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वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बाघिनों का राज, 8 साल में 2 से बढ़कर पहुंचे 30 बाघ

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वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बाघिनों का राज, 8 साल में 2 से बढ़कर पहुंचे 30 बाघ

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बाघिनों का दबदबा वाइल्ड लाइफ के लिए सुखद संकेत प्रबंधक में खुशी

टाइगर रिजर्व में बाघ बाघिन का अनुपात एक के मुकाबले 2-3 बाघिन राधा का कुनबा सबसे बड़ा

रिपोर्ट – विशाल रजक

तेंदूखेड़ा। वीरांगना रानी दुर्गावती नौरादेही टाइगर में बाघिनों का दबदबा बढ़ता जा रहा है. इस टाइगर रिजर्व को टाइग्रेस रिजर्व कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी क्योंकि यहां महज 8 साल पहले बाघों को पुनर्स्थापित किया गया था, जिसके बाद मादा टाइगर्स यानी बाघिनों की संख्या तेजी से बढ़ी है. 2 टाइगर्स से बढ़कर यहां इनकी तादाद 30 तक जा पहुंची है, जिसमें बाघिनों की संख्या बाघों के मुकाबले ज्यादा है. टाइगर रिजर्व प्रबंधन इसे भविष्य के लिए सुखद संकेत मान रहा है

रिजर्व में बाघिन राधा का कुनबा सबसे बड़ा

दरअसल, बाघिनों की संख्या ज्यादा होने से तय है कि यहां बाघों का कुनबा अन्य टाइगर रिजर्व के मुकाबले तेजी से बढ़ेगा. विशेषज्ञ बताते हैं कि कैट फैमिली के अंतर्गत आने वाली बाघिन सामान्य तौर पर एक प्रसव के दौरान 3 से 4 शावकों को जन्म देती है. ऐसे में माना जा रहा है कि कुछ ही सालों में ये आंकड़ा 50 के पार हो जाएगा और फिर तेजी से यहां बाघों का कुनबा बढ़ेगा. जहां तक मौजूदा बाघों में सबसे पहले बसाई गई बाघिन राधा है, जिसे मदर ऑफ नौरादेही कहा जाता है. राधा बाघिन के योगदान की बात करें, तो अब तक वो करीब 10 शावकों को जन्म दे चुकी है

एमपी सबसे बड़ा रिजर्व

वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व को वन्य जीव अभ्यारण्य से टाइगर रिजर्व 22 सितंबर 2023 को घोषित किया गया था. इसके तहत सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिले के वनक्षेत्र को मिलाकर नौरादेही वन्यजीव अभ्यारण्य को वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व नाम दिया गया था. दरअसल, नौरादेही वन्यजीव अभ्यारण्य में पहले से ही बाघ थे, लेकिन 2011 में नौरादेही वन्यजीव अभ्यारण्य बाघविहीन हो गया था. टाइगर रिजर्व के नोटिफिकेशन के पहले ही 2018 में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण परियोजना में शामिल कर नौरादेही में बाघिन राधा और बाघ किशन को बसाया गया था
कुछ ही दिन में इस जोड़े को यहां की आवोहवा पसंद आ गई और यहां बाघों का कुनबा बढ़कर महज 8 ही सालों में 30 के करीब 30 पहुंच गया, जिसमें बाघिनों की संख्या ज्यादा होने के कारण और तेजी से बाघों का कुनबा बढ़ने की उम्मीद है.

कान्हा से लाई गई थी राधा बाघिन, बांधवगढ़ से किशन

टाइगर रिजर्व में बाघिनों का दबदबा होने की बात ऐसे ही नहीं कही जा रही है. दरअसल, यहां के मौजूदा बाघों में सबसे ज्यादा संतानें बाघिन राधा की हैं. बाघिन राधा को एन-1 आईडी दी गई है. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण परियोजना के तहत 2018 में बाघिन राधा को कान्हा से नौरादेही लाया गया था. वहीं, बाघ किशन बांधवगढ़ से नौरादेही भेजा गया था. इन दोनों का योगदान यहां बाघों का कुनबा बढ़ाने में ज्यादा माना जाता है. हालांकि, बाघ किशन की मौत यहां टैरीटोरियल फाइट में हो चुकी है लेकिन बाघिन राधा अभी भी मदर आफ नौरादेही के खिताब के साथ यहां डटी हुई है. दिसंबर 2025 में बाघिन राधा तीन शावकों के साथ देखी गई थी. टाइगर रिजर्व प्रबंधन के अनुमान के मुताबिक टाइगर रिजर्व के 30 बाघों में करीब 10 संतानें राधा की हैं

कुनबा तेजी से बढ़ने की उम्मीद

टाइगर रिजर्व प्रबंधन इस बात को लेकर खुश है कि यहां पर बाघिनों की तादाद बाघों के मुकाबले ज्यादा है. इसलिए वयस्क हो रही बाघिन यहां बाघों का कुनबा और ज्यादा बढ़ाने में मददगार हो रही हैं. आमतौर पर एक बार में बाघिन 3-4 शावकों को जन्म देती है. दूसरी तरफ यहां का विशाल क्षेत्रफल होने के कारण बाघों में आपसी संघर्ष की संभावना बहुत कम है. ऐसे में बाघों का कुनबा आसानी से बढ़ रहा है. एक अनुमान के मुताबिक अगर इसी गति से यहां बाघों की संख्या बढ़ती है, तो आने वाले दो तीन सालों में यहां बाघों का कुनबा 50 के आगे पहुंच जाएगा. टाइगर रिजर्व बनने के बाद इसे पहली बार बाघों की गणना में भी शामिल किया गया है

टाइगर रिजर्व में बाघ-बाघिन का अनुपात एक के मुकाबले 2-3

टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह बताते हैं, ” कह सकते हैं कि यहां पर बाघिनों का दबदबा है. क्योंकि हम मध्यप्रदेश और भारत के दूसरे टाइगर रिजर्व को देखें, तो जो नर-मादा का लिंगानुपात है, वो एक नर बाघ पर डेढ़ या अधिकतम दो बाघिनों का मिलता है. लेकिन नौरादेही या फिर कहें वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व इस मामले में बहुत सौभाग्यशाली है कि यहां पर जो भी शावक हुए, उनमें बाघिनों का प्रतिशत ज्यादा रहा है. हम लोगों का एक अनुमान है कि यहां पर नर मादा बाघ का लिंगानुपात 2 से भी ज्यादा है. ये अनुपात 2.5 या 3 तक माना जा सकता है. आगे जब अखिल भारतीय बाघ गणना के परिणाम आएंगे, तो और भी चीजें पुष्ट हो जाएंगी

Baagh tiger

भविष्य के लिए सुखद संकेत
टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह ने बताया कि ये एक सकारात्मक संकेत की तरह है, क्योंकि अगर हमारे पास मादाओं (बाघिनों) की ज्यादा संख्या है, तो साफ है कि यहां बाघों की संख्या में वृद्धि बहुत तेजी से होगी. यहां पर 2018 में एक बाघ और बाघिन को छोड़ा गया था. आज 20 से 30 के बीच बाघों की संख्या का अनुमान है. अन्य टाइगर रिजर्व की बात करें, जहां इस तरह से बाघ बसाए गए हैं, आप देखेंगे कि लगभग उनके मुकाबले में है या उनसे बेहतर है. अगर हम सरिस्का की बात करें, तो वहां पर नौरादेही से करीब 10 साल पहले 2008 में बाघ बसाए गए थे. अभी वहां पर बाघों की अनुमानित संख्या 30 या 40 के बीच बताई जा रही है. इस मामले में हमारे कर्मचारियों ने बहुत मेहनत की है, उन्होंने वनक्षेत्र को सुरक्षित रखकर बाघों को अपना कुनबा बढ़ाने में मदद की है. वहीं टाइगर रिजर्व के गांवों में रहने वाले ग्रामीणों ने बहुत बड़ा योगदान दिया है.”

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हमारे बारे में योगेश दत्त तिवारी पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और मीडिया की दुनिया में एक विश्वसनीय और सशक्त आवाज के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। अपने समर्पण, निष्पक्षता और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता के चलते उन्होंने पत्रकारिता में एक मजबूत स्थान बनाया है। पिछले 15 वर्षों से वे प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र 'देशबंधु' में संपादक के रूप में कार्यरत हैं। इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने समाज के ज्वलंत मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है और पत्रकारिता के उच्चतम मानकों को बनाए रखा है। उनकी लेखनी न सिर्फ तथ्यपरक होती है, बल्कि सामाजिक चेतना को भी जागृत करती है। योगेश दत्त तिवारी का उद्देश्य सच्ची, निष्पक्ष और जनहितकारी पत्रकारिता को बढ़ावा देना है। उन्होंने हमेशा युवाओं को जिम्मेदार पत्रकारिता के लिए प्रेरित किया है और पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम माना है। उनकी संपादकीय दृष्टि, विश्लेषणात्मक क्षमता और निर्भीक पत्रकारिता समाज के लिए प्रेरणास्रोत रही है।
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