नन्हे हाथों ने रचाया अक्ति विवाह सागर में परंपरा संग खिलखिलाई बचपन की खुशी
अक्षय तृतीया पर बच्चों ने मिट्टी के पुतरा-पुतरी का विवाह कर निभाई परंपरा, हर गली में सजी छोटी-सी बारात
सागर। शहर में अक्षय तृतीया (अक्ति) का पर्व इस बार भी परंपरा,और खुशियों के अनोखे संगम के साथ मनाया गया। शहर के अलग-अलग मोहल्लों में नन्हे बच्चों ने मिट्टी से बने पुतराऔर पुतरी का विवाह रचाकर पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया।
छोटे-छोटे बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ बारात निकाली, गीत गाए और हंसी-ठिठोली के बीच विवाह की रस्में निभाईं। हर गली में ऐसा लग रहा था मानो कोई असली शादी हो रही हो बस फर्क इतना था कि इसमें मासूमियत और खेल की मिठास घुली हुई थी।
इस परंपरा के पीछे मान्यता है कि पुतरा-पुतरी का विवाह करवाने से सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। साथ ही यह बच्चों को भारतीय संस्कारों और परंपराओं से जोड़ने का एक सहज और सुंदर तरीका भी है।
शाम 5:00 बजे से मौसम में ठंडक आने के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं अपने बेटियों के साथ पास के ही मंदिर पहुंचे जहां बरगद के पेड़ के नीचे पूजा-अर्चना कर विवाह की रस्में निभाईं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन बरगद की पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। अक्षय तृतीया का महत्व भी खास है। इस दिन किए गए शुभ कार्य कभी समाप्त नहीं होते, बल्कि उनका फल निरंतर बढ़ता रहता है। यही वजह है कि इस दिन विवाह, दान-पुण्य और नई शुरुआत को बेहद शुभ माना जाता है।








