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नन्हे हाथों ने रचाया अक्ति विवाह सागर में परंपरा संग खिलखिलाई बचपन की खुशी

नन्हे हाथों ने रचाया अक्ति ...

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नन्हे हाथों ने रचाया अक्ति विवाह सागर में परंपरा संग खिलखिलाई बचपन की खुशी

अक्षय तृतीया पर बच्चों ने मिट्टी के पुतरा-पुतरी का विवाह कर निभाई परंपरा, हर गली में सजी छोटी-सी बारात

सागर। शहर में अक्षय तृतीया (अक्ति) का पर्व इस बार भी परंपरा,और खुशियों के अनोखे संगम के साथ मनाया गया। शहर के अलग-अलग मोहल्लों में नन्हे बच्चों ने मिट्टी से बने पुतराऔर पुतरी का विवाह रचाकर पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया।

छोटे-छोटे बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ बारात निकाली, गीत गाए और हंसी-ठिठोली के बीच विवाह की रस्में निभाईं। हर गली में ऐसा लग रहा था मानो कोई असली शादी हो रही हो बस फर्क इतना था कि इसमें मासूमियत और खेल की मिठास घुली हुई थी।

इस परंपरा के पीछे मान्यता है कि पुतरा-पुतरी का विवाह करवाने से सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। साथ ही यह बच्चों को भारतीय संस्कारों और परंपराओं से जोड़ने का एक सहज और सुंदर तरीका भी है।

शाम 5:00 बजे से मौसम में ठंडक आने के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं अपने बेटियों के साथ पास के ही मंदिर पहुंचे जहां बरगद के पेड़ के नीचे पूजा-अर्चना कर विवाह की रस्में निभाईं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन बरगद की पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। अक्षय तृतीया का महत्व भी खास है। इस दिन किए गए शुभ कार्य कभी समाप्त नहीं होते, बल्कि उनका फल निरंतर बढ़ता रहता है। यही वजह है कि इस दिन विवाह, दान-पुण्य और नई शुरुआत को बेहद शुभ माना जाता है।

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हमारे बारे में योगेश दत्त तिवारी पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और मीडिया की दुनिया में एक विश्वसनीय और सशक्त आवाज के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। अपने समर्पण, निष्पक्षता और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता के चलते उन्होंने पत्रकारिता में एक मजबूत स्थान बनाया है। पिछले 15 वर्षों से वे प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र 'देशबंधु' में संपादक के रूप में कार्यरत हैं। इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने समाज के ज्वलंत मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है और पत्रकारिता के उच्चतम मानकों को बनाए रखा है। उनकी लेखनी न सिर्फ तथ्यपरक होती है, बल्कि सामाजिक चेतना को भी जागृत करती है। योगेश दत्त तिवारी का उद्देश्य सच्ची, निष्पक्ष और जनहितकारी पत्रकारिता को बढ़ावा देना है। उन्होंने हमेशा युवाओं को जिम्मेदार पत्रकारिता के लिए प्रेरित किया है और पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम माना है। उनकी संपादकीय दृष्टि, विश्लेषणात्मक क्षमता और निर्भीक पत्रकारिता समाज के लिए प्रेरणास्रोत रही है।
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