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80 KM दूर से चल रहा सागर का सिस्टम ! PHE और आदिम जाति विभाग प्रभार के भरोसे, जनता बेहाल

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80 KM दूर से चल रहा सागर का सिस्टम ! PHE और आदिम जाति विभाग प्रभार के भरोसे, जनता बेहाल

सागर। मध्य प्रदेश शासन की कार्यप्रणाली पर इन दिनों सागर जिले में गहरे सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। जिला मुख्यालय के दो सबसे महत्वपूर्ण और सीधे जनता से जुड़े विभाग लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) और आदिम जाति कल्याण विभाग— वर्तमान में ‘प्रभार’ की बीमारी से ग्रसित हैं। शासन की अजब-गजब व्यवस्था का आलम यह है कि इन विभागों की मुख्य कमान सागर के पास न होकर, यहाँ से 80 किलोमीटर दूर दमोह में बैठे अधिकारियों के हाथों में है। यह स्थिति सागर जैसे संभाग मुख्यालय की गरिमा पर प्रहार करती है, जहाँ जनता को अपने जायज काम के लिए अधिकारियों का इंतजार करना पड़ रहा है।

पीएचई विभाग: प्यासी जनता और ‘लापता’ जिम्मेदार प्रभारी अधिकारी

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, विभाग के प्रभारी अधिकारी अशोक मुकाती की मुख्यालय से अनुपस्थिति के कारण भीषण गर्मी में ग्रामीण अंचल पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। अशोक मुकाती की मुख्य जिम्मेदारी दमोह में होने के कारण सागर का प्रभार केवल कागजों तक सिमट कर रह गया है। हाल ही में प्राप्त जानकारी अनुसार, जब बंडा बरा के सरपंच ग्रामीणों के साथ समस्या लेकर कार्यालय पहुंचे, तो अधिकारी के मौजूद न होने से उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। 80 किलोमीटर के इस प्रशासनिक फासले के कारण निरीक्षण का अभाव है और मैदानी अमला बेलगाम होता जा रहा है, जिसका खामियाजा प्यासी जनता भुगत रही है।

आदिम जाति कल्याण: सहायक आयुक्त अदिति शांडिल्य का ‘पार्ट-टाइम’ प्रभार

यही विडंबना आदिम जाति कल्याण विभाग के साथ भी खड़ी है। दमोह में पदस्थ अदिति शांडिल्य के पास सागर जिले का भी अतिरिक्त प्रभार है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिम्मेदार अधिकारी की मुख्य पोस्टिंग और प्राथमिकता दमोह होने के कारण, सागर कार्यालय में उनकी उपस्थिति केवल नाममात्र या सीमित समय के लिए ही रह गई है। स्थिति यह है कि अदिति शांडिल्य या तो दमोह के अपने मूल कार्यों में व्यस्त रहती हैं या फिर केवल जिला प्रशासन की अनिवार्य बैठकों में हिस्सा लेने सागर आती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस ‘प्रभारी’ व्यवस्था से सागर के सैकड़ों छात्रावासों और हजारों आदिवासी छात्रों के संवेदनशील मुद्दों और छात्रवृत्ति जैसे आवश्यक कार्यों का समय पर निराकरण संभव हैं।

आज जनता के बीच यह बड़ा सवाल है। कि क्या सागर जैसे संभाग मुख्यालय पर सक्षम अधिकारियों का अकाल पड़ गया हैं।, जो पड़ोसी जिले के भरोसे शासन चलाना पड़ रहा हैं। मीलों दूर से किराया फूँककर आने वाले गरीबों के लिए यह व्यवस्था मानसिक प्रताड़ना जैसी है। क्या शासन इस अव्यवस्था को बंद कर सागर की जनता को पूर्णकालिक स्थानीय अधिकारी उपलब्ध कराएगा, या ‘प्रभार’ का यह खेल चलता रहेगा।

पक्ष जानने का प्रयास:

इस अव्यवस्था पर जब दोनों जिम्मेदार अधिकारियों, अशोक मुकाती (पीएचई) और अदिति शांडिल्य (सहायक आयुक्त) का पक्ष जानने हेतु मैं उनके कार्यालय पहुँचा, तो दोनों ही अनुपस्थित मिले। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस ‘रिमोट कंट्रोल’ व्यवस्था की वजह से मौके पर जनता के सवालों का जवाब देने वाला कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं था।

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मैं सूरज सेन पिछले 6 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं और मैने अलग अलग न्यूज चैनल,ओर न्यूज पोर्टल में काम किया है। खबरों को सही और सरल शब्दों में आपसे साझा करना मेरी विशेषता है।
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