MP : हर साल बर्फीले प्रदेशों के 70 प्रजातियों के करीब 10 हजार पक्षी बनते हैं वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के मेहमान
सुरक्षित आवास और भोजन की तलाश में टाइगर रिजर्व की और आते हैं प्रवासी पक्षी

तेंदूखेड़ा। जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में जहां बाघों की बसाहट की है तो यहीं चीते बसाने की तैयारी चल रही है लेकिन यहां पर हर साल सर्दियों में सत्तर से अधिक प्रजापतियों के दस हजार प्रवासी पक्षी प्राकृतिक रूप से आते हैं और गर्मियां शुरू होते ही वापस चले जाते हैं। टाइगर रिजर्व में भी प्रवासी पक्षियों की अठखेलियों के हिसाब से व्यवस्थाएं की हैं दरअसल शीत ऋतु में ठंडे देशों में बर्फबारी के कारण वहां के स्थानीय पक्षियों के ठिकाने नष्ट हो जाते हैं इनके आहार भी बर्फ में दबकर नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में ये पक्षी सुरक्षित ठिकानों और आहार की तलाश में हजारों किमी की दूरी तय करके टाइगर रिजर्व सहित कई स्थानों पर पहुंच जाते हैं यहां आने वाले अधिकांश पक्षी जलीय होते हैं और उनका आहार जलीय जीव होता है जिस कारण ये अपना डेरा टाइगर रिजर्व के जलस्त्रोतों के पास डालते हैं टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा यहां पर बनाए तालाबों में पेड़ नुमा लकड़ियां लगाई हैं ताकि ये पक्षी इन पेड़ों पर सुरक्षित बैठकर कलरव कर सकें जानकारों के अनुसार वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में रूस, मध्य एशिया के कजाकिस्तान, अफगानिस्तान, लद्दाख तिब्बत, तिब्बत, साइबेरिया से ठंड शुरू होते
ही सारस क्रेन बिस्लिंग, ब्लैक नेक्ड स्टार्क, पेंटेड स्टार्क, सैंडपाइपर, कॉर्पोरेंट मुख्य रूप से हर साल पहुंचते हैं और गर्मी की दस्तक के साथ ही वापस चले जाते हैं।

इस मामले में रिटायर्ड एसडीओ सेवाराम मलिक बताते हैं कि टाइगर रिजर्व में प्रवासी पक्षियों के आहार के लिए वनस्पति व कीड़े-मकोड़े मौजूद हैं, जिस कारण प्रवासी पक्षी यहां पर आते हैं। इन पक्षियों का भी विशेष महत्व है। वे यहां पर रहते हैं, अंडे देते हैं








