लिव-इन में रहने वाली महिलाओं को मिलेगा संपत्ति और भरण-पोषण का हक ? UCC पर छिड़ी बहस
राज्य सरकार की समिति ने 30 से ज्यादा सवालों पर जनता से सुझाव मांगे, 15 नवंबर 2026 तक दे सकते हैं अपनी राय
आजकल बड़ी संख्या में जोड़े बिना शादी किए एक साथ लिव-इन में रह रहे हैं। ऐसे रिश्तों में अक्सर एक सवाल खड़ा होता है कि अगर दोनों पार्टनर के बीच झगड़ा या अलगाव हो जाए, तो क्या महिला अपने साथी से संपत्ति में हिस्सा या गुजारा-भत्ता मांगने की हकदार होगी? इसी अहम मुद्दे पर अब महाराष्ट्र में चर्चा तेज हो गई है। राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर आम लोगों से सुझाव मांगना शुरू किया है।
सरकार ने किन बिंदुओं पर राय मांगी है?
महाराष्ट्र में UCC के लिए बनाई गई समिति ने जो प्रश्नावली तैयार की है, उसमें लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधानों पर विशेष जोर दिया गया है। समिति का सबसे बड़ा सवाल यही है कि लिव-इन में रहने वाली महिलाओं को भी क्या शादीशुदा महिलाओं की तरह प्रॉपर्टी और भरण-पोषण से जुड़े कानूनी अधिकार मिलने चाहिए। कमेटी इसी मुद्दे पर लोगों की सोच और सुझाव जानना चाहती है। इसके अलावा भी कई अन्य विषयों पर सवाल पूछे गए हैं।
कई अहम मुद्दे प्रश्नावली में शामिल
समिति ने यह भी पूछा है कि क्या लिव-इन रिलेशनशिप शुरू होने और खत्म होने पर उसे सरकारी तौर पर दर्ज कराने की व्यवस्था होनी चाहिए।
इसी के साथ विरासत और जायदाद के बंटवारे में बेटे-बेटी को बराबर का अधिकार देने के मुद्दे पर भी लोगों की राय ली जा रही है। महिलाओं के संपत्ति से जुड़े अधिकारों से संबंधित कई अन्य सवाल भी इस सूची में रखे गए हैं।
क्या नियम लागू हो गया है?
अब सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार ने इन प्रस्तावों को लागू कर दिया है या सिर्फ विचार किया जा रहा है? तो इसका सीधा जवाब है कि अभी कुछ भी लागू नहीं हुआ है। यह पूरी प्रक्रिया सिर्फ जनता के विचार और सुझाव लेने के लिए है। इसे लागू हुआ मान लेना सही नहीं होगा। जब सभी लोगों के जवाब और सुझाव समिति के पास आ जाएंगे, उसके बाद ही तय किया जाएगा कि इन विषयों पर कोई नया कानून बनाना है या नहीं। फिलहाल यह सिर्फ एक परामर्श प्रक्रिया है।
सुझाव देने की आखिरी तारीख क्या है?
UCC पर जनता की राय लेने के लिए समिति ने 30 से अधिक सवालों की एक सूची जारी की है। इन सभी सवालों पर आम नागरिक 15 नवंबर 2026 तक अपना जवाब और सुझाव भेज सकते हैं। तय समय सीमा के बाद मिले सुझावों पर ही आगे विचार-विमर्श किया जाएगा।








