MP : वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में आएंगे दो नए हाथी हथिनी चंदा हाथी नील को मिल रहे हैं दो नए साथी
टाइगर रिजर्व में बढ़ते बाघों के कुनबे की निगरानी करने में प्रबंधन को होगी आसानी 30 से अधिक हो गई बाघों की संख्या
रिपोर्ट : विशाल रजक
दमोह/तेंदूखेड़ा। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा तेजी से बढ़ता जा रहा है लेकिन प्रबंधन के पास इनकी निगरानी के लिए मात्र दो ही हाथी हैं हाथियों की कमी के चलते टीम को गश्त और निगरानी में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है वर्तमान में यहां सिर्फ दो हाथी नील और चंदा की जोड़ी उपलब्ध है जो सुरक्षा व्यवस्था के लिए पूरी तरह से अपर्याप्त है लेकिन अब वन मुख्यालय ने टाइगर रिजर्व को दो हाथी और आवंटित किए हैं जो जल्द ही आ जाएंगे। इससे प्रबंधन को बाघों की निगरानी में सहूलियत होगी और मौजूदा हाथी नील व हथिनी चंदा को नए साथी मिलेंगे टाइगर रिजर्व जब नौरादेही अभयारण्य हुआ करता था तब 2018 में बाघ शिफ्टिंग के दौरान बाघ-बाघिन (राधा-किशन) के साथ ही बांधवगढ़ से वनराज नामक हाथी और पन्ना से चंदा नामक हथिनी को लाया गया था, लेकिन 2020 में वनराज की मौत हो गई। इसी बीच यहां पर बाघों का कुनबा बढ़ने लगा और निगरानी की जिम्मेदारी एकमात्र हथिनी चंदा पर रही। जनवरी 2022 में बांधवगढ़ से नील नामक एक और हाथी को लाया गया, तब से अब तक चंदा व नील बाघों की निगरानी कर रहे हैं, लेकिन अब बाघों की संख्या बढ़कर 30 से अधिक पहुंच गई है। ऐसे में हाथियों की जरूरत बढ़ गई

खाइयों, गुफाओं में बाघों को खोजने में हाथियों की भूमिका महत्वपूर्ण
बाघों के कुनबे की निगरानी के लिए टाइगर रिजर्व में वाहन भी लगे हैं जो बाघ-बाघिन का लगातार पीछा करके आईडी कॉलर के माध्यम से लोकेशन प्राप्त करते रहते हैं लेकिन कई बार लोकेशन टूट जाती है जिससे वन महकमे के अधिकारियों की सांसें फूल जाती हैं साथ ही कई बाघ बाघिन और शावक बिना कॉलर आईडी रिजर्व में विचरण कर रहे हैं वाहन उन खाइयों और पहाड़ की गुफाओं तक नहीं पहुंच पहुंच पाते जहां बाघ होते हैं या उनकी लोकेशन प्राप्त होती है। तब वन अमला हाथियों पर सवार होकर बाघों को खोजता है और हाथी बाघ को देखकर चिंघाड़ देते हैं, जिससे विभाग को बाघों की लाइव लोकेशन प्राप्त हो जाती है

30 साल की हथिनी चंदा नहीं बन सकती कभी मां
2018 में पत्रा से लाई गई 30 वर्षीय हथिनी चंदा कभी भी मां नहीं बन सकती। दरअसल जब वह पत्रा में थी तो गर्भ में ही उसका बच्चा मृत हो गया था, जिस कारण चंदा का गर्भाशय निकालकर उसकी जान बचाई थी। 2020 में वनराज की मौत के बाद चंदा अकेली हो गई थी, जिससे वह चिड़चिड़ी हो गई थी और उसे छह क्विंटल वजनी जंजीर से बांधना पड़ता था। लेकिन 2022 में नील नामक नए साथी के साथ चंदा फिर से टाइगर रिजर्व में रमी हुई है। दो हाथी और आने से न केवल चंदा को बल्कि नील को भी साथी मिल जाएंगे। दो और हाथी आवंटित, जो शीघ्र ही आ जाएंगे

हाथियों से किस तरह सुरक्षा में मदद मिलती है
हाथियों पर बैठकर टाइगर रिजर्व के कर्मचारी दूर दूर तक सुरक्षित रूप से नजर रख सकते हैं। हाथी जंगल के विषम इलाकों में भी पहुंच सकते हैं। विषम परिस्थितियों में जब किसी बाघ को ट्रैंकुलाइज किया जाता है, तब इसमें हाथी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे कर्मचारी आसानी से बाघ का रेस्क्यू कर सकते हैं

तीन साल पहले बना दुर्गावती टाइगर रिजर्व
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व बने तीन साल से ज्यादा समय हो गया। इस दौरान बाघों की संख्या बढ़ी अभी टाइगर रिजर्व में 30-35बाघों और शावकों की संख्या होने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन निगरानी के लिए सिर्फ दो हाथी हैं। एक नर हाथी नील और एक मादा हाथी चंदा। इन्हीं दो हाथियों को एक रेंज से दूसरी रेंज भेजा जाता था रिजर्व की छह रेंज के लिए दो हाथी पर्याप्त नहीं थे अगर किसी रेंज में पेट्रोलिंग, निगरानी या रेस्क्यू के लिए हाथी की जरूरत पड़ती है तो कैंप से हाथी आने में दो दिन लग जाते हैं। इससे हाथी थक जाते हैं और जल्दी बीमार हो जाते हैं। दो हाथियों के खान-पान और देखरेख में अच्छा खासा बजट आता है। जंगल में चेन से बांधकर हाथियों को छोड़ा जाता है, जहां वे पेड़ों की पत्तियां खाते हैं। बाघ के रेस्क्यू के लिए चारों तरफ से घेरने के लिए हाथियों की जरूरत होती है। लेकिन यहां सिर्फ दो तरफ से हाथी घेरते हैं और बाकी दो तरफ से जिप्सी का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन अब दो और हाथी आने से रेस्क्यू करने में टीम को परेशान नहीं होना पड़ेगा
इनका कहना
टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यालय से टाइगर रिजर्व के लिए दो हाथी और आवंटित किए गए हैं जो शीघ्र ही आ जाएंगे








