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सागर के मालथौन में लंगूरों का आतंक एक सप्ताह में एक दर्जन घायल, दो के टूटे हाथ-पैर, दहशत में ग्रामीण, लंगूर हो रहे हिंसक

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सागर के मालथौन में लंगूरों का आतंक एक सप्ताह में एक दर्जन घायल, दो के टूटे हाथ-पैर, दहशत में ग्रामीण, लंगूर हो रहे हिंसक
सागर/मालथौन।  तहसील क्षेत्र के ग्राम अटाकर्नेलगढ़ में पिछले एक सप्ताह से जंगली जानवरों, विशेषकर लंगूरों ने भारी आतंक मचा रखा है। रहवासी बस्तियों में घुसकर ये लंगूर अब सीधे इंसानों पर हमला कर रहे हैं, जिससे ग्रामीण बुरी तरह जख्मी हो रहे हैं। आलम यह है कि गांव में दहशत का माहौल है और लोग घरों से निकलने में भी डर महसूस कर रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले सात दिनों के भीतर लंगूरों ने लगभग एक दर्जन ग्रामीणों को काटकर घायल कर दिया है। हमलों की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दो लोगों के हाथ-पैर तक टूट चुके हैं। घायलों में शालिनी तोमर 27, निर्मला तोमर 52 और 12 वर्षीय बालक कार्तिक सिंह तोमर शामिल हैं। वहीं लंगूर के हमले से अनिरुद्ध मिश्रा का पैर टूट गया है और सोबरन राय का हाथ फ्रैख्र हो गया है। हाल ही में संध्या तिवारी पति अशोक तिवारी को भी लंगूर ने काटकर बुरी तरह जख्मी कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि गाँव में लगातार हो रहे इन हमलों के बावजूद जिम्मेदार प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है। वन विभाग को सूचना दिये जाने के बाद भी अब तक लंगूरों को पकड़ने या उन्हें खदेड़ने के लिये कोई ठोस कदम नहीं उठाये गये हैं।
लंगूरों के हिंसक व्यवहार के कारण
अटाकर्नेलगढ़ की गलियों में सन्नाटा पसरा रहता है। लोग लाठी डंडे लेकर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द रेस्क्यू टीम भेजकर इन हिंसक लंगूरों को पकड़ा जाये, ताकि कोई बड़ी जनहानि होने से रोकी जा सके।
लाल और काले मुहं बंदरो का आतंक
मालथौन में पिछले दो माह से दो दर्जन से ज्यादा काले मुंह के बंदर धमा चौकड़ी मचाये है, हैरत बात है वह विभाग कार्यालय समीप सबसे ज्यादा उत्पात माचाये हुये। पिछले सप्ताह एक चाय दुकान पर कूदकर टीन का छप्पर तहस नहस कर डाला, गनीमत रही दुकान में बैठे लोग बाल बच गये। वन अधिकारी बंदरो को पकड़ने की कार्र्यवाही से हमेशा पल्ला झाड़ते नजर आते है लाल मुंह के बंदरो को अधिकारी वन्यजीव मानते नहीं और काले मुंह वाले बंदरो के आतंक पर चुप्पी साधे हुए हैं।
इनका कहना है-
लंगूर-बंदरों के उत्पात से ग्रामवासी परेशान है, इनके हमले में किसी का हाथ, किसी का पैर टूट गया। अनेक लोगो को नोंच लिया। ग्राम पंचायत के पास कोई ऐसी व्यवस्था नहीं है, जो बंदरो को पकड़ने की कार्यवाही कर सके।
– आशीष सिंह तोमर,सरपंच प्रतिनिधि अटाकर्नेलगढ़
जानवर को चोट पहुचा रहे है तो सरकारी अस्पताल में इलाज करवायें। यदि लाल मुंह के बंदर है तो स्थानीय निकाय या पंचायत उन्हें पकड़ने की व्यवस्था करवायें।
-नीतेश सोनी, रेंजर मालथौन
इस संबंध में वरिष्ठ कार्यलय में सूचित कर कार्यवाही करवाते हैं। – मनोज चौरसिया, एसडीएम मालथौन/खुरई

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