाम बाहरी उम्मीदवार का मुद्दा बनाया। कई मतदाताओं का कहना था कि वे आशुतोष तिवारी को स्थानीय राजनीति में सक्रिय रूप से नहीं जानते थे। हालांकि वे लंबे समय से संगठन में कार्यरत रहे, लेकिन पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने के कारण मतदाताओं से उनका सीधा जुड़ाव सीमित माना गया।
इसके विपरीत कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह पहले भी दो बार दतिया से विधायक रह चुके हैं। स्थानीय पहचान और क्षेत्रीय जुड़ाव को कांग्रेस ने चुनाव प्रचार का प्रमुख मुद्दा बनाया, जिसका उसे लाभ मिलता दिखाई दिया।
4.कांग्रेस का मजबूत संगठन और बेहतर चुनाव प्रबंधन
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार कांग्रेस की जीत के पीछे उसका बेहतर संगठनात्मक तालमेल भी एक महत्वपूर्ण कारण रहा। पार्टी ने विधानसभा क्षेत्र को अलग-अलग क्लस्टरों में बांटकर चुनाव अभियान संचालित किया। बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता, मतदाताओं तक लगातार संपर्क और संगठन के भीतर समन्वय अपेक्षाकृत मजबूत रहा। चुनाव प्रचार के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी लगातार दतिया में सक्रिय रहे। कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने और बूथ प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की रणनीति को भी कांग्रेस की सफलता का अहम आधार माना जा रहा है।








