चालकों में हादसे का डर, पुल की सड़क का डामर बहा, पूरे पुल पर बड़े-बड़े गड्ढे, नीचे 5000 से ज्यादा मगरमच्छों का खतरा, शासन-प्रशासन कर रहा हादसे का इंतजार
अंकित घोसी तारादेही। तेंदूखेड़ा ब्लॉक में आज भी कई पुल-पुलिया क्षतिग्रस्त हालत में हैं और हादसों को दावत दे रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। लोगों का कहना है कि प्रशासन शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है
दो मानसून बीत गए, आज तक नहीं लगी रेलिंग
इसका सबसे बड़ा उदाहरण तारादेही ग्राम में व्यारमा नदी पर बना पुल है। पिछले साल आई बाढ़ में इस पुल की रेलिंग कई हिस्सों में टूटकर बह गई थी। डेढ़ साल बीत चुके हैं, दो मानसून की विदाई हो चुकी है, लेकिन आज तक रेलिंग नहीं लगाई गई है। बिना रेलिंग के यह पुल लोगों के लिए खतरे का सबब बना हुआ है बता दें कि वर्ष 2025 में व्यारमा नदी आफत बनकर आई थी। बाढ़ के चलते एक दर्जन गांव चपेट में आ गए थे, दर्जनों किसानों की फसलें डूब गई थीं और कई घर बर्बाद हो गए थे। अधिकारियों ने मदद की बात तो कही, लेकिन इस पुल की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
पुल पर बड़े-बड़े गड्ढे, उखड़ा डामर
बारिश के तेज बहाव में पुल की ऊपरी परत का डामरीकरण भी बह गया है। पुल पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिससे बाइक सवार गिरकर घायल हो रहे हैं। पुल धीरे-धीरे ऊपर से और ज्यादा क्षतिग्रस्त हो रहा है।
यह पुल तेंदूखेड़ा, पाटन, देवरी, तारादेही, दमोह सहित दर्जनों गांवों को जोड़ता है और भोपाल-सागर-जबलपुर-नरसिंहपुर राजमार्ग का मुख्य मार्ग है। इस पुल से प्रतिदिन दर्जनों बसों और सैकड़ों वाहनों का आना-जाना लगा रहता है। इसी पुल से वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व की सीमा भी शुरू होती है, फिर भी जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठा है।
नदी में हजारों मगरमच्छ, हादसे पर और बड़ा खतरा
कोटखेड़ा, तारादेही, झलौन, तेजगढ़, इमलिया होते हुए बहने वाली व्यारमा नदी में हजारों मगरमच्छों का बसेरा है। ग्रामीणों के अनुसार इस नदी में 5 हजार से ज्यादा छोटे-बड़े मगरमच्छ हैं। बारिश के दिनों में ये मगरमच्छ निकलकर रिहायशी इलाकों तक पहुंच जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बिना रेलिंग वाले पुल से यदि कोई वाहन नीचे गिरता है तो घायल होने के साथ-साथ मगरमच्छों से जान का खतरा भी बन सकता है

वाहन चालकों में दहशत, शासन-प्रशासन कर रहा हादसे का इंतजार
वाहन चालकों का कहना है कि इस पुल से निकलते समय हमेशा डर बना रहता है। गड्ढों के कारण एक पहिया सड़क पर तो दूसरा गड्ढे में चला जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी लोडिंग वाहनों, ट्रैक्टर-ट्रॉली को होती है, खासकर रात के समय
तारादेही सहित आसपास के ग्रामीणों ने कहा कि शासन-प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, तभी तो अभी तक मरम्मत और रेलिंग लगाने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। जब कोई बड़ा हादसा हो जाएगा, तब जाकर प्रशासन की नींद खुलेगी। जिले में अक्सर हादसों के बाद ही प्रशासन जागता है। पुल के दोनों तरफ मोड़ भी हैं, जिससे किसी भी दिन बड़ा हादसा होने का अंदेशा बना हुआ है
ग्रामीणों ने मांग की है कि जल्द से जल्द पुल की रेलिंग लगाई जाए और डामरीकरण कर गड्ढों की मरम्मत की जाए








