आंसू सूखे नहीं थे… तेरहवीं के अगले दिन ही मां-बच्चों को घर से निकाला, इंसाफ की गुहार लेकर महिला पहुंची थाने
शोक के बीच संवेदनाएं हुईं शर्मसार
सागर। मोतीनगर थाना परिसर में शनिवार शाम एक ऐसा मंजर सामने आया, जिसने हर देखने वाले की आंखें नम कर दीं। एक विधवा मां अपने दो छोटे बच्चों के साथ हाथ में पति की तस्वीर लिए थाने पहुंची बच्चे सहमे हुए थे, और मां की आंखों में बेबसी साफ झलक रही थी।
कल ही घर में पति की तेरहवीं की रस्म पूरी हुई थी… आंगन का सन्नाटा अभी टूटा भी नहीं था कि आज उसी घर से उसे बेघर कर दिया गया। संत रविदास वार्ड निवासी 32 वर्षीय कशिश सुखवानी ने पुलिस को दिए आवेदन में बताया कि 2 अप्रैल को बीमारी के चलते पति संजय सुखवानी की मौत के बाद से ही उसका जीवन पूरी तरह बदल गया।
कशिश का आरोप है कि उसके जेठ राजेश सुखवानी और ननद शोभा, राखी, नीतू अब उसे घर में नहीं रहने दे रहे और पति के हिस्से की संपत्ति से भी बेदखल करने की कोशिश कर रहे हैं। वह बताती है कि जब तक पति जिंदा थे, सब कुछ सामान्य था, लेकिन उनके जाने के बाद ही अपनों ने मुंह मोड़ लिया।
दो मासूम बच्चों को सीने से लगाए वह मां आज न्याय की आस में थाने पहुंची है। हाथ में पति की तस्वीर और दिल में टूटता हुआ भरोसा उसकी हर आह यही सवाल कर रही है कि क्या एक पत्नी और मां का अपने ही घर में कोई हक नहीं ?
महिला ने पुलिस से सुरक्षा और अपने अधिकार दिलाने की मांग की है। फिलहाल पुलिस ने आवेदन लेकर जांच शुरू कर दी है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या इस बेबस मां को इंसाफ मिलेगा या फिर उसकी पुकार भी सिस्टम के शोर में दब जाएगी।








